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How do I grow more flowers on my rose plants?

Rose is a woody perennial flowering plant in the family of Rosaceae. There are more than 100’s of species all over the world. It is native to Asia, Europe, North America, and North Western Africa and is best known as ornamental plants for their flowers that spread beautiful fragrances.

They have major applications in perfumes, oils, and powders by crushing rose petals. Rose water is also used in cosmetics, medicinal practices. It is also used in cooking dishes like Barfi, Turkish delight, gulab jamun, halva, jams, and jellies.

To get more flowers on your rose plant, you must follow these steps.

*Choosing the right variety.
Select the desired rose variety you wish to grow. Purchase them from nursery or online. Avoid growing rose variety such as shrubs and climbing roses that make it difficult to grow in the container.

*Suitable Soil.
Roses grow best in moist well-drained You can also mix potting, loam soil and organic matter that is rich in compost or manure. Now place the soil in a pot or container before planting.

*Water and Sunlight.
Water the plant regularly (in sufficient amounts) so that the soil is moist. Avoid overwatering as it can damage the plant growth. Sunlight is an essential factor for all plants to thrive. Place the pot in sunlight for 8 hours a day. It is responsible for photosynthesis in plants and flower blooming.

*Nutrition deficient nutrient.
Deficiency is due to the lack of nutrients like Nitrogen, Potassium, and Phosphorus in rose plants. To overcome this problem you need to fertilize the plant that results in better growth.

Nitrogen: Promotes the growth of foliage
Phosphorus: Strengthens both roots and flowers
Potassium: Overall plant health

*Fertilizing.
Though roses are heavy feeders they can survive without fertilizing. If you wish fertilize them, prefer commercial sprays or homemade organic methods. Use the synthetic fertilizer that helps to grow healthy roots, colorful blooms and supply nutrients to the rose plants.

*Pests and Diseases.
Pests like spider mites, beetles, rose chafers and leafcutter bees damage the plant by eating leaves, sticks, and webs on roses stems and leaves. Diseases like powdery mildew, leaf drop, yellow leaves, black spot, canker are may be due to insufficient amounts of water, sunlight, nutrients to the reduce the effect of pests and diseases keep rose bushes clean, increase air circulation or sprinkle a solution containing baking soda, oil and warm water on rose plants.

*Harvesting.
The plant takes 6-8 weeks for flowering when you plant it in a pot. Harvest rose when flowers bloom especially in a spring or summer season. Select the rose along with the stem to harvest using scissors. Place it in a glass of water until you are ready to use them.

*Rose Plant Care.
Remove dead leaves and canes that help to reduce pests.
Feed rose plants on regular basis with mulch or fertilizers.
Make sure you provide sunlight for a minimum of 6-8 hours a day.
While harvesting wear gloves to protect your hands from thorns.
Clean the rose beds to prevent bacterial and fungal diseases.
When you transplant roses to outdoors add plenty of organic matter such as compost or manure to the soil.

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How to Graft Roses – Everything you need to know about Rose Grafting

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Growing Mango Tree in a Pot

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What to do if insects bite the leaf of your plant

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Taking Care of Plants in Summer

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काजू के पौधे को घर में कैसे लगाए और कैसे ढेर सारे काजू पाये।

काजू का परिचय :- काजू एक प्रकार का पेंड है जिसका फल सूखे मेवे के लिए बहुत लोकप्रिय है। काजू का आयात-निर्यात एक बड़ा व्यापार भी है। काजू से कई प्रकार की मिठाइयाँ और अन्य चीजे बनायीं जाती हैं। काजू का पेंड तेजी से बढ़ने वाला पेंड है जो काजू और काजू का बीज पैदा करता है। काजू की उत्त्पति ब्राजील में हुई है। लेकिन आज काजू को दुनिया भर में उगाया जाता है। सामान्य तौर पर काजू का पेंड 13-14 मीटर तक होता है। हालाँकि काजू की बौनी कल्टीवर प्रजाति जो 6 मीटर की ऊंचाई तक होती है। जल्दी तैयार होने और ज्यादा उपज देने की वजह से बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है।

सही पौधा :- आप जब भी काजू को अपने घर में लगाए तो हायब्रिड पौधा ही लगाए। यह घर के गमलों में आसानी से उग जाता है और कुछ ही समय के अंदर हमें इससे काजू प्राप्त होने लगते हैं।

मिटटी और जलवायु :- काजू को अपने पुरे भारतवर्ष में कही भी उगाया जा सकता है। जिन इलाको में तापमान 20 डिग्री सेल्शियस के ऊपर होता है वहा काजू की फसल बहुत अच्छी होती है। काजू को किसी भी प्रकार की मिटटी में उगाया जा सकता है। लेकिन अगर काजू को रेतीली लाल मिटटी में उगाया जाये तो बहुत अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। 

गमला :- काजू की जड़ें अधिक फैलती हैं। अतः जब भी काजू के पेंड को लगाए तो कम से कम 2 फ़ीट के गमले में ही लगाए। पौधा अच्छे से ग्रोथ कर पायेगा।

काजू लगाने का सही समय :- काजू को किसी भी मौसम में लगाया जा सकता है। लेकिन दक्षिण एशियाई क्षेत्र में जून से दिसम्बर तक का समय उत्तम माना जाता है। 

खाद और उर्वरक :- काजू की फसल खाद डालने पर अच्छा परिणाम देती है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में सही वक्त पर खाद और उर्वरक डालना बेहद जरुरी है। खाद के रूप में वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग कर सकते हैं। 

काजू के प्रकार :- काजू की कई उन्नत और हायब्रिड या वर्णसंकर किस्मे उपलब्ध हैं। अपने क्षेत्र या हमारी वेबसाइट Bonsai Plants Nursery.com से भी आप काजू को उचित दरों पर प्राप्त कर सकते हैं। 

काजू के स्वास्थ्य संबंधी फायदे 

  •  ह्रदय रोग से लड़ने में सक्षम 
  • उच्च रक्तदाब को कम करने में 
  • तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में 
  • पित्त-पथरी को रोकने में 
  • वजन को कम करने में
  • हड्डियों के लिए फायदेमंद 
  • कोलोन, प्रोस्टेट और लिवर कैंसर को रोकने में सहायक 
  • स्वस्थ दिमाक के स्वस्थ संचालन में सहायक 
  • मधुमेह के खतरे को कम करता है। 
  • त्वचा के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। 
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घर में सेब का पौधा कैसे लगाएं और कैसे ढेर सारे फल पायें।

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सेब फलों का राजा तो नहीं पर राजा से कुछ कम भी नहीं! फलों में सबसे ज्यादा खेती सेब कि की जाती है। इसके 2 बड़े कारण हैं। 

  • पहला तो ये की सेब को लम्बे समय तक स्टोर कर के रखा जा सकता है। 
  • दूसरा ये की सेब स्वास्थ्य का सबसे बड़ा खजाना है जो की जीरो कैलोरी में हमें भरपूर पौष्टिकता देता है बल्कि तो ” an apple a day keeps the doctor away” हमें पता ही है। 

सेब का परिचय :- सेब यूरोप के जरिये पूरी दुनिया में फैला। अंग्रेजों ने चाय की तरह ही सेब को भी भारत लाये। शुरुआत में 100 किस्मो के पौधे हिमाचल प्रदेश में लगाए गए। जो की यहाँ से शुरू होकर धीरे-धीरे पुरे हिमालय क्षेत्र में फैल गया। अब की अगर बात की जाये तो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बाद अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड एवं दक्षिण भारत के नीलगिरि पहाड़ियों में भी इसकी खेती होती है। हालाँकि वैज्ञानिक ये भी कहते हैं कि सेब अगर सबसे पहले पैदा हुए थे तो वो जगह थी मध्य एशियाई देश कजाखिस्तान में कहा जाता है कि आज भी वहाँ सैंकड़ों नस्ले अब भी फल-फूल रही है। 

सही पौधे का चयन :- सबसे पहले तो आपको सही पौधे का चयन करना जरुरी होता है। आप अक्सर नर्सरी से पौधा लाकर लगा देते हैं और ये जानने की कोशिश भी नहीं करते की ये किस किस्म का पौधा है देशी है या ग्राफ्टेड(कलमी ) है। आपको घर के पौधे के लिए हमेशा ग्राफ्टेड पौधे ही लगाने चाहिए क्योंकि ये गमले में बहुत ही आसानी से उगाये जा सकते है और बहुत ही कम वक्त में फल देने लगते हैं। 

मिटटी कैसी हो :- सेब के पौधे के लिए सबसे अच्छी मिटटी रेतीली लाल मिटटी मानी जाती है। मुख्य्तः सेब की खेती को बलुई मिटटी और दोमट मिटटी में भी देखा गया है। तो यह कहा जा सकता है की सेब को बलुई और दोमट मिटटी में भी ऊगा सकते हैं। 

गमला :- अगर आप घर में सेब का पेंड गमले में लगा रहे हैं तो गमले की गहराई कम से कम 2 फ़ीट तक होनी चाहिए क्योंकि सेब की जड़ें गहराई तक जाती है। 

लगाने का सही समय :- सेब को वैसे तो किसी भी जलवायु या मौसम में लगाया जा सकता है लेकिन अगर सेब को जनवरी और फरवरी के महीने में लगाना और भी अच्छा होता है। 

याद रखने वाली बातें 

  • हमेशा रोग प्रतिरोधी पौधों का ही उपयोग करना चाहिए। 
  • हमेशा अच्छी जड़ प्रणाली वाले एक साल के पेड़ ही खरीदने चाहिए। 
  • लगाने से पहले पौधों की जड़ों को पानी में भिगो देना चाहिए। 
  • पौधा लगाने के बाद तुरंत पानी डाले। 
  • सेब के पौधे को बड़े जंगली पौधों के पास न लगाए। 
  • नया पौधा लगाने के बाद ग्राफ्टिंग बिंदु से लगभग 30 सेंटीमीटर ऊपर से काट देना चाहिए। 

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आप घर में अंगूर के पौधे को कैसे उगा सकते हैं।

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हमारे देश में व्यावसायिक रूप से अंगूर की खेती पिछले कई छः दशकों से की जा रही है आज महाराष्ट्र में सबसे अधिक जगहों पर अंगूर की खेती की जा रही है। खेती के सा-साथ लोग अंगूर की बेलों को अपने घरों में भी लगा रहे है।

      तो आज हम ये बताने जा रहे है कि अंगूर के पौधे को घर में कैसे लगाए और उनसे फल कैसे प्राप्त करें।

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पौधे की परख :- सबसे जरुरी बात जो है वो ये की आपने सही पौधा चुना है या नहीं। आप अगर चाहते हैं कि आपका अंगूर का पौधा जल्दी से जल्दी फल देने लगे तो आपको ग्राफ्टेड(कलमी) पौधा ही चुनना चाहिए। कलमी पौधा आपका जल्दी ही फल देने के लिए तैयार हो जाता है। अगर आप देशी अंगूर का पौधा लगाने की सोच रहे हैं तो आपको इसके फल खाने के लिए बहुत इंतजार करना पड़ सकता है। इसीलिए जब भी आप अंगूर का पौधा लगाए तो ग्राफ्टेड पौधा ही लगाए।

मिटटी :- अंगूर को किसी भी मिटटी में उगाया जा सकता है। लेकिन अंगूर को अगर आप रेतीली या दोमट मिटटी में लगाते हैं तो बहुत अच्छी बात है क्योंकि रेतीली और दोमट मिटटी में पानी रुकता नहीं है जो अंगूर के लिए बहुत अच्छा होता है। हो सके तो अंगूर के पौधे को चिकनी मिटटी में न ही लगाए।

गमला :- अंगूर के पौधे को जब भी लगाए मिटटी या सीमेंट के गमले में ही लगाना चाहिए और गमला 1 फिट की गहराई का होना चाहिए जिससे अंगूर की जड़े अच्छे से फैल सकें। गमले की तली में एक छोटा सा शुराक कर देना चाहिए। इससे पानी का भराव नही होता है और पौधे की जड़ें सुरक्षित रहती हैं।

खाद :- अंगूर को आप जिस मिटटी में लगाने जा रहे हों उसमे पहले आपको वर्मी कम्पोस्ट को मिला लेना चाहिए।

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अंगूर के फायदे।

  • अँगूर में ग्लूकोज,मैग्नीशियम और साइट्रिक एसिड जैसे कई पोषक तत्त्व पाए जाते हैं। कई बीमारियों में राहत के लिए अंगूर का सेवन करना फायदेमंद होता है। टी.बी. कैंसर और ब्लड-इन्फेक्शन जैसी बीमारियों में बहुत फायदेमंद होता है। 
  • मधुमेह से पीड़ित लोगो को अंगूर का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। ये ब्लड में शुगर के लेवल को कम करता है। अंगूर में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। 
  • माइग्रेन के दर्द से जूझ रहे लोगो को अंगूर का जूस पीना बहुत फायदेमंद होता है। कुछ समय तक अंगूर के रस का नियमित सेवन करने से इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। 
  • हाल ही की शोध में पाया गया की अंगूर के सेवन से ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता है और दिल की बीमारियां भी दूर रहती हैं। 
  • खून की कमी को दूर करने के लिए एक गिलास अंगूर के जूस में 2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से खून की कमी दूर हो जाती है। यह हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है। 
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जानिए कपूर के पौधे के अद्भुद फायदे।

कपूर के फायदे

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1. गठिया रोग :- 500 मिलीलीटर तिल के तेल में 10 ग्राम कपूर मिलाकर शीशी में भर कर उसके बाद ढक्कन को बंद करके रख दें। जब कपूर तेल में अच्छी तरह से घुल-मिल जाये तो गठिया के जोड़ो पर अच्छी तरह से मालिश करें।

2. खाज-खुजली :- चमेली के तेल में कपूर मिलाकर शरीर पर लगाने से खुजली दूर होती है।

3. हाथ-पैरों की ऐठन :- कपूर को चार गुने सरसों के तेल में मिला कर हाथ-पैर पर मालिश करने से हाथ-पैर की ऐठन दूर होती है।

4. बिच्छू के डंक :- बिच्छू के डंक से पीड़ित रोगी को कपूर को सिरके में मिलाकर डंक वाली जगह पर लगाने से जहर नष्ट होने लगता है।

5. प्रसव का दर्द :- यदि प्रसव के समय तेज दर्द हो तो स्त्री को पके केले में 125 मिलीग्राम कपूर मिलाकर खिलाना चाहिए। इसके सेवन से बच्चे का जन्म आराम से हो जाता है।

6. आँखों के रोग :- आँखों के रोग से पीड़ित रोगी को भीमसेनी कपूर को दूध के साथ पीसकर उंगली से आँखों में लगाएं। इससे बहुत सारे रोग में फायदा होता है।

7. बच्चों के पेट में कीड़े होना :- यदि बच्चों के पेट में कीड़े हो गए हैं तो थोड़ा सा कपूर गुड़ में मिलाकर देने से कीड़े मरकर बाहर निकल जाते हैं। इससे पेट दर्द में जल्दी आराम मिलता है।

8. पलकों के बाल झड़ना :- कपूर को नीम्बू के रस में मिलाकर पलकों पर लगाने से पलकों के बालों का झड़ना बंद हो जाता है।

9. छाती का रोग :- कपूर को जला कर उसके धुएं को नाक के द्वारा लेने से छाती के रोग दूर हो जाते हैं।

10. बदहजमी :- कपूर और हींग को बराबर मात्रा में लेकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें और इसकी 1-1 गोली दिन में 3 बार ठंडे पानी के साथ सेवन करें। इससे बदहजमी दूर हो जाती है।

11. मुहांसे :- चेहरे पर कील-मुहांसे हो गया हो तो 3 चम्मच बेसन, एक चौथाई चम्मच हल्दी, चुटकी भर कपूर व  नीम्बू का रस मिलाकर लेप बना लें। इस तैयार पेस्ट को चेहरे पर लेप करें और जब यह सूख जाये तो इसे ठन्डे पानी से धो लें। इससे चेहरे के मुहासे ठीक हो जायेंगे।

12. चेहरे के दाग-धब्बे :-  2 चम्मच पीसी हुई हल्दी, गुलाबजल और चुटकी भर कपूर को मिलाकर चेहरे पर रोजाना लेप लगाएं। इसके प्रयोग 15-20 दिनों तक करने से चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं। इसका लेप करते समय ध्यान रखें कि लेप आँखों के पास न लगे।

13. दाँतों में कीड़े लगना :- कपूर को एल्कोहल में घोलकर, रुई में लगाकर दाँतों के गड्डों में रखने से दांत के कीड़े मर जाते हैं। कपूर कचरी को मंजन की तरह दाँतों पर मलने से दाँतों का दर्द और कीड़े खत्म हो जाते हैं।

14. दिल की धड़कन बढ़ना :- यदि दिल की धड़कन तेज हो गयी हो तो। रोगी को थोड़ा कपूर का सेवन कराएं। इसके सेवन से दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है।

15. पायरिया :- पायरिया होने पर कपूर का टुकड़ा पान में रखकर खूब चबाएं लेकिन चबाते समय ध्यान रखें कि रस अंदर न जाये। लार व रस को बाहर थूकते रहें। इसका प्रयोग काफी दिनों तक करते रहने से पायरिया का रोग ठीक हो जाता है।

                        देशी घी में कपूर मिलाकर प्रतिदिन 3 से 4 बार दांत व मसूड़ों पर धीरे धीरे मलें तथा लार को गिरने दें एवं थोड़ी देर बाद कुल्ला कर लें। इससे पायरिया रोग ठीक होता है।

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कौन-कौन से पौधे शुभ माने जाते हैं और उन्हें घर में जरूर लगाना चाहिए।

हमारे घर के आस पास कई सारे पेंड पौधे लगे होते हैं वही कुछ पेंड पौधों को अशुभ माना जाता है तो कुछ को शुभ भी मन जाता है। तो आज हम आपको कुछ ऐसे पेंड पौधों के बारे में जानकारी देंगे जिनको घर में लगाना शुभ होता है और घर से नकारात्मक शक्तियों को दूर रखते हैं।

तुलसी का पौधा

हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को तो एक तरह से लक्ष्मी का रूप माना गया है। कहा जाता है जिस भी घर में तुलसी की पूजा अर्चना होती है उस घर पर भगवान विष्णु की कृपा दृष्टि सदैव बनी रहती है। तुलसी का पौधा हमारे घर को नकारात्मक चीजों से दूर रखता है और यह हमारे आस पास के वातावरण को भी शुद्ध रखने की ताकत रखता है। 

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शमी का पौधा

शमी का पौधा घर में होना भी बहुत शुभ मन जाता है। शमी के पौधे के बारे में तमाम भ्रांतियां मौजूद हैं और लोग आम तौर पर इसे लगाने से डरते-बचते हैं। ज्योतिष में इसका सम्बन्ध शनि देव से माना जाता है और शनि की कृपा पाने के लिए इस पौधे की लगातार पूजा-उपासना की जाती है। 

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गुड़हल

गुड़हल का पौधा ज्योतिष में सूर्य और मंगल से सम्बन्ध रखता है, गुड़हल का पौधा घर में कही भी लगा सकते हैं परन्तु ध्यान रखें कि उसको पर्याप्त धूप मिलना जरुरी है। गुड़हल का फूल जल में डालकर सूर्य को अर्घ्य देना आँखों, हड्डियों की समस्या को दूर करता है और नाम और यश प्राप्ति में लाभकारी होता है।

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केले का पौधा

केले का पौधा हमे कई तरह से लाभ पहुँचता है। केले का पौधा धार्मिक कारणों से भी बहुत महत्व पूर्ण माना गया है। गुरुवार को इसकी पूजा भी होती है और अक्सर पूजा-पाठ के समय केले के पत्ते का ही इस्तेमाल किया जाता है।

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बांस का पौधा

बांस का पौधा घर में लगाना अच्छा माना जाता है। यह समृद्धि और आपकी सफलता को ऊपर ले जाने की क्षमता रखता है। अगर आपकी तमाम कोशिशों के बाद भी आपको अपने कार्यक्षेत्र में मनचाही सफलता नहीं मिल रही तो आपको अपने भवन/कार्यालय में बांस का पौधा लगाना चाहिए। 
फेंगशुई में बांस के पौधे को बहुत महत्व दिया गया है। बांस संसार का अकेला ऐसा पौधा है जो हर वातावरण में हर मुश्किल के बाद भी तेजी से बढ़ता है। इसीलिए इसे उन्नति, दीर्घआयु और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 

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मनीप्लान्ट

ऐसी मान्यता है कि घर में मनीप्लान्ट लगाने से सुख-समृद्धि का वास होता है। इसी के चलते लोग अपने घरों में यह पौधा जरूर लगाते हैं। मनीप्लान्ट का पौधा घर में कही भी आसानी से लग जाता है और इसका बहुत रखरखाव भी नहीं करना पड़ता है।

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बेलपत्र का पौधा

बेल के पौधे को तो आप सभी जानते होंगे क्योंकि सावन के महीने में सभी लोग भगवान शंकर जी की पूजा बेलपत्र से ही करते हैं। अगर यह पौधा आपके घर में या आस-पास कही भी लगा हो तो बहुत ही शुभ माना जाता है। 

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बरगद का पेंड 

बरगद को पेड़ों का राजा कहा जाता है। बरगद को शुभ तो माना ही गया गया इसकी मई के महीने में भारतीय नारियाँ बरसैता पूजा भी करती हैं। 

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गर्मियों में किस तरह के पेंड-पौधे लगाने चाहिए।

अगर आप भी गर्मी के दिनों में अपने घर को ठंडा-ठंडा कूल-कूल रखना चाहते हैं तो ये पौधे आपको जरूर लगाने चाहिए।

जब आपके आस-पास का वातावरण तप रहा होता है तब आप अपने घर में कुछ विशेष तरह के पेंड पौधे लगाकर घर को ठंडा रख सकते हैं। आप इन्हे घर की बालकनी में या खिड़की के बॉक्स में विशेष तरह के पौधे लगा सकते हैं।

ये पौधे घर की हवा को ताजा रखते हैं, हवा को शुद्ध रखते हैं और घर को भी ठंडा रखते हैं। ऐसे अनेक तरह के पौधे हैं जो हवा से विषैले पदार्थों को दूर करके शुद्ध हवा देते हैं और गर्मी को भी सोखते हैं तो यहाँ हम ऐसे ही पौधों के बारे में बता रहे हैं जो गर्मी को दूर करते हैं और आसपास के वातावरण को ठंडा रखते हैं। 

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Banyan live Plant baragad ka podha

China Palm Live plant China Palm ka podha

Fikus black Live Plant faikus black ka podha

Fishtail palm live Plant fishtail palm ka podha

Himalayan live Plant himalayan ka podha

Jamiya paam Live Plant jamiya paam ka podha

Golden juniperus Live Plant golden juniperus ka podha

Bonsai adenium live flower plant

Lucky bamboo live plant 

Pencil Live Plant pencil plant ka podha

Siforatiya palm live Plant siforatiya palm ka podha

Silver youka live Plant silver youka ka podha

Zed Live Plant for Home and Garden, Green

White sandalwood live plant chandan ka podha

Syngonium live Plant syngonium ka podha

Victoria live Plant victoria ka podha

camphor live Plant kapoor ka podha

Capsicum live plant ( shimla mirch ka podha)

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गर्मियों में बगीचे की देखभाल कैसे करें।

पौधों को भी गर्मी लगती हैं तो आईये जानें इस गर्मी में कैसे अपने बगीचों को आप हरा भरा रख सकते हैं। 

जैसे-जैसे गर्मियां नजदीक आती जाती हैं, वैसे-वैसे बगीचे से प्रेम करने वालों की चिंता भी बढ़ती जाती है। उन्हें इस बात की चिंता हो जाती है कि कहीं उनके हरे-भरे पौधे सूख न जायें। उन्हें अपने बगीचे खोने का डर सताने लगता है। गर्मियों में बागबानी करना कोई आसान काम नहीं है। अगर आप नये-नये बागबानी करने वालों में से एक हैं तो, आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। 

आपका बगीचा हमेशा सुन्दर बना रहे इसके लिए आपको कई बातों का ध्यान रखना होगा। पौधे पूरी गर्मी  हरे भरे बने रहें और आपकी मेहनत सफल हो जाये, इसके लिए जानिए जरुरी टिप्स। 

1. अपने बगीचे से कीजिये थोड़ी जान-पहचान :- अगर आप नए-नए बागबान बने है तो, सबसे पहले अपने बगीचे की पहचान कर लें। पौधा लगाने की जगह, पानी का कनेक्शन, पौधे की खूबी आदि के बारे में जान लें। यह बहुत ही सिंपल टिप है जो आपको गर्मी के समय बगीचे की बागबानी करने में मदद करेगा। 

2. पौधों को तर रखें :- गर्मी के समय वातावरण पौधों से सारी नमी खींच लेता है। पौधों की जड़ों में से पानी सूख जाता है और इससे पौधों को जितना पोषण मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता है तो आप सुबह 10 बजे से पहले और शाम को 4 बजे के बाद पानी डालिये। गर्मियों में यह समय बहुत अच्छा रहता है। लगातार पानी डालते रहने से पौधे हमेशा फ्रेश रहेंगे, लेकिन पौधों में पानी उनकी जरुरत के हिसाब से ही डाले। 

3. कीटनाशक का प्रयोग :- गर्मियों के दिनों में बगीचे और पेंड-पौधों को कीट से दूर रखना चाहिए। इसके लिए प्राकृतिक कीटनाशक का प्रयोग करना ठीक रहेगा। एक कीट लगा पौधा पुरे बगीचे को खराब कर सकता है।

4. पौधों को छाया में रखें :- कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो सूरज की तेज धुप को नहीं सह सकते। इन पौधों को बचाने के लिए छाँव के लिए काम आने वाले कपड़ों पर कुछ पैसे खर्च कीजिये। ये आपको ऑनलाइन या फिर किसी भी बागबानी की दुकान से मिल जायेंगे। या फिर आप उन पौधों को कम धूप वाली जगह पर रख दें। 

5. मिट्टी की नमी का ख्याल रखें :- हमारे पौधों के लिए अधिक पानी भी नुकसान देह होता है। पानी को डालने से पहले मिटटी की नमी को परखें। पानी तब तक न डालें जब तक मिटटी सूखी न हो या फिर टहनियों या पत्तों पर पानी छिड़क कर छोड़ दें। 

6. स्थिर पानी नुकसान देह होता है :- पौधों के पास पानी जमा ना होने दें। चाहे वो मिटटी में हो या गमले में। यह मच्छरों को आमंत्रित करता है और साथ ही आपके प्यारे पौधे को भी आवश्यकता से अधिक पानी पहुँचाता है। 

7. खाद का उपयोग करें :- पानी के अलावा , खाद हमारे पौधे को स्वस्थ और नम बनाये रखता है, खासकर फल और फूल वाले पौधों को। आप खाद को घर पर आसानी से बना सकते हैं या फिर बाजार से खरीद कर भी ला सकते हैं। 

8. काट-छांट :- जिस तरह हमारे बालों के लिए काट-छांट बहुत जरुरी और लाभदायक होता है। इसी तरह पौधों को भी इसकी जरुरत पड़ती है। सूखे और मरे पत्तों, टहनियों और फूलों को सप्ताह में एक दिन जरूर छांटे।

9. छत पर की गयी बागवानी आपको ठंडक देगी :- अगर आप बागवानी में नौसिखिये हैं या अभी तक आपका बगीचा तैयार नहीं हुआ तो आप अपने छत से शुरुवात कीजिये। मिट्टी आपके घर को प्राकृतिक रूप से ठंडक देगी और नीचे प्लास्टिक की तह दे देने से आपका घर रिसाव से भी बचेगा।

10. मौसमी पौधे मौसम के अनुसार ढल जाते हैं :- पौधे मौसम के अनुसार बढ़ते हैं। कुछ जाड़ों में बढ़ते हैं तो कुछ गर्मियों में। आवश्यकता अनुसार पानी और खाद मिलने पर मिर्च, खीरे, बैंगन और तरबूज इस मौसम के लिए बेहतर विकल्प हैं और इन्हें हम गमलों में भी उगा सकते हैं। 

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जानिए कैसे घर पर लगे फल वाले पौधों से पाए दस गुना ज्यादा फल

अगर आपके फल वाले पौधों में फल नहीं आते तो उस पौधे का सीजन आते ही उस पौधे की 3 से 4 इंच तक गुड़ाई कर दें। और उसकी मिट्टी को भुरभुरी करके सूखा लें। फिर उसमे कम्पोस्ट खाद मिला लें। आपको इस बात का ध्यान रखना है कि खाद 300 से 400 ग्राम ही हो और खाद पूरी तरह से सड़ी हुई हो कच्ची न हो। इसमें काैमिकल खाद का उपयोग न करें। उसके बाद उस पौधे पर आप उस कम्पोस्टकी परत बिछा दें। फिर उस कम्पोस्ट की परत के ऊपर मिट्टी की परत बिछा दें। जिससे वो आपके पानी डालते समय गिरे या बहे नही। फिर आप पहली बार धीमे हाथों से इसमें पानी दे जिससे मिट्टी उखड़े नहीं। फिर आपको इसका रिजल्ट जल्द ही दिखने लगेगा। 

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ड्रैगन फ्रूट को लगाने के बेहतरीन तरीके, देखभाल और फायदे।

Dragon fruit

ड्रैगन फ्रूट का पौधा लगाने से पहले इसके बारे में जानकारी होना बहुत ही जरुरी है। ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है। इनका बोटेनिकल नाम hylocereus undatus हैं। ड्रैगन फ्रूट मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं।

  1. लाल फल लाल गूदे के साथ 
  2. लाल फल सफेद गूदे के साथ 
  3. पीला फल सफेद गूदे के साथ

यह फल देखने में बहुत ही सुन्दर होता है। खाने में बहुत ही स्वादिष्ट और न्युट्रिशन से भरपूर होता है। ड्रैगन फ्रूट के बहुत सारे हेल्थ बेनिफिट्स होते हैं और कीमत के मामले में भी यह कम नहीं है।

ड्रैगन फ्रूट को लगाने के तरीके:-  ड्रैगन फ्रूट को लगाने के दो तरीके होते हैं। 

  1. बीज से :- ड्रैगन फ्रूट के बीजों को निकाल के मिट्टी में छिड़क देने से ड्रैगन फ्रूट का पौधा 10 से 15 दिन में निकल आएगा। लेकिन यह तरीका बहुत ही पुराना और धीमी प्रोसेस का है। इस विधि से लगाए गए पौधों को फल देने में 4 से 5 साल का समय लग जाता है।अतः इस तरीके से ड्रैगन फ्रूट को ना लगायें। 
  2. कटिंग से :-  ड्रैगन फ्रूट का पौधा कटिंग से ही लगाना चाहिए क्योंकि इस विधि में लगाए गए पौधे 1 साल के अंदर ही फल देने लगते हैं और इसका प्रोसेस भी बहुत ही आसान होता है। आप किसी आस-पास की नरसरी से लाकर लगा सकते हैं। आप हमारी वेबसाइट bonsaiplantsnursery.com से भी ड्रैगन फ्रूट के पौधे को उचित दरों पर घर बैठे माँगा सकते हैं। 

ड्रैगन फ्रूट को कटिंग विधि से लगाने का तरीका :- ड्रैगन फ्रूट के लिए बलुई मिट्टी को बहुत ही अच्छा माना गया है। ड्रैगन फ्रूट को लगाने के लिए आप बलुई मिट्टी ले और उतनी ही मात्रा में कम्पोस्ट ले जितनी मात्रा में आपने मिट्टी ली है। दोनों को अच्छी तरह से मिलाने के बाद तैयार मिट्टी को गमले में डाल के ड्रैगन फ्रूट का छोटा सा पौधा या उसकी कटिंग को लगा दीजिये और थोड़ी मात्रा में पानी डाल दें। 

ड्रैगन फ्रूट की देखभाल करने के बेहतरीन तरीके :-अगर निम्नलिखित तरीकों से ड्रैगन फ्रूट की देखभाल करेंगे तो आपका ड्रैगन फ्रूट का पौधा बहुत जल्दी ग्रोथ करेगा और अधिक मात्रा में फल देगा।

  1. ड्रैगन फ्रूट के पौधे को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। अतः इसे ज्यादा पानी न दें। 
  2. ड्रैगन फ्रूट के पौधे को 1 से 2 महीने के बाद खली का पानी जरूर दें। 
  3. ड्रैगन फ्रूट के पौधे पर हफ्ते में दो बार नीम आयल का स्प्रे करते रहना चाहिए। 
  4. ड्रैगन फ्रूट के पौधे की शाखाओं को बाँस की पतली डंडियों के सहारे से बाँध दें। 
  5. ड्रैगन फ्रूट के पौधे को 2 महीने में एक बार सिर्फ एक मुट्ठी बोनमिल नामक फर्टिलाइज़र देना चाहिए। 

ड्रैगन फ्रूट के फायदे :- ड्रैगन फ्रूट नुट्रिशन से भरपूर होता है। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, ऑयरन, विटामिन-B, विटामिन-C  के साथ कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और फैट्स भी होते हैं। आइए इसके फायदे जाने।

  1. जिन लोगो को मधुमेह है, उनके लिए ड्रैगन फ्रूट एक राम बाण है। ड्रैगन फ्रूट के सेवन से मधुमेह कंट्रोल में रहता है। अतः ड्रैगन फ्रूट को मधुमेह ग्रसित लोगो को जरूर खाना चाहिए। 
  2. ड्रैगन फ्रूट में फाइवर की मात्रा अधिक होती है। अतः यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसके साथ-साथ फाइवर अधिक होने आपका पाचन तंत्र सही ढंग से काम करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। 
  3. ड्रैगन फ्रूट में एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो आपकी त्वचा को सुन्दर और जवान बनाये रखते हैं। 
  4. ड्रैगन फ्रूट के सेवन से बालों का झड़ना बंद हो जाता है और आपके बाल चमकदार हो जाते हैं। 
  5. जिन लोगो को अपना वजन काम करना हैं उनको ड्रैगन फ्रूट का सेवन जरूर करना चाहिए क्योकि ड्रैगन फ्रूट में फाइवर की अच्छी मात्रा होती है जो वजन को कम करती है। 
  6. ड्रैगन फ्रूट के सेवन से कैंसर के प्रभाव को कम किया जा सकता है। 
  7. ड्रैगन फ्रूट के सेवन से अस्थमा, खाँसी और श्व्सन सम्बन्धी समस्याएँ दूर होती हैं। 
  8. ड्रैगन फ्रूट में आयरन पाया जाता है जो खून की कमी को दूर करता है। 

ड्रैगन फ्रूट के कुछ नुकसान :- जैसा की आपने ड्रैगन फ्रूट के फायदे के बारे में जाना और यह तो आप सभी जानते हैं जिसके फायदे हैं उसके नुकसान भी होते हैं। किसी भी चीज की अति नुकसान दायक होती है। ड्रैगन फ्रूट को जरुरत से ज्यादा सेवन करने से आपके मल-मूत्र का रंग लाल हो सकता है और दस्त का कारण भी बन सकता है। अतः ड्रैगन फ्रूट का सेवन सीमित मात्रा में करें। 

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गमले में लगे अनार के पौधे से ज्यादा फल पाने के बेहतरीन तरीके।

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 अगर आपके गमले में लगे अनार के पौधे में फल नहीं आ रहे और फूल आते है और गिर जाते हैं। तो हमारे द्वारा बताये गए इन बेहतरीन तरीके को जरूर अपनायें। अगर बताये गए तरीकों को आप आजमाते हैं तो आपका अनार का पौधा पहले से बेहतर और ज्यादा मात्रा में फल देने लगेगा।

  1. किसी भी पौधे के लिए सबसे ज्यादा जरुरी होती है मिटटी, अगर आप सही मिटटी का चयन करते हैं तो आपका पौधा स्वस्थ रहेगा। आईये बात करते हैं अनार के पौधे की अनार के पौधे के लिए सबसे अच्छी मिट्टी बलुईदोमट मिट्टी होती है। 
  2. अनार के पौधे में गोबर की खाद डालने से अनार का पौधा स्वस्थ रहता है और पहले से ज्यादा फल देता है। अगर गोबर की खाद ना मिल पा रही हो तो आप वर्मीकम्पोस्ट का भी उपयोग कर सकते हैं। 
  3. अनार के पौधे को उस समय पानी देना बंद कर दे जब उस पर फूल आ रहे हो। 2 से 3 दिन के अंतराल पर ही पानी देना चाहिए। 
  4. अगर आपका अनार का पौधा फल नहीं दे रहा है तो उसके मिट्टी को बदल दे और बड़े गमले का ही उपयोग करें। क्योंकि अनार की जड़ें मूसलाजड़ें होती हैं उनको फैलाने के लिए ज्यादा जगह को आवश्यकता होती है। 
  5. आप अपने अनार के पौधे पर सी.बिट फर्टिलाइज़र का छिड़काव कर सकते हैं। इसके छिड़काव से आपका अनार का पौधा अधिक मात्रा में फल देगा। 
  6. आप अपने अनार के पौधे पर नीम के फर्टिलाइज़र का भी छिड़काव कर सकते हैं। नीम के फर्टिलाइज़र का छिड़काव करने से आपका अनार का पौधा कीड़े- मकोड़ो से भी बचा रहेगा और पहले से ज्यादा फल देगा। जो आप घर में आसानी से बना सकते हैं। 
  7. आप अपने अनार के पौधे की मिटटी में आलू और केले के छिलके मिलाने से आपका अनार का पौधा पहले से ज्यादा अच्छा ग्रो करेगा और अधिक फल भी देगा। 

नीम का फर्टिलाइज़र घर पर कैसे बनाये। एक क्लिक में जाने। 

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गमले में लगा अमरुद का पौधा फलों से लद जायेगा जानिए इन 10 तरीकों को

अगर आपके घर के गमले में अमरुद का पौधा लगा है और आपके अमरुद के पौधा में फल नहीं आ रहे हैं तो हमारे द्वारा बताये गए इन तरीकों को जरूर आजमाएं। आपका अमरुद का पौधा फलों से लद जायेगा।

  1. अमरुद के पौधे से अधिक से अधिक फल पाने के लिए उसे  2 से 3 फीट के गमले में लगाना चाहिए। 
  2. अमरुद के पौधे को हलकी चिकनी ,काली या दोमट मिट्टी में लगाने से अमरुद के फलों की पैदावार ज्यादा होती है। 
  3. आप अगर अमरुद के पौधे से बहुत ही कम समय में और ज्यादा मात्रा में फल पाना चाहते हैं, तो हमेशा कलमी (Grafted ) पौधा ही लगाएं। 
  4. अमरुद के पौधे से अधिक फल पाने के लिए अमरुद के पौधे की साल में 2 से 3 बार प्रूनिंग (शाखा का ऊपरी भाग 1 से 2 इंच काटना ) कर दें। 
  5. गमले में लगे अमरुद के पौधे को हर 20 दिन बाद कम्पोस्ट या वर्मीकम्पोस्ट देना चाहिए। इससे पौधे की आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहती है। 
  6. अमरुद के पौधे को धूप की ज्यादा जरुरत होती है। अतः उसे ऐसी जगह रखें जहाँ वो पर्याप्त मात्रा में धूप पा सके। 
  7. अमरुद के पौधे को अन्य पौधों की अपेक्षा पानी की ज्यादा जरुरत होती  है। अतः गमले में लगे अमरूद के पौधे को सुबह – शाम दोनों समय पानी देना चाहिए। 
  8. एप्सम साल्ट (मैगनीशियम सल्फेट ) या सागरिका नाम के फर्टिलाइजर की एक चम्मच मात्रा को 1 लीटर पानी में डाल के अमरुद के पौधे पर छिड़काव करने से अमरुद के पौधे में फलों की पैदावार ज्यादा हो जाती है। 
  9. गमले में लगे अमरुद के पौधे की समय – समय पर गोड़ाई करते रहें। 
  10. गमले में लगे अमरुद के पौधे पर नीम की पत्तियों द्वारा बनाई गयी फर्टिलाइजर का छिड़काव करने से अमरुद के पौधे पर कीड़े नहीं लगेंगे और आपका अमरुद का पौधा अधिक मात्रा में फल देगा। 
  • नोट – नीम की पत्तियों से घर पर ही फर्टिलाइजर बनाये। यहाँ क्लिक करें। 
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z plant की देखभाल करने के 7 सबसे बेहतरीन तरीके।

 अगर आपके घर में भी z plant लगा हुआ है, तो आज हम आपको ऐसे 7  बेहतरीन तरीके बतायेंगे। जिससे आप अपने z plant की देखभाल अच्छे से कर सकें। 

  1. z plant को पानी की ज्यादा जरुरत नहीं होती है इसलिए z plant को 2 से 3 दिन के अंतराल पर ही पानी देना चाहिए। 
  2. अगर आपका z plant 3 से 4 साल का हो चूका है तो उसकी repotting (मिटटी को बदलना ) कर दें। 
  3. z plant को ज्यादा धूप की जरूरत नहीं होती है इसलिए उसे ऐसे स्थान पर रखे जहाँ 3 से 4 घंटे की धूप रहती हो। 
  4. अगर आपके z plant की पत्तियों पर सफेद दाग जैसा फंगल इन्फेक्शन है तो 1 लीटर पानी में 1-1 चम्मच white vinegar और baking soda डाल के पत्तियों पर छिड़काव कर दें। 
  5. z plant पर कभी भी shop water और oil का छिड़काव नहीं करना चाहिए। इससे z plant ख़राब हो जाता है। 
  6. z plant पर समय- समय पर नीम oil का स्प्रे सबसे बेस्ट और हेल्पफुल भी रहता है। 
  7. आप जब भी z plant लगाए तो मिटटी के गमले में ही लगाएं।
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इन पांच सरल उपायों से निम्बू का पौधा करेगा फलों की बरसात

अगर आपके घर भी नीम्बू का पौधा लगा है और आप चाहते हैं कि आपके नीम्बू के पौधे में पत्तियों से ज्यादा नीम्बू के फल हो तो नीचे दिए गये 5 तरीकों को जरूर आजमायें।

  1. आप नीम्बू का पौधा जिस मिटटी में लगा रहे है, उस मिटटी का PH मान 5.5 और 6.6 के बीच में होना चाहिए। 
  2. आपको नीम्बू के पौधे में  महीने में 2 बार वर्मीकम्पोस्ड, कम्पोस्ड,सड़ी हुई गोबर की खाद और नीम की खली डालनी चाहिए। 
  3. नीम्बू के पौधे को हमेशा 16 इंच या उससे बड़े गमले में लगाना चाहिए और ऐसी जगह रखे जहां खुली जगह हो और धूप पर्याप्त मात्रा में आती हो। 
  4. नीम्बू के पौधे को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। अतः जिस गमले में लगाए उसकी तली में छेद कर दे जिससे पानी की मात्रा ज्यादा न हो सके। 
  5. नीम्बू के पौधे में जो सूखी शाखायें हो उन्हें समय-समय निकलते रहिये। 
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नीम्बू के पौधे की देखरेख करने के सरल तरीके

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अगर आप भी चाहते हैं अपने नीम्बू के पौधे से फलों की बरसात तो ऐसे करें अपने नीम्बू के पौधे की देखरेख। 

  1. समय-समय पर आपको नीम्बू के पौधे की जो सूखी शाखाएँ हैं, उन्हें काटते रहना चाहिए। 
  2. नीम्बू के पौधे को ज्यादा पानी की जरुरत नहीं होती है। अतः आपको 2 से 3 दिन के अंतराल पर ही पानी देना चाहिए 
  3. महीने में 2 बार आपको नीम्बू के पौधे में सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए। 
  4. समय-समय पर नीम्बू के पौधे की मिटटी की अच्छे से गोड़ाई करते रहना चाहिए। 
  5. नीम्बू के पौधे को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त मात्रा में 6 से 7 घंटे की धूप आती हो। 
  6. जब आपके नीम्बू के पौधे में फूल आने लगे तब आपको नीम्बू के पौधे को पानी बहुत ही सीमित मात्रा में देना चाहिए। जब आप नीम्बू के पौधे को फूलों के समय अधिक मात्रा में पानी देंगे तो उनके फूल झड़ जायेंगे। जिससे फूल फल में तब्दील नहीं होगा। 
  7. आपको नीम्बू का पौधा हमेशा मिटटी और सीमेंट के गमले ही लगाना चाहिए। गमले का आकार 16 इंच या उससे बड़ा होना चाहिए। 
  8. आपको समय-समय पर नीम्बू के पौधे की एयर लेयरिंग करते रहना चाहिए।