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आप घर में अंगूर के पौधे को कैसे उगा सकते हैं।

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हमारे देश में व्यावसायिक रूप से अंगूर की खेती पिछले कई छः दशकों से की जा रही है आज महाराष्ट्र में सबसे अधिक जगहों पर अंगूर की खेती की जा रही है। खेती के सा-साथ लोग अंगूर की बेलों को अपने घरों में भी लगा रहे है।

      तो आज हम ये बताने जा रहे है कि अंगूर के पौधे को घर में कैसे लगाए और उनसे फल कैसे प्राप्त करें।

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पौधे की परख :- सबसे जरुरी बात जो है वो ये की आपने सही पौधा चुना है या नहीं। आप अगर चाहते हैं कि आपका अंगूर का पौधा जल्दी से जल्दी फल देने लगे तो आपको ग्राफ्टेड(कलमी) पौधा ही चुनना चाहिए। कलमी पौधा आपका जल्दी ही फल देने के लिए तैयार हो जाता है। अगर आप देशी अंगूर का पौधा लगाने की सोच रहे हैं तो आपको इसके फल खाने के लिए बहुत इंतजार करना पड़ सकता है। इसीलिए जब भी आप अंगूर का पौधा लगाए तो ग्राफ्टेड पौधा ही लगाए।

मिटटी :- अंगूर को किसी भी मिटटी में उगाया जा सकता है। लेकिन अंगूर को अगर आप रेतीली या दोमट मिटटी में लगाते हैं तो बहुत अच्छी बात है क्योंकि रेतीली और दोमट मिटटी में पानी रुकता नहीं है जो अंगूर के लिए बहुत अच्छा होता है। हो सके तो अंगूर के पौधे को चिकनी मिटटी में न ही लगाए।

गमला :- अंगूर के पौधे को जब भी लगाए मिटटी या सीमेंट के गमले में ही लगाना चाहिए और गमला 1 फिट की गहराई का होना चाहिए जिससे अंगूर की जड़े अच्छे से फैल सकें। गमले की तली में एक छोटा सा शुराक कर देना चाहिए। इससे पानी का भराव नही होता है और पौधे की जड़ें सुरक्षित रहती हैं।

खाद :- अंगूर को आप जिस मिटटी में लगाने जा रहे हों उसमे पहले आपको वर्मी कम्पोस्ट को मिला लेना चाहिए।

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अंगूर के फायदे।

  • अँगूर में ग्लूकोज,मैग्नीशियम और साइट्रिक एसिड जैसे कई पोषक तत्त्व पाए जाते हैं। कई बीमारियों में राहत के लिए अंगूर का सेवन करना फायदेमंद होता है। टी.बी. कैंसर और ब्लड-इन्फेक्शन जैसी बीमारियों में बहुत फायदेमंद होता है। 
  • मधुमेह से पीड़ित लोगो को अंगूर का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। ये ब्लड में शुगर के लेवल को कम करता है। अंगूर में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। 
  • माइग्रेन के दर्द से जूझ रहे लोगो को अंगूर का जूस पीना बहुत फायदेमंद होता है। कुछ समय तक अंगूर के रस का नियमित सेवन करने से इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। 
  • हाल ही की शोध में पाया गया की अंगूर के सेवन से ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता है और दिल की बीमारियां भी दूर रहती हैं। 
  • खून की कमी को दूर करने के लिए एक गिलास अंगूर के जूस में 2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से खून की कमी दूर हो जाती है। यह हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है। 
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जानिए कपूर के पौधे के अद्भुद फायदे।

कपूर के फायदे

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1. गठिया रोग :- 500 मिलीलीटर तिल के तेल में 10 ग्राम कपूर मिलाकर शीशी में भर कर उसके बाद ढक्कन को बंद करके रख दें। जब कपूर तेल में अच्छी तरह से घुल-मिल जाये तो गठिया के जोड़ो पर अच्छी तरह से मालिश करें।

2. खाज-खुजली :- चमेली के तेल में कपूर मिलाकर शरीर पर लगाने से खुजली दूर होती है।

3. हाथ-पैरों की ऐठन :- कपूर को चार गुने सरसों के तेल में मिला कर हाथ-पैर पर मालिश करने से हाथ-पैर की ऐठन दूर होती है।

4. बिच्छू के डंक :- बिच्छू के डंक से पीड़ित रोगी को कपूर को सिरके में मिलाकर डंक वाली जगह पर लगाने से जहर नष्ट होने लगता है।

5. प्रसव का दर्द :- यदि प्रसव के समय तेज दर्द हो तो स्त्री को पके केले में 125 मिलीग्राम कपूर मिलाकर खिलाना चाहिए। इसके सेवन से बच्चे का जन्म आराम से हो जाता है।

6. आँखों के रोग :- आँखों के रोग से पीड़ित रोगी को भीमसेनी कपूर को दूध के साथ पीसकर उंगली से आँखों में लगाएं। इससे बहुत सारे रोग में फायदा होता है।

7. बच्चों के पेट में कीड़े होना :- यदि बच्चों के पेट में कीड़े हो गए हैं तो थोड़ा सा कपूर गुड़ में मिलाकर देने से कीड़े मरकर बाहर निकल जाते हैं। इससे पेट दर्द में जल्दी आराम मिलता है।

8. पलकों के बाल झड़ना :- कपूर को नीम्बू के रस में मिलाकर पलकों पर लगाने से पलकों के बालों का झड़ना बंद हो जाता है।

9. छाती का रोग :- कपूर को जला कर उसके धुएं को नाक के द्वारा लेने से छाती के रोग दूर हो जाते हैं।

10. बदहजमी :- कपूर और हींग को बराबर मात्रा में लेकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें और इसकी 1-1 गोली दिन में 3 बार ठंडे पानी के साथ सेवन करें। इससे बदहजमी दूर हो जाती है।

11. मुहांसे :- चेहरे पर कील-मुहांसे हो गया हो तो 3 चम्मच बेसन, एक चौथाई चम्मच हल्दी, चुटकी भर कपूर व  नीम्बू का रस मिलाकर लेप बना लें। इस तैयार पेस्ट को चेहरे पर लेप करें और जब यह सूख जाये तो इसे ठन्डे पानी से धो लें। इससे चेहरे के मुहासे ठीक हो जायेंगे।

