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कैसे गार्डनिंग (बागवानी) व्यक्ति की खूबसूरती को बढ़ाती है —

आइए समझते हैं कैसे गार्डनिंग (बागवानी) व्यक्ति की खूबसूरती को बढ़ाती है — बाहर और भीतर दोनों तरह से:


🌸 1. चेहरे की चमक और त्वचा की सुंदरता बढ़ती है

  • मिट्टी के संपर्क में आने से स्किन पर हल्की एक्सफोलिएशन होती है — त्वचा कोमल बनती है।

  • पौधों की देखभाल करते हुए पसीना निकलता है, जिससे टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और स्किन ग्लो करती है।

  • धूप में सीमित समय बिताने से विटामिन D मिलता है — त्वचा, बाल और हड्डियों के लिए ज़रूरी।


🧘‍♂️ 2. मानसिक सुंदरता – शांत और खुश मिज़ाज

  • गार्डनिंग तनाव, गुस्सा, और अवसाद को दूर करती है।

  • रोज पौधों से बातचीत करने, उन्हें निहारने से मन शांत होता है।

  • इससे आपकी आंखों में शांति और मुस्कान झलकती है — जो सच्ची सुंदरता होती है।


💪 3. शरीर को आकार और चुस्ती मिलती है

  • मिट्टी खोदना, पानी देना, पौधे लगाना — ये सभी क्रियाएं शारीरिक श्रम हैं।

  • इससे शरीर में हल्की कसरत होती है, जिससे मोटापा कम होता है और व्यक्ति चुस्त-दुरुस्त रहता है।


🫀 4. अंदरूनी स्वास्थ्य अच्छा होता है

  • गार्डनिंग के दौरान ताज़ी हवा, ताज़ा ऑक्सीजन मिलती है — फेफड़े साफ होते हैं।

  • हरा वातावरण ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट और इम्यूनिटी को संतुलित करता है।

  • जब शरीर स्वस्थ होता है, तो चेहरा खुद-ब-खुद दमकता है।


🌿 5. प्रकृति से जुड़ाव = आत्मिक सुंदरता

  • पौधे आपको दयालु, संवेदनशील और सहनशील बनाते हैं।

  • जब आप किसी जीवन (पौधे) को बड़ा होते देखते हैं, तो आपके अंदर प्रेम, धैर्य और सहनशीलता जैसे गुण पनपते हैं — और यही आपकी असली खूबसूरती बन जाते हैं।


📸 6. व्यवहारिक रूप से भी सुंदर लगते हैं:

  • गार्डनिंग करने वालों के हाथ में हरियाली, चेहरे पर संतोष और आँखों में चमक होती है।

  • ऐसे व्यक्ति आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं — बिना ज़्यादा सजावटी चीजों के।


✅ निष्कर्ष:

“पौधे उगाते-उगाते आप खुद भी निखरते जाते हैं — तन, मन और रूप तीनों में।”

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20 जरूरी बातें जो हर Gardener माली को ज़रूर मालूम होनी चाहिए

हर माली (Gardener) — चाहे वह शौकिया हो या पेशेवर — को कुछ मूलभूत और जरूरी बातें जाननी ही चाहिए ताकि पौधे स्वस्थ, हरे-भरे और फलदार रहें।

नीचे दी गई हैं 20 जरूरी बातें जो हर माली को ज़रूर मालूम होनी चाहिए:

Full Sun Exposure Miyazaki Mango Plant
Full Sun Exposure Miyazaki Mango Plant


🌿 हर माली को जाननी चाहिए ये 20 जरूरी बातें:


🪴 1. सही पौधे का चयन (Right Plant for Right Place)

  • हर पौधा हर जगह नहीं पनपता।
    जैसे – तुलसी को धूप चाहिए, सर्पगंधा को छांव।


☀️ 2. धूप की जानकारी होनी चाहिए

  • कुछ पौधे पूर्ण धूप (6–8 घंटे) में पनपते हैं (जैसे नींबू, गुलाब),
    जबकि कुछ को अर्धछाया (3–4 घंटे) चाहिए (जैसे मनी प्लांट, फर्न)।


💧 3. सही पानी देने की विधि जानें

  • अधिक पानी = जड़ सड़ने का खतरा
    कम पानी = सूखने का खतरा
    👉 केवल तभी पानी दें जब मिट्टी ऊपरी 1–2 इंच तक सूखी हो।


🌱 4. मिट्टी का महत्व समझें

  • मिट्टी में जलनिकासी, पोषण और हवा होनी चाहिए।
    अच्छी मिट्टी = 50% मिट्टी + 25% खाद + 25% बालू/कोकोपीट।


🍂 5. जैविक खाद का उपयोग करें

  • वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद, नीम खली, बोन मील आदि पौधों के लिए लाभदायक हैं।


✂️ 6. नियमित कटाई-छंटाई (Pruning) करें

  • सूखी, मरी हुई और अधिक फैली टहनियों को हटाते रहें।
    इससे नई कोंपलें तेजी से आती हैं।


🐛 7. कीट पहचानें और नियंत्रण करें

  • एफिड, मीलिबग, थ्रिप्स, फंगस आदि कीटों को जल्दी पहचानें।
    नीम तेल, साबुन पानी, और ट्रैप्स का उपयोग करें।


🧪 8. खाद कब-कब देनी है, इसका शेड्यूल बनाएं

  • हर 15-30 दिन में जैविक खाद दें।
    फूल-फल वाले पौधों में फॉस्फोरस और पोटाश ज़रूरी होते हैं।


🌼 9. फूल गिरने का कारण समझें

  • अधिक पानी, अधिक नाइट्रोजन, या तेज धूप से फूल गिर सकते हैं।
    बैलेंस्ड फर्टिलाइजर और कम पानी रखें।


🧹 10. गमले की सफाई रखें

  • पुराने सूखे पत्ते, गिरी हुई मिट्टी, काई आदि साफ करते रहें —
    इससे फंगस और कीट कम लगते हैं।


🪣 11. गमलों में छेद जरूर हों

  • जल निकासी (drainage) न होने से जड़ सड़ जाती है।


🔁 12. गमलों को घुमाते रहें

  • ताकि सभी तरफ से पौधे को समान धूप मिले।
    महीने में एक बार गमले की दिशा बदलें।


🕷️ 13. रोग से पहले बचाव करें

  • सप्ताह में 1 बार नीम तेल का छिड़काव करें —
    यह कीड़ों और फंगस को आने ही नहीं देता।


📅 14. मौसमी बदलाव समझें

  • सर्दी में पानी और खाद कम दें,
    गर्मी और बरसात में ध्यान ज्यादा रखें।


🍀 15. बीज से पौधा उगाना सीखें

  • यह माली की सबसे संतोषजनक कला होती है।
    बीज अंकुरण की प्रक्रिया समझना जरूरी है।


🌧️ 16. बारिश में अधिक पानी से बचाव करें

  • पौधों को तेज बारिश से बचाने के लिए
    उन्हें शेड या शिफ्ट करने की व्यवस्था रखें।


⚖️ 17. खाद–पानी का संतुलन बनाएं

  • ज़्यादा खाद या ज़्यादा पानी “जहर” बन सकता है।
    संतुलन जरूरी है।


📚 18. पौधों की जानकारी रखें

  • हर पौधे की ज़रूरत अलग होती है।
    उसके अनुसार ही देखभाल करें।


🪵 19. मल्चिंग करें (Mulching)

  • सूखे पत्ते, भूसा, नारियल की छाल आदि मिट्टी पर बिछाएं।
    इससे नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं।


❤️ 20. धैर्य और प्रेम से देखभाल करें

  • पौधे समय लेते हैं।
    धैर्य रखें, रोज़ देखभाल करें, प्यार से बात करें —
    यकीन मानिए, पौधे जवाब जरूर देंगे।


📌 बोनस टिप:

“एक माली पौधों को नहीं, प्रकृति के संतुलन को उगाता है।”

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DAP, NPK और Urea गमले वाले पौधों के लिए कब कौन सी खाद दें

DAP, NPK और Urea — ये तीनों रासायनिक उर्वरक (chemical fertilizers) हैं और इनका सही समय और मात्रा में प्रयोग करना जरूरी है, वरना पौधों को हानि हो सकती है।


🔍 आइए एक-एक करके समझते हैं:


🧪 1. DAP (Diammonium Phosphate) खाद

मुख्य तत्व:

  • नाइट्रोजन (N) – 18%

  • फॉस्फोरस (P) – 46%

🕒 प्रयोग का सही समय:

  • पौध रोपने (planting) के समय

  • फूल आने से 15–20 दिन पहले

  • नए पौधों की शुरुआती वृद्धि के समय

💡 कैसे दें:

  • 1 गमले में 1–2 चम्मच DAP हर 30 दिन में एक बार मिट्टी में मिला सकते हैं।

  • हमेशा गीली मिट्टी में डालें और तुरंत पानी दें।

⚠️ सावधानी:

  • सीधे पौधे की जड़ों के पास न डालें।

  • ज्यादा देने से फूल गिर सकते हैं या पौधा जल सकता है।


🌾 2. NPK खाद (19:19:19 या 20:20:20 इत्यादि)

मुख्य तत्व:

  • N – नाइट्रोजन (पत्तियों के लिए)

  • P – फॉस्फोरस (जड़ों और फूलों के लिए)

  • K – पोटाश (फल और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए)

🕒 प्रयोग का सही समय:

  • फूलों की कली आने से पहले और बाद में

  • फल आने की अवस्था में

  • पौधे की सामान्य वृद्धि के समय (15-30 दिन पर)

💡 कैसे दें:

  • 1 लीटर पानी में 2–3 ग्राम NPK मिलाएं और स्प्रे करें या मिट्टी में दें।

  • महीने में 1–2 बार

⚠️ सावधानी:

  • गर्म दोपहर में कभी न दें।

  • फूल या फल आने के समय ज़्यादा नाइट्रोजन वाली NPK से बचें — अन्यथा फूल झड़ सकते हैं।


🧪 3. यूरिया (Urea)

मुख्य तत्व:

  • नाइट्रोजन – 46%
    (सिर्फ पत्तियों की हरी वृद्धि के लिए उपयोगी)

🕒 प्रयोग का सही समय:

  • शुरुआती अवस्था में, जब पौधा सिर्फ पत्तियां बना रहा हो।

  • हरी पत्तियों की कमी या पीलापन दिखे तब

  • फूल आने से पहले ही, बाद में नहीं

💡 कैसे दें:

  • 1 लीटर पानी में 1–2 ग्राम यूरिया मिलाकर हर 15–20 दिन में दें।

  • या 1–2 चम्मच मिट्टी में मिलाकर और पानी दें।

⚠️ सावधानी:

  • फूल या फल आने के समय Urea न दें, वरना फूल गिर सकते हैं।

  • ज़्यादा देने से पौधा “soft” हो जाता है और कीट आकर्षित होते हैं।


सारांश: कब कौन सी खाद दें:

खाद कब दें किसके लिए उपयोगी
DAP रोपण के समय, फूल से पहले जड़ और शुरुआत में वृद्धि
NPK फूल-फल से पहले और दौरान संतुलित विकास, फूल-फल
Urea शुरुआती पत्तियों की वृद्धि हरी पत्तियाँ और तेजी से विकास

🌱 गमले वाले पौधों के लिए सुझाव:

  • NPK और DAP को बदल-बदल कर हर 20-30 दिन में दें।

  • यूरिया सिर्फ शुरुआत में 1-2 बार ही दें।

  • जैविक खाद (जैसे वर्मी कम्पोस्ट, नीम खली) के साथ संयोजन करें ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे।

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पौधों को दी जाने वाली प्रमुख खादों के प्रकार, उनके लाभ और संभावित हानि

पौधों को दी जाने वाली खादें (Fertilizers & Manures) मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं — प्राकृतिक (Organic) और रासायनिक (Chemical)। हर खाद का अपना विशेष लाभ होता है, और यदि गलत तरीके से प्रयोग की जाए तो हानियाँ भी हो सकती हैं।

Bpn soil booster fertilizer
Bpn soil booster fertilizer

नीचे प्रमुख खादों के प्रकार, उनके लाभ और संभावित हानि विस्तार से दिए जा रहे हैं:


🌿 1. गोबर की खाद (Cow Dung Manure)

लाभ:

  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है

  • पानी रोकने की क्षमता बढ़ाती है

  • सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है

  • पौधों को धीरे-धीरे पोषण देती है (slow-release nutrition)

हानि:

  • कच्चा गोबर प्रयोग करने से जड़ें जल सकती हैं

  • अच्छी तरह सड़ा न हो तो कीट और फफूंदी आ सकती है


🌿 2. वर्मी कम्पोस्ट (Vermicompost)

लाभ:

  • सभी आवश्यक पोषक तत्व देता है (NPK सहित)

  • जड़ों की वृद्धि और फूल-फल में वृद्धि करता है

  • पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

हानि:

  • अधिक मात्रा में देने से पौधों में फंगल रोग हो सकते हैं

  • नमी में रखने पर बदबू व कीड़े उत्पन्न हो सकते हैं


🌰 3. नीम खली (Neem Cake)

लाभ:

  • जैविक कीटनाशक के रूप में कार्य करता है

  • मिट्टी में कीड़े-मकोड़े नहीं लगते

  • नाइट्रोजन और अन्य तत्वों की आपूर्ति करता है

हानि:

  • अधिक देने से पौधों की वृद्धि धीमी हो सकती है

  • तेज गंध के कारण कीड़े भी आ सकते हैं


🦴 4. बोन मील (Bone Meal)

लाभ:

  • फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत (जड़ें, फूल, फल के लिए उपयोगी)

  • मिट्टी को धीरे-धीरे पोषक बनाता है

हानि:

  • कुत्ते/बिल्ली जैसी जानवरों को आकर्षित करता है

  • अत्यधिक देने से पत्तियाँ पीली पड़ सकती हैं


🥬 5. कंपोस्ट (Compost) – रसोई कचरे से

लाभ:

  • मिट्टी की संरचना में सुधार करता है

  • सभी सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करता है

  • कचरे का पुनः उपयोग (Recycle) होता है

हानि:

  • अगर सही तरीके से न बनाया जाए तो दुर्गंध, मच्छर, फंगस पैदा कर सकता है


🧪 6. यूरिया (Urea) – रासायनिक नाइट्रोजन खाद

लाभ:

  • तेजी से हरे पत्ते और वृद्धि करता है

  • सस्ता और उपलब्ध

हानि:

  • अधिक मात्रा में देने से जड़ें जल सकती हैं

  • मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय में घटती है


🧪 7. DAP (Diammonium Phosphate)

लाभ:

  • नाइट्रोजन और फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत

  • फूल और फल में वृद्धि करता है

हानि:

  • अधिक प्रयोग से मिट्टी में अम्लता बढ़ सकती है

  • अन्य पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो सकता है


⚗️ 8. पोटाश (MOP/SOP – Muriate/Sulphate of Potash)

लाभ:

  • पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

  • फल की गुणवत्ता और मिठास में सुधार करता है

हानि:

  • अधिक देने से पत्तियाँ झुलस सकती हैं

  • सल्ट बनने की संभावना


🌼 9. माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (जिंक, बोरॉन, आयरन आदि)

लाभ:

  • पौधों के छोटे-छोटे पोषक तत्वों की पूर्ति करता है

  • पत्तियाँ हरी और स्वस्थ बनती हैं

हानि:

  • जरूरत से ज़्यादा स्प्रे करने से पत्तियाँ झुलस सकती हैं


👉 उपयोग करने का सामान्य नियम:

  • कम मात्रा में और नियमित अंतराल पर खाद दें

  • किसी भी खाद को गर्म दोपहर में कभी न डालें

  • खाद डालने के बाद हल्का पानी जरूर दें

  • जैविक खादों को रासायनिक खादों के साथ बदल-बदल कर प्रयोग करें

https://bonsaiplantsnursery.com/product-category/fertilizer/

 

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गमले में लगे नींबू के पौधे में ढेर सारे फल पाने के लिए उपाय

गमले में लगे नींबू के पौधे में ढेर सारे फल पाने के लिए आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा, क्योंकि कंटेनर (गमला) में सीमित मिट्टी और पोषण होने की वजह से पौधे को सही देखभाल चाहिए। नीचे दिए गए उपायों से आप नींबू के पौधे से अधिक फल पा सकते हैं:

All season lemon plant for pot
All season lemon plant for pot

🌱 1. गमले का चयन:

  • साइज: कम से कम 16 से 24 इंच गहरा और चौड़ा गमला लें (30 से 50 लीटर तक का) ताकि जड़ें अच्छे से फैल सकें।

  • ड्रेनेज: नीचे जल निकासी के छेद जरूर होने चाहिए, ताकि पानी जमा न हो।


🌿 2. मिट्टी की गुणवत्ता:

  • नींबू को ढीली, उपजाऊ और जलनिकासी वाली मिट्टी चाहिए।

  • मिट्टी का मिश्रण:
    50% बागवानी मिट्टी + 25% गोबर की खाद/कम्पोस्ट + 25% रेत या पर्लाइट


☀️ 3. धूप:

  • नींबू का पौधा प्रतिदिन 6 से 8 घंटे की सीधी धूप चाहता है।
    उसे खुली और धूपदार जगह पर रखें।


💧 4. पानी देना:

  • मिट्टी सूखने पर ही पानी दें।

  • गर्मियों में हर 2–3 दिन पर, सर्दियों में 5–7 दिन पर दें।

  • अधिक पानी से जड़ें सड़ सकती हैं।


🍂 5. खाद/फर्टिलाइजर:

हर महीने ये खाद दें:

  • गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट – 2 मुट्ठी

  • नीम खली – 1 मुट्ठी (कीटों से सुरक्षा के लिए)

  • हड्डी की खाद (Bone Meal) – 1 मुट्ठी (फूल-फल बढ़ाने के लिए)

  • पोटाश – 1 चम्मच (फल में मिठास लाने और संख्या बढ़ाने के लिए)

मार्च–सितंबर के बीच खाद नियमित दें। सर्दियों में खाद कम करें।


🌸 6. फूलों की देखभाल:

  • जब फूल आएं, तब पौधे को हिलाएं नहीं और पानी कम दें।

  • फूल झड़ने से रोकने के लिए Micronutrients स्प्रे करें (जैसे Zinc, Boron, Magnesium)।


✂️ 7. नियमित कटाई-छंटाई (Pruning):

  • सूखी, पीली और रोगी टहनियाँ हटा दें।

  • इससे ऊर्जा सही दिशा में जाएगी और पौधा झाड़ीदार बनेगा।


🐛 8. कीट नियंत्रण:

  • नीम तेल (Neem Oil) का छिड़काव सप्ताह में 1 बार करें।

  • पत्तों के नीचे देखें – अगर सफेद या चिपचिपा पदार्थ दिखे तो तुरंत इलाज करें।


9. धैर्य रखें:

  • बीज से लगे पौधे में फल आने में 3–4 साल लग सकते हैं।

  • ग्राफ्टेड पौधे (कलम किए हुए) में 1–2 साल में फल आने लगते हैं।


✅ बोनस सुझाव:

  • फूल आते समय “फॉस्फोरस और पोटाश” अधिक दें, “नाइट्रोजन” कम करें।

  • गमले को महीने में एक बार घुमा दें ताकि हर ओर समान धूप मिले।

Baramasi Lemon Plant for rooftop gardening – All season lemon plant for terrace gardening

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बाग़ीचे या छत पर गमलों के पास मच्छरों को आने से रोकने के प्रभावी और आसान उपाय

बाग़ीचे या छत पर गमलों के पास मच्छरों को रोकना जरूरी होता है ताकि पौधे स्वस्थ रहें और आपको भी मच्छर काटने से बचाव हो। मच्छर खासकर गमलों के खड़े पानी या नमी वाली जगहों पर पनपते हैं।


🦟🌿 गमलों के पास मच्छरों को आने से रोकने के प्रभावी और आसान उपाय


1. खड़े पानी को पूरी तरह खत्म करें

  • गमलों के नीचे जो पानी जमा रहता है, उसे हर दिन खाली करें।

  • गमलों के नीचे ड्रेनेज प्लेट (प्लेटर) में पानी न रखें, या उसमें पानी रोज बदलें।

  • अगर संभव हो तो गमले में सिंचाई कम करें और मिट्टी कभी पूरी तरह सूखने दें।


2. मच्छर भगाने वाले पौधे लगाएँ

  • गमलों या पास में तुलसी, लेमनग्रास, नीम, पुदीना, गंधपुष्प (Marigold) जैसे पौधे लगाएं।

  • ये पौधे मच्छरों को दूर भगाते हैं और साथ में बाग़ीचे की खुशबू भी बढ़ाते हैं।


3. नीम या तुलसी का पानी छिड़काव

  • नीम के पत्ते उबालकर ठंडा पानी बनाएं और गमलों के आसपास छिड़काव करें।

  • तुलसी के पत्ते भी पानी में उबालकर स्प्रे कर सकते हैं।


4. सिरका और नींबू का स्प्रे

  • 1 लीटर पानी में आधा नींबू निचोड़कर और 2 चम्मच सफेद सिरका डालकर स्प्रे बनाएं।

  • गमलों के आसपास हल्का छिड़काव करें।


5. मच्छरदानी या नेट का इस्तेमाल

  • अगर गमले छत पर या बालकनी में हैं, तो मच्छरदानी या नेट लगाएं जिससे मच्छर अंदर न आएं।

  • गमलों के आस-पास छोटे छोटे नेट के कवर लगाना भी फायदा करता है।


6. बेसिन या पानी वाले बर्तन में मच्छर रोकें

  • अगर आपके पास आस-पास कोई पानी जमा होने वाली जगह है (जैसे बेसिन, टंकी आदि), तो वहां की सफाई रखें।

  • मच्छर के लार्वा के लिए ये जगहें अनुकूल होती हैं।


7. मच्छर भगाने वाले जैविक स्प्रे का प्रयोग करें

  • नीम तेल, नीम पानी या लेमनग्रास तेल को पानी में मिलाकर स्प्रे करें।

  • बाजार में मिलने वाले ऑर्गेनिक मच्छर भगाने वाले स्प्रे भी इस्तेमाल कर सकते हैं।


8. गमलों में सही ड्रेनेज रखें

  • गमले में ड्रेनेज हो ताकि पानी जमा न हो।

  • गमलों के नीचे छेद और मिट्टी के कंकड़ डालकर पानी निकासी सुनिश्चित करें।


🔑 सबसे जरूरी बात:

मच्छरों का लार्वा पानी में पनपता है, इसलिए खड़े पानी को जड़ से खत्म करना ही सबसे बड़ा इलाज है।

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बंदरों से फलों को बचाने के असरदार उपाय

बंदरों से फलों को बचाना वास्तव में काफी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि वे बहुत चालाक, फुर्तीले और ज़िद्दी होते हैं। लेकिन कुछ प्राकृतिक, असरदार और मानवता-पूर्वक उपाय हैं जिन्हें आप आज़मा सकते हैं — खासकर गमलों, छत या बगीचे में लगे फलदार पौधों की रक्षा के लिए।

बंदरों से फलों को बचाने के असरदार उपाय
बंदरों से फलों को बचाने के असरदार उपाय

🐒 बंदरों से फलों को बचाने के असरदार उपाय


✅ 1. फल/पौधे को नेट से ढकना (Fruit Netting