12. चेहरे के दाग-धब्बे :-  2 चम्मच पीसी हुई हल्दी, गुलाबजल और चुटकी भर कपूर को मिलाकर चेहरे पर रोजाना लेप लगाएं। इसके प्रयोग 15-20 दिनों तक करने से चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं। इसका लेप करते समय ध्यान रखें कि लेप आँखों के पास न लगे।

13. दाँतों में कीड़े लगना :- कपूर को एल्कोहल में घोलकर, रुई में लगाकर दाँतों के गड्डों में रखने से दांत के कीड़े मर जाते हैं। कपूर कचरी को मंजन की तरह दाँतों पर मलने से दाँतों का दर्द और कीड़े खत्म हो जाते हैं।

14. दिल की धड़कन बढ़ना :- यदि दिल की धड़कन तेज हो गयी हो तो। रोगी को थोड़ा कपूर का सेवन कराएं। इसके सेवन से दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है।

15. पायरिया :- पायरिया होने पर कपूर का टुकड़ा पान में रखकर खूब चबाएं लेकिन चबाते समय ध्यान रखें कि रस अंदर न जाये। लार व रस को बाहर थूकते रहें। इसका प्रयोग काफी दिनों तक करते रहने से पायरिया का रोग ठीक हो जाता है।

                        देशी घी में कपूर मिलाकर प्रतिदिन 3 से 4 बार दांत व मसूड़ों पर धीरे धीरे मलें तथा लार को गिरने दें एवं थोड़ी देर बाद कुल्ला कर लें। इससे पायरिया रोग ठीक होता है।

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कौन-कौन से पौधे शुभ माने जाते हैं और उन्हें घर में जरूर लगाना चाहिए।

हमारे घर के आस पास कई सारे पेंड पौधे लगे होते हैं वही कुछ पेंड पौधों को अशुभ माना जाता है तो कुछ को शुभ भी मन जाता है। तो आज हम आपको कुछ ऐसे पेंड पौधों के बारे में जानकारी देंगे जिनको घर में लगाना शुभ होता है और घर से नकारात्मक शक्तियों को दूर रखते हैं।

तुलसी का पौधा

हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को तो एक तरह से लक्ष्मी का रूप माना गया है। कहा जाता है जिस भी घर में तुलसी की पूजा अर्चना होती है उस घर पर भगवान विष्णु की कृपा दृष्टि सदैव बनी रहती है। तुलसी का पौधा हमारे घर को नकारात्मक चीजों से दूर रखता है और यह हमारे आस पास के वातावरण को भी शुद्ध रखने की ताकत रखता है। 

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शमी का पौधा

शमी का पौधा घर में होना भी बहुत शुभ मन जाता है। शमी के पौधे के बारे में तमाम भ्रांतियां मौजूद हैं और लोग आम तौर पर इसे लगाने से डरते-बचते हैं। ज्योतिष में इसका सम्बन्ध शनि देव से माना जाता है और शनि की कृपा पाने के लिए इस पौधे की लगातार पूजा-उपासना की जाती है। 

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गुड़हल

गुड़हल का पौधा ज्योतिष में सूर्य और मंगल से सम्बन्ध रखता है, गुड़हल का पौधा घर में कही भी लगा सकते हैं परन्तु ध्यान रखें कि उसको पर्याप्त धूप मिलना जरुरी है। गुड़हल का फूल जल में डालकर सूर्य को अर्घ्य देना आँखों, हड्डियों की समस्या को दूर करता है और नाम और यश प्राप्ति में लाभकारी होता है।

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केले का पौधा

केले का पौधा हमे कई तरह से लाभ पहुँचता है। केले का पौधा धार्मिक कारणों से भी बहुत महत्व पूर्ण माना गया है। गुरुवार को इसकी पूजा भी होती है और अक्सर पूजा-पाठ के समय केले के पत्ते का ही इस्तेमाल किया जाता है।

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बांस का पौधा

बांस का पौधा घर में लगाना अच्छा माना जाता है। यह समृद्धि और आपकी सफलता को ऊपर ले जाने की क्षमता रखता है। अगर आपकी तमाम कोशिशों के बाद भी आपको अपने कार्यक्षेत्र में मनचाही सफलता नहीं मिल रही तो आपको अपने भवन/कार्यालय में बांस का पौधा लगाना चाहिए। 
फेंगशुई में बांस के पौधे को बहुत महत्व दिया गया है। बांस संसार का अकेला ऐसा पौधा है जो हर वातावरण में हर मुश्किल के बाद भी तेजी से बढ़ता है। इसीलिए इसे उन्नति, दीर्घआयु और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 

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मनीप्लान्ट

ऐसी मान्यता है कि घर में मनीप्लान्ट लगाने से सुख-समृद्धि का वास होता है। इसी के चलते लोग अपने घरों में यह पौधा जरूर लगाते हैं। मनीप्लान्ट का पौधा घर में कही भी आसानी से लग जाता है और इसका बहुत रखरखाव भी नहीं करना पड़ता है।

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बेलपत्र का पौधा

बेल के पौधे को तो आप सभी जानते होंगे क्योंकि सावन के महीने में सभी लोग भगवान शंकर जी की पूजा बेलपत्र से ही करते हैं। अगर यह पौधा आपके घर में या आस-पास कही भी लगा हो तो बहुत ही शुभ माना जाता है। 

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बरगद का पेंड 

बरगद को पेड़ों का राजा कहा जाता है। बरगद को शुभ तो माना ही गया गया इसकी मई के महीने में भारतीय नारियाँ बरसैता पूजा भी करती हैं। 

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गर्मियों में किस तरह के पेंड-पौधे लगाने चाहिए।

अगर आप भी गर्मी के दिनों में अपने घर को ठंडा-ठंडा कूल-कूल रखना चाहते हैं तो ये पौधे आपको जरूर लगाने चाहिए।

जब आपके आस-पास का वातावरण तप रहा होता है तब आप अपने घर में कुछ विशेष तरह के पेंड पौधे लगाकर घर को ठंडा रख सकते हैं। आप इन्हे घर की बालकनी में या खिड़की के बॉक्स में विशेष तरह के पौधे लगा सकते हैं।

ये पौधे घर की हवा को ताजा रखते हैं, हवा को शुद्ध रखते हैं और घर को भी ठंडा रखते हैं। ऐसे अनेक तरह के पौधे हैं जो हवा से विषैले पदार्थों को दूर करके शुद्ध हवा देते हैं और गर्मी को भी सोखते हैं तो यहाँ हम ऐसे ही पौधों के बारे में बता रहे हैं जो गर्मी को दूर करते हैं और आसपास के वातावरण को ठंडा रखते हैं। 

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Fishtail palm live Plant fishtail palm ka podha

Himalayan live Plant himalayan ka podha

Jamiya paam Live Plant jamiya paam ka podha

Golden juniperus Live Plant golden juniperus ka podha

Bonsai adenium live flower plant

Lucky bamboo live plant 

Pencil Live Plant pencil plant ka podha

Siforatiya palm live Plant siforatiya palm ka podha

Silver youka live Plant silver youka ka podha

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White sandalwood live plant chandan ka podha

Syngonium live Plant syngonium ka podha

Victoria live Plant victoria ka podha

camphor live Plant kapoor ka podha

Capsicum live plant ( shimla mirch ka podha)

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गर्मियों में बगीचे की देखभाल कैसे करें।

पौधों को भी गर्मी लगती हैं तो आईये जानें इस गर्मी में कैसे अपने बगीचों को आप हरा भरा रख सकते हैं। 

जैसे-जैसे गर्मियां नजदीक आती जाती हैं, वैसे-वैसे बगीचे से प्रेम करने वालों की चिंता भी बढ़ती जाती है। उन्हें इस बात की चिंता हो जाती है कि कहीं उनके हरे-भरे पौधे सूख न जायें। उन्हें अपने बगीचे खोने का डर सताने लगता है। गर्मियों में बागबानी करना कोई आसान काम नहीं है। अगर आप नये-नये बागबानी करने वालों में से एक हैं तो, आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। 

आपका बगीचा हमेशा सुन्दर बना रहे इसके लिए आपको कई बातों का ध्यान रखना होगा। पौधे पूरी गर्मी  हरे भरे बने रहें और आपकी मेहनत सफल हो जाये, इसके लिए जानिए जरुरी टिप्स। 

1. अपने बगीचे से कीजिये थोड़ी जान-पहचान :- अगर आप नए-नए बागबान बने है तो, सबसे पहले अपने बगीचे की पहचान कर लें। पौधा लगाने की जगह, पानी का कनेक्शन, पौधे की खूबी आदि के बारे में जान लें। यह बहुत ही सिंपल टिप है जो आपको गर्मी के समय बगीचे की बागबानी करने में मदद करेगा। 

2. पौधों को तर रखें :- गर्मी के समय वातावरण पौधों से सारी नमी खींच लेता है। पौधों की जड़ों में से पानी सूख जाता है और इससे पौधों को जितना पोषण मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता है तो आप सुबह 10 बजे से पहले और शाम को 4 बजे के बाद पानी डालिये। गर्मियों में यह समय बहुत अच्छा रहता है। लगातार पानी डालते रहने से पौधे हमेशा फ्रेश रहेंगे, लेकिन पौधों में पानी उनकी जरुरत के हिसाब से ही डाले। 

3. कीटनाशक का प्रयोग :- गर्मियों के दिनों में बगीचे और पेंड-पौधों को कीट से दूर रखना चाहिए। इसके लिए प्राकृतिक कीटनाशक का प्रयोग करना ठीक रहेगा। एक कीट लगा पौधा पुरे बगीचे को खराब कर सकता है।

4. पौधों को छाया में रखें :- कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो सूरज की तेज धुप को नहीं सह सकते। इन पौधों को बचाने के लिए छाँव के लिए काम आने वाले कपड़ों पर कुछ पैसे खर्च कीजिये। ये आपको ऑनलाइन या फिर किसी भी बागबानी की दुकान से मिल जायेंगे। या फिर आप उन पौधों को कम धूप वाली जगह पर रख दें। 

5. मिट्टी की नमी का ख्याल रखें :- हमारे पौधों के लिए अधिक पानी भी नुकसान देह होता है। पानी को डालने से पहले मिटटी की नमी को परखें। पानी तब तक न डालें जब तक मिटटी सूखी न हो या फिर टहनियों या पत्तों पर पानी छिड़क कर छोड़ दें। 

6. स्थिर पानी नुकसान देह होता है :- पौधों के पास पानी जमा ना होने दें। चाहे वो मिटटी में हो या गमले में। यह मच्छरों को आमंत्रित करता है और साथ ही आपके प्यारे पौधे को भी आवश्यकता से अधिक पानी पहुँचाता है। 

7. खाद का उपयोग करें :- पानी के अलावा , खाद हमारे पौधे को स्वस्थ और नम बनाये रखता है, खासकर फल और फूल वाले पौधों को। आप खाद को घर पर आसानी से बना सकते हैं या फिर बाजार से खरीद कर भी ला सकते हैं। 

8. काट-छांट :- जिस तरह हमारे बालों के लिए काट-छांट बहुत जरुरी और लाभदायक होता है। इसी तरह पौधों को भी इसकी जरुरत पड़ती है। सूखे और मरे पत्तों, टहनियों और फूलों को सप्ताह में एक दिन जरूर छांटे।

9. छत पर की गयी बागवानी आपको ठंडक देगी :- अगर आप बागवानी में नौसिखिये हैं या अभी तक आपका बगीचा तैयार नहीं हुआ तो आप अपने छत से शुरुवात कीजिये। मिट्टी आपके घर को प्राकृतिक रूप से ठंडक देगी और नीचे प्लास्टिक की तह दे देने से आपका घर रिसाव से भी बचेगा।

10. मौसमी पौधे मौसम के अनुसार ढल जाते हैं :- पौधे मौसम के अनुसार बढ़ते हैं। कुछ जाड़ों में बढ़ते हैं तो कुछ गर्मियों में। आवश्यकता अनुसार पानी और खाद मिलने पर मिर्च, खीरे, बैंगन और तरबूज इस मौसम के लिए बेहतर विकल्प हैं और इन्हें हम गमलों में भी उगा सकते हैं। 

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जानिए कैसे घर पर लगे फल वाले पौधों से पाए दस गुना ज्यादा फल

अगर आपके फल वाले पौधों में फल नहीं आते तो उस पौधे का सीजन आते ही उस पौधे की 3 से 4 इंच तक गुड़ाई कर दें। और उसकी मिट्टी को भुरभुरी करके सूखा लें। फिर उसमे कम्पोस्ट खाद मिला लें। आपको इस बात का ध्यान रखना है कि खाद 300 से 400 ग्राम ही हो और खाद पूरी तरह से सड़ी हुई हो कच्ची न हो। इसमें काैमिकल खाद का उपयोग न करें। उसके बाद उस पौधे पर आप उस कम्पोस्टकी परत बिछा दें। फिर उस कम्पोस्ट की परत के ऊपर मिट्टी की परत बिछा दें। जिससे वो आपके पानी डालते समय गिरे या बहे नही। फिर आप पहली बार धीमे हाथों से इसमें पानी दे जिससे मिट्टी उखड़े नहीं। फिर आपको इसका रिजल्ट जल्द ही दिखने लगेगा। 

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ड्रैगन फ्रूट को लगाने के बेहतरीन तरीके, देखभाल और फायदे।

Dragon fruit

ड्रैगन फ्रूट का पौधा लगाने से पहले इसके बारे में जानकारी होना बहुत ही जरुरी है। ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है। इनका बोटेनिकल नाम hylocereus undatus हैं। ड्रैगन फ्रूट मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं।

  1. लाल फल लाल गूदे के साथ 
  2. लाल फल सफेद गूदे के साथ 
  3. पीला फल सफेद गूदे के साथ

यह फल देखने में बहुत ही सुन्दर होता है। खाने में बहुत ही स्वादिष्ट और न्युट्रिशन से भरपूर होता है। ड्रैगन फ्रूट के बहुत सारे हेल्थ बेनिफिट्स होते हैं और कीमत के मामले में भी यह कम नहीं है।

ड्रैगन फ्रूट को लगाने के तरीके:-  ड्रैगन फ्रूट को लगाने के दो तरीके होते हैं। 

  1. बीज से :- ड्रैगन फ्रूट के बीजों को निकाल के मिट्टी में छिड़क देने से ड्रैगन फ्रूट का पौधा 10 से 15 दिन में निकल आएगा। लेकिन यह तरीका बहुत ही पुराना और धीमी प्रोसेस का है। इस विधि से लगाए गए पौधों को फल देने में 4 से 5 साल का समय लग जाता है।अतः इस तरीके से ड्रैगन फ्रूट को ना लगायें। 
  2. कटिंग से :-  ड्रैगन फ्रूट का पौधा कटिंग से ही लगाना चाहिए क्योंकि इस विधि में लगाए गए पौधे 1 साल के अंदर ही फल देने लगते हैं और इसका प्रोसेस भी बहुत ही आसान होता है। आप किसी आस-पास की नरसरी से लाकर लगा सकते हैं। आप हमारी वेबसाइट bonsaiplantsnursery.com से भी ड्रैगन फ्रूट के पौधे को उचित दरों पर घर बैठे माँगा सकते हैं। 

ड्रैगन फ्रूट को कटिंग विधि से लगाने का तरीका :- ड्रैगन फ्रूट के लिए बलुई मिट्टी को बहुत ही अच्छा माना गया है। ड्रैगन फ्रूट को लगाने के लिए आप बलुई मिट्टी ले और उतनी ही मात्रा में कम्पोस्ट ले जितनी मात्रा में आपने मिट्टी ली है। दोनों को अच्छी तरह से मिलाने के बाद तैयार मिट्टी को गमले में डाल के ड्रैगन फ्रूट का छोटा सा पौधा या उसकी कटिंग को लगा दीजिये और थोड़ी मात्रा में पानी डाल दें। 

ड्रैगन फ्रूट की देखभाल करने के बेहतरीन तरीके :-अगर निम्नलिखित तरीकों से ड्रैगन फ्रूट की देखभाल करेंगे तो आपका ड्रैगन फ्रूट का पौधा बहुत जल्दी ग्रोथ करेगा और अधिक मात्रा में फल देगा।

  1. ड्रैगन फ्रूट के पौधे को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। अतः इसे ज्यादा पानी न दें। 
  2. ड्रैगन फ्रूट के पौधे को 1 से 2 महीने के बाद खली का पानी जरूर दें। 
  3. ड्रैगन फ्रूट के पौधे पर हफ्ते में दो बार नीम आयल का स्प्रे करते रहना चाहिए। 
  4. ड्रैगन फ्रूट के पौधे की शाखाओं को बाँस की पतली डंडियों के सहारे से बाँध दें। 
  5. ड्रैगन फ्रूट के पौधे को 2 महीने में एक बार सिर्फ एक मुट्ठी बोनमिल नामक फर्टिलाइज़र देना चाहिए। 

ड्रैगन फ्रूट के फायदे :- ड्रैगन फ्रूट नुट्रिशन से भरपूर होता है। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, ऑयरन, विटामिन-B, विटामिन-C  के साथ कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और फैट्स भी होते हैं। आइए इसके फायदे जाने।

  1. जिन लोगो को मधुमेह है, उनके लिए ड्रैगन फ्रूट एक राम बाण है। ड्रैगन फ्रूट के सेवन से मधुमेह कंट्रोल में रहता है। अतः ड्रैगन फ्रूट को मधुमेह ग्रसित लोगो को जरूर खाना चाहिए। 
  2. ड्रैगन फ्रूट में फाइवर की मात्रा अधिक होती है। अतः यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसके साथ-साथ फाइवर अधिक होने आपका पाचन तंत्र सही ढंग से काम करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। 
  3. ड्रैगन फ्रूट में एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो आपकी त्वचा को सुन्दर और जवान बनाये रखते हैं। 
  4. ड्रैगन फ्रूट के सेवन से बालों का झड़ना बंद हो जाता है और आपके बाल चमकदार हो जाते हैं। 
  5. जिन लोगो को अपना वजन काम करना हैं उनको ड्रैगन फ्रूट का सेवन जरूर करना चाहिए क्योकि ड्रैगन फ्रूट में फाइवर की अच्छी मात्रा होती है जो वजन को कम करती है। 
  6. ड्रैगन फ्रूट के सेवन से कैंसर के प्रभाव को कम किया जा सकता है। 
  7. ड्रैगन फ्रूट के सेवन से अस्थमा, खाँसी और श्व्सन सम्बन्धी समस्याएँ दूर होती हैं। 
  8. ड्रैगन फ्रूट में आयरन पाया जाता है जो खून की कमी को दूर करता है। 

ड्रैगन फ्रूट के कुछ नुकसान :- जैसा की आपने ड्रैगन फ्रूट के फायदे के बारे में जाना और यह तो आप सभी जानते हैं जिसके फायदे हैं उसके नुकसान भी होते हैं। किसी भी चीज की अति नुकसान दायक होती है। ड्रैगन फ्रूट को जरुरत से ज्यादा सेवन करने से आपके मल-मूत्र का रंग लाल हो सकता है और दस्त का कारण भी बन सकता है। अतः ड्रैगन फ्रूट का सेवन सीमित मात्रा में करें। 

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गमले में लगे अनार के पौधे से ज्यादा फल पाने के बेहतरीन तरीके।

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 अगर आपके गमले में लगे अनार के पौधे में फल नहीं आ रहे और फूल आते है और गिर जाते हैं। तो हमारे द्वारा बताये गए इन बेहतरीन तरीके को जरूर अपनायें। अगर बताये गए तरीकों को आप आजमाते हैं तो आपका अनार का पौधा पहले से बेहतर और ज्यादा मात्रा में फल देने लगेगा।

  1. किसी भी पौधे के लिए सबसे ज्यादा जरुरी होती है मिटटी, अगर आप सही मिटटी का चयन करते हैं तो आपका पौधा स्वस्थ रहेगा। आईये बात करते हैं अनार के पौधे की अनार के पौधे के लिए सबसे अच्छी मिट्टी बलुईदोमट मिट्टी होती है। 
  2. अनार के पौधे में गोबर की खाद डालने से अनार का पौधा स्वस्थ रहता है और पहले से ज्यादा फल देता है। अगर गोबर की खाद ना मिल पा रही हो तो आप वर्मीकम्पोस्ट का भी उपयोग कर सकते हैं। 
  3. अनार के पौधे को उस समय पानी देना बंद कर दे जब उस पर फूल आ रहे हो। 2 से 3 दिन के अंतराल पर ही पानी देना चाहिए। 
  4. अगर आपका अनार का पौधा फल नहीं दे रहा है तो उसके मिट्टी को बदल दे और बड़े गमले का ही उपयोग करें। क्योंकि अनार की जड़ें मूसलाजड़ें होती हैं उनको फैलाने के लिए ज्यादा जगह को आवश्यकता होती है। 
  5. आप अपने अनार के पौधे पर सी.बिट फर्टिलाइज़र का छिड़काव कर सकते हैं। इसके छिड़काव से आपका अनार का पौधा अधिक मात्रा में फल देगा। 
  6. आप अपने अनार के पौधे पर नीम के फर्टिलाइज़र का भी छिड़काव कर सकते हैं। नीम के फर्टिलाइज़र का छिड़काव करने से आपका अनार का पौधा कीड़े- मकोड़ो से भी बचा रहेगा और पहले से ज्यादा फल देगा। जो आप घर में आसानी से बना सकते हैं। 
  7. आप अपने अनार के पौधे की मिटटी में आलू और केले के छिलके मिलाने से आपका अनार का पौधा पहले से ज्यादा अच्छा ग्रो करेगा और अधिक फल भी देगा। 

नीम का फर्टिलाइज़र घर पर कैसे बनाये। एक क्लिक में जाने। 

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गमले में लगा अमरुद का पौधा फलों से लद जायेगा जानिए इन 10 तरीकों को

अगर आपके घर के गमले में अमरुद का पौधा लगा है और आपके अमरुद के पौधा में फल नहीं आ रहे हैं तो हमारे द्वारा बताये गए इन तरीकों को जरूर आजमाएं। आपका अमरुद का पौधा फलों से लद जायेगा।

  1. अमरुद के पौधे से अधिक से अधिक फल पाने के लिए उसे  2 से 3 फीट के गमले में लगाना चाहिए। 
  2. अमरुद के पौधे को हलकी चिकनी ,काली या दोमट मिट्टी में लगाने से अमरुद के फलों की पैदावार ज्यादा होती है। 
  3. आप अगर अमरुद के पौधे से बहुत ही कम समय में और ज्यादा मात्रा में फल पाना चाहते हैं, तो हमेशा कलमी (Grafted ) पौधा ही लगाएं। 
  4. अमरुद के पौधे से अधिक फल पाने के लिए अमरुद के पौधे की साल में 2 से 3 बार प्रूनिंग (शाखा का ऊपरी भाग 1 से 2 इंच काटना ) कर दें। 
  5. गमले में लगे अमरुद के पौधे को हर 20 दिन बाद कम्पोस्ट या वर्मीकम्पोस्ट देना चाहिए। इससे पौधे की आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहती है। 
  6. अमरुद के पौधे को धूप की ज्यादा जरुरत होती है। अतः उसे ऐसी जगह रखें जहाँ वो पर्याप्त मात्रा में धूप पा सके। 
  7. अमरुद के पौधे को अन्य पौधों की अपेक्षा पानी की ज्यादा जरुरत होती  है। अतः गमले में लगे अमरूद के पौधे को सुबह – शाम दोनों समय पानी देना चाहिए। 
  8. एप्सम साल्ट (मैगनीशियम सल्फेट ) या सागरिका नाम के फर्टिलाइजर की एक चम्मच मात्रा को 1 लीटर पानी में डाल के अमरुद के पौधे पर छिड़काव करने से अमरुद के पौधे में फलों की पैदावार ज्यादा हो जाती है। 
  9. गमले में लगे अमरुद के पौधे की समय – समय पर गोड़ाई करते रहें। 
  10. गमले में लगे अमरुद के पौधे पर नीम की पत्तियों द्वारा बनाई गयी फर्टिलाइजर का छिड़काव करने से अमरुद के पौधे पर कीड़े नहीं लगेंगे और आपका अमरुद का पौधा अधिक मात्रा में फल देगा। 
  • नोट – नीम की पत्तियों से घर पर ही फर्टिलाइजर बनाये। यहाँ क्लिक करें। 
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z plant की देखभाल करने के 7 सबसे बेहतरीन तरीके।

 अगर आपके घर में भी z plant लगा हुआ है, तो आज हम आपको ऐसे 7  बेहतरीन तरीके बतायेंगे। जिससे आप अपने z plant की देखभाल अच्छे से कर सकें। 

  1. z plant को पानी की ज्यादा जरुरत नहीं होती है इसलिए z plant को 2 से 3 दिन के अंतराल पर ही पानी देना चाहिए। 
  2. अगर आपका z plant 3 से 4 साल का हो चूका है तो उसकी repotting (मिटटी को बदलना ) कर दें। 
  3. z plant को ज्यादा धूप की जरूरत नहीं होती है इसलिए उसे ऐसे स्थान पर रखे जहाँ 3 से 4 घंटे की धूप रहती हो। 
  4. अगर आपके z plant की पत्तियों पर सफेद दाग जैसा फंगल इन्फेक्शन है तो 1 लीटर पानी में 1-1 चम्मच white vinegar और baking soda डाल के पत्तियों पर छिड़काव कर दें। 
  5. z plant पर कभी भी shop water और oil का छिड़काव नहीं करना चाहिए। इससे z plant ख़राब हो जाता है। 
  6. z plant पर समय- समय पर नीम oil का स्प्रे सबसे बेस्ट और हेल्पफुल भी रहता है। 
  7. आप जब भी z plant लगाए तो मिटटी के गमले में ही लगाएं।
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इन पांच सरल उपायों से निम्बू का पौधा करेगा फलों की बरसात

अगर आपके घर भी नीम्बू का पौधा लगा है और आप चाहते हैं कि आपके नीम्बू के पौधे में पत्तियों से ज्यादा नीम्बू के फल हो तो नीचे दिए गये 5 तरीकों को जरूर आजमायें।

  1. आप नीम्बू का पौधा जिस मिटटी में लगा रहे है, उस मिटटी का PH मान 5.5 और 6.6 के बीच में होना चाहिए। 
  2. आपको नीम्बू के पौधे में  महीने में 2 बार वर्मीकम्पोस्ड, कम्पोस्ड,सड़ी हुई गोबर की खाद और नीम की खली डालनी चाहिए। 
  3. नीम्बू के पौधे को हमेशा 16 इंच या उससे बड़े गमले में लगाना चाहिए और ऐसी जगह रखे जहां खुली जगह हो और धूप पर्याप्त मात्रा में आती हो। 
  4. नीम्बू के पौधे को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। अतः जिस गमले में लगाए उसकी तली में छेद कर दे जिससे पानी की मात्रा ज्यादा न हो सके। 
  5. नीम्बू के पौधे में जो सूखी शाखायें हो उन्हें समय-समय निकलते रहिये। 
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नीम्बू के पौधे की देखरेख करने के सरल तरीके

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अगर आप भी चाहते हैं अपने नीम्बू के पौधे से फलों की बरसात तो ऐसे करें अपने नीम्बू के पौधे की देखरेख। 

  1. समय-समय पर आपको नीम्बू के पौधे की जो सूखी शाखाएँ हैं, उन्हें काटते रहना चाहिए। 
  2. नीम्बू के पौधे को ज्यादा पानी की जरुरत नहीं होती है। अतः आपको 2 से 3 दिन के अंतराल पर ही पानी देना चाहिए 
  3. महीने में 2 बार आपको नीम्बू के पौधे में सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए। 
  4. समय-समय पर नीम्बू के पौधे की मिटटी की अच्छे से गोड़ाई करते रहना चाहिए। 
  5. नीम्बू के पौधे को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त मात्रा में 6 से 7 घंटे की धूप आती हो। 
  6. जब आपके नीम्बू के पौधे में फूल आने लगे तब आपको नीम्बू के पौधे को पानी बहुत ही सीमित मात्रा में देना चाहिए। जब आप नीम्बू के पौधे को फूलों के समय अधिक मात्रा में पानी देंगे तो उनके फूल झड़ जायेंगे। जिससे फूल फल में तब्दील नहीं होगा। 
  7. आपको नीम्बू का पौधा हमेशा मिटटी और सीमेंट के गमले ही लगाना चाहिए। गमले का आकार 16 इंच या उससे बड़ा होना चाहिए। 
  8. आपको समय-समय पर नीम्बू के पौधे की एयर लेयरिंग करते रहना चाहिए।
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आइये जाने सर्दियों के मौसम में कैसे करें पौधों की रक्षा

आप सभी जानते होंगे की सर्दियों के मौसम में सभी पौधे मर जाते हैं आइये जाने ये क्यों होता हैं। और इसको कैसे रोका जाये :-

  • सबसे पहले इन पौधों में जो नयी कलियाँ या नये पत्ते आये तो इस सर्दियों के मौसम में इनको अच्छी तरीके से काट लेंगे। 
  • अगर आपके पौधों में बहुत ज्यादा पत्ते है तो उनको हल्का – हल्का काट लेंगे। और अगर कम है तो उसको छोड़ देंगे। 
  • इन पौधों पर 15 से 20 दिन पर नीम ऑइल ( नीम का तेल )का छिड़काव करते रहेंगे जिससे इन पर किट ( कीड़े ) न लग सकें। 
  • इन पौधों के गमले में जो घास उग जाते हैं उनको समय – समय पर साफ करते रहें। 
  • आप इन पौधों को सर्दि के मौसम में 3 से 4 दिन में एक बार ही पानी डालें क्योंकि सर्दियों के मौसम में पानी जल्दी सूख नहीं पाता जिससे पौधे सड़ जाते हैं। 
  • आप पौधों में पानी तभी डालें जब उस पौधे की मिट्टी में नमी हो अथवा उस पौधे की मिट्टी जब सूख जाये। 
  • सर्दियों के मौसम में कोशिश करें की पौधों को धूप वाली जगह पर रखें ताकि पौधों को धूप मिल सके। 
  • अगर आपकी तरफ ज्यादा सर्दी होती है तो आप पौधों के गमलों में नारियल का छिल्का या पत्थर के छोटे आकर के टुकड़े भी डाल सकते हैं। जिससे उनको गर्मी मिलती रहें। 
  • सर्दियों के मौसम में आप पौधों  में खाद न डालें। आपको अगर डालना है तो आप इसमें लिक्विड  फटिलाइजर ( काम मात्रा में )डाल सकते हैं। 
  • आपको इस बात का भी ध्यान रखना है की जो ओश होती है वो इन पौधों पर डायरेक्ट न पड़े। 

इन सब बातों को ध्यान में रखने से आपके पौधे सर्दियों में भी हरे – भरे रहेंगे और सर्दियों के बाद गर्मी के मौसम में आपको अच्छे फल – फूल देंगे। 

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फल के पौधों में ढेर सारे फल पाने के 5 अचूक उपाय

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अगर आपने भी अपने घर में फल के पौधे लगाए हैं और उसमे फल नहीं आ रहे हैं तो आज हम आपको 5 ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिसे आजमाकर आप भी अपने पौधों से ढेर सारे फल पा सकते हैं। 

  1. आपको हमेशा ग्राफ्टेड (कलमी ) पौधा ही अपने गमलों में लगाना चाहिए। जो की बहुत ही कम समय में अच्छे फल देने लगते हैं। 
  2. पौधों की समय- समय पर एयरलेयरिंग करते रहना चाहिए। इसे गुट्टी विधि के नाम से भी जाना जाता है। 
  3. आप जब भी पौधा लगाए तो उसकी मिटटी में गोबर की खाद (जो अच्छे से डिकम्पोस होनी चाहिए और  लगभग 2 साल पुरानी होनी चाहिए  ) को अच्छे से मिला के पौधा लगाना चाहिए। 
  4. आप अपने पौधे को ऐसी जगह लगाए जहां धूप पर्याप्त मात्रा में आती हो। 
  5. आपको पौधा लगा देने के बाद हर 15 दिन बाद अपने पौधे में गोबर की खाद डालते रहना चाहिए।
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गमले में उगाये ढेर सारे चीकू

अगर आपने अपने गमले में चीकू लगाया है और उसमे चीकू नहीं आ रहे हैं तो नीचे दिए हुए बातों को जरूर पढ़ें। 

  • आप जब भी चीकू का पौधा लगाए तो ग्राफ्टेड (कलमी )पौधा ही लगाए क्योंकि जो ग्राफ्टेड (कलमी ) पौधे होते हैं वो बहुत ही कम समय में ही फल देना शुरू कर देते हैं। बीज वाले पौधों की तुलना में , बीज वाले पौधे फल देने में लगभग 10 से 12 साल का समय ले लेते हैं।  ग्राफ्टेड (कलमी ) पौधे 2 से 3 साल के अंदर ही फल देना शुरू कर देते हैं। 
  • आपने जिस गमले में चीकू लगाया है उसमें डी.ए.पी. और गोबर की सड़ी हुई खाद को गमले की मिट्टी में मिला दें क्योंकि इस खाद में पूर्ण पोषक तत्त्व मिले होते हैं, जो चीकू के पौधे को स्वस्थ रखते हैं। जिस कारण से चीकू का पौधा पहले से अधिक मात्रा में फल देने लगता है। 
  •  सर्दियों में चीकू की पत्तियाँ सर्दी और पाले से ख़राब हो जाती हैं तो आपको सर्दी से उसे बचाना है। 
  • चीकू की पत्तियों पर कीड़े लग जाने पर उस पर नुमान और सायपर नामक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। 
  • समय समय पर गमले की मिटटी की गोड़ाई करते रहिये जिससे उसमे खर – पतवार ना उगने पाएँ। 
  • आप जब भी चीकू का पौधा नर्सरी से लाये और जिस मिट्टी में पौधा लगा हो उसे मिट्टी से ना निकले ऐसा करने से उसकी जड़े टूट जाती हैं और आपका पौधा सूख जायेगा।  आप उस मिट्टी को किसी चीज से मार के ढीला कर लीजिये इससे पौधे की जड़ भी नहीं टूटेगी। 

अगर आप इन बातों को ध्यान में रखते हैं तो आपके घर में लगे हुए चीकू के पौधे में भी ढेर सारे चीकू आएंगे। 

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गमले में आम उगाने के लिए जरूरी टिप्स

अगर आपको घर पर आम खाने के लिए लगाने है तो आप कभी भी गुठली से आम न लगाए क्योकि गुठली वाले आम कम से कम 10 से 12 साल बाद ही आम देते है। आप हमेशा ग्राफ्टेड आम ही लगाए जिससे आप उम्मीद कर सकते है कि यह हमें 4 से 5 साल में फल देने लगेगा।

पौधा लगाते समय ये बातें जरूर ध्यान में रखें :-

  • ग्राफ्टेड आम के पौधे की कलम मोटी टहनी से जुड़ी हो। क्योकि पतली टहनी हवा अथवा अन्य कारणों से जल्दी टूट भी जाती हैं। 
  • ग्राफ्टेड आम के पौधे में आप हमेशा छोटी वैरायटी ( आम्रपाली, नीलम, मलिका )ही लें। क्योंकि ये 10 से 12 फ़िट तक ही जाते हैं। तो इनको आप आसानी से गमले आदि में लगा सकते है। 
  • आप ग्राफ्टेड आम के पौधे में ज्यादा खाद न डालें। क्योंकि ज्यादा खाद के कारण पौधे को पोषण नहीं मिलता जिससे वह मर जाते हैं।
  • आप पौधे को आराम से पॉलीबैग से निकालें। क्योंकि पॉलीबैग से पौधा निकलते समय पौधे की जड़े टूट जाती है। जिससे उसके मरने की उम्मीद बढ़ जाती है। 
  • आप एक जूट  की नेट का छोटा टुकड़ा लें और इसको जड़ों के चारो तरफ लपेट दें और जूट  के टुकड़े के साथ ही इसको गमले में लगा दें। कुछ समय बाद यह जूट  मिट्टी में गल जायेगा। 
  • आप इन पौधो को ज्यादा बड़े गमले में न लगाए क्योंकि छोटे गमले में इसको काम जगह के कारण ये बोंसाई पौधे की तरह कम आकर का हो जाता हैं। 
  • आम के पौधे में आने वाले पहले फलों को तोड़ दे क्योंकि ये एक बार फल देने के बाद दूसरी बार फल देने में कठिनाइया होने लगती है। 
  • ग्राफ्टेड पौधे के बौर में यदि कोई फल य फूल लगा है हो उसको साफ कैंची से काट लें।
  • एक फल इस पौधे पर लगा छोड़ दे जिससे आपको पता चल सके की आपके पौधे के फल हैल्थी है या कमज़ोर। मतलब आपका पौधा फलो की अच्छे से ग्रोथ कर सकता है या नहीं। 
  • आपने जो एक आम पौधे पर छोड़ा था आप उसको 20 से 25 दिन बाद उसको भी काट कर पौधे से अलग कर दे। 
  • आपने जो एक फल पौधे पर छोड़ा था उसके आकर के अनुसार आप पौधे की कवालिटी का अनुमान लगा सकते हैं। 

इन सब बातों को अपनाने से आपको जल्द ही घर में लगे आम खाने को मिलेंगे।

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पौधे की सभी बीमारियों का एक ही इलाज इसे जरूर पढ़ें

अगर आप अपने पौधों से अत्यधिक प्रेम करते हैं और उनको कीड़ो -मकोड़ो से बचाना चाहते हैं, तो इस विधि को जरूर आजमाएं। आपके पौधे ना की स्वस्थ बल्कि पहले से ज्यादा फल और फूल देंगे।

             विधि :-  सबसे पहले आपको 200 से 300 ग्राम नीम की पत्तियों को ले लेना है। 50 ग्राम कनेर की पत्तियों को ले लेना है। नीम की पत्तियां निकलने के बाद आपके पास नीम की जो शाखाएं बची होंगी उनका भी उपयोग करना है। नीम की शाखाओं को ओखली में डाल के उन्हें कुचल लेना है। अब आप एक कोई बड़ा सा बर्तन लेके उसमे एक लीटर साफ पानी डाल दें। आप नीम और कनेर की पत्तियों को अच्छी तरह साफ कर लीजिये। सबसे पहले आप एक लीटर साफ पानी वाले बर्तन में कनेर की पत्तियां डालनी हैं फिर उसके ऊपर से नीम की पत्तियां डालनी हैं और धीमी आंच में उबलने के लिए रख दीजिये। 10 मिनट बाद आपको नीम की शाखाएं लेनी हैं और उसमे डाल देनी हैं। नीम की शाखाएं डालने के बाद उसे एक से डेढ़ घंटे के लिए उबलने के लिए छोड़ दें।

             पानी उबलने के बाद उसे साफ बर्तन में छान लें। पानी छानने के बाद उसे एक बोतल में भर लें और कुछ देर ठंडा होने के लिए रख दें। पानी ठंडा होने के बाद उसे अपने घर के पौधों पे छिड़काव करें। आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे।

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गुलाब की कलम लगाने के 10 बेहतरीन तरीके और कहीं नहीं मिलेंगे आपको

  1. कम से कम आधा इंच मोटी गुलाब की कलम लगनी चाहिए, जिसमे छोटे छोटे कल्ले निकले हों।  
  2. अगर आपने अपने गुलाब की ताजी कलम काटी है, तो उसे लगाने से पहले 1 घंटा पानी में डालकर रखें। 
  3. अगर गुलाब की कलम काटे हुए 2 से 3 घंटे हो गए हैं, तो उसे लगाने से पहले 10 से 12 घंटो के लिए पानी में डालकर के रखें।
  4.  गुलाब की कलम लगाने वाली मिट्टी में सूखा गोबर मिला लेना चाहिए और जिस गमले में लगाए उसकी तली में छोटा छेद कर देना चाहिए। 
  5. गुलाब की कलम का जो हिस्सा आप मिट्टी में लगाए उसे आधा इंच छील लें। 
  6. गुलाब की कलम को मिट्टी में 3 इंच तक दबा देना चाहिए। 
  7. मिट्टी में पानी डालने के बाद ही गुलाब की कलम लगाएं। 
  8. मिट्टी में कलम लगाने के बाद उसे झिल्ली से ढक दें और 2 दिन तक पानी ना डालें। पानी की मात्रा ज्यादा होने से इसकी जड़े सड़ने लगती हैं। 
  9. आपने जिस गमले में गुलाब की कलम लगायी है, उसे ज्यादातर छाया वाली जगह पर ही रखें। 
  10. आप गमले में थोड़ा सा कोयला पीस के डाल दीजिये, इससे कलम के ऊपरी हिस्से काले नहीं होंगे।
https://youtu.be/GNNYuuAc6ao
 
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घर पर बनाये ऐसी खाद की पौधे करे फल और फूलों की बरसात

अगर आपने कोई फल या  फूल का पौधा लगाया है और उसमें फल और फूल नहीं निकल रहे हैं,या बहुत कम  फल और फूल निकलते है तो निराश होने की जरूरत नहीं है। आज हम आपको घर पर सरल विधि से बनने वाली ऐसी खाद के बारे में बताएँगे जिससे आपके पौधे में फलों और फूलों की बरसात हो जायगी। यह खाद आप घर पर बहुत आसानी से बिना ज्यादा पैसा खर्च किये बना सकते है।  इसके लिए  आप 2  से 3 फीट का गमला लें। 2 इंच मोटी मिट्टी की परत बिछा के उस में अपने घर का कूड़ा (जैसे :- सब्जियों और फलों के छिलके ) और  4 चम्मच दही डालके अच्छी तरह थोड़े पानी के साथ मिला दें। दही डालने से खाद का निर्माण जल्दी होता है। अगर आप चाहते हैं खाद में पोटेशियम और नाइट्रोजन की मात्रा सही हो तो उस में नीम्बू और केले के छिलके डाल के टाट की बोरी से ढक दें।कुछ दिनों बाद जब खाद सड़ कर तैयार हो जाये तो इसे अपने पौधों में डाल दें।  एक ही महीने में फलों और फूलों की बरसात देखकर आप हैरान हो जायेंगे।

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गमले में पौधा लगाने से पहले ध्यान रखने योग्य 10 बातें

  1. अगर आप पौधे की growth अच्छी चाहते हैं तो 2 से ३ फ़ीट के गमले का उपयोग करें। 
  2. अगर गमला पुराना है तो उसे अच्छी तरह साफ कर लें। 
  3. अगर गमले की तली में छेद ना हो तो तली में एक छोटा सा छेद कर के पौधा लगाएं। 
  4. मिट्टी को हाथों से मसल के भुरभुरी बना लें। 
  5. मिट्टी में कम्पोस्ट खाद और डी. ओ. पी. का उपयोग करें। 
  6. मिट्टी में अन्य पौधों की जड़े हो तो निकल दीजिये। 
  7. अगर आप किसी जगह से मिट्टी ले रहे हैं तो 6 इंच के ऊपर की ही मिट्टी  लें। 
  8. नर्सरी से लाये गए पौधों में जो मिट्टी लगी होती है वो काफी चिकनी होती है तो लगाने से पहले उसे निकल दें। 
  9. आपको पौधा लगाने के लिए मिट्टी वाला गमला ही उपयोग  करना चाहिए। 
  10. अगर हो सके तो पौधे लगाने वाली मिट्टी में केंचुए भी डाल दें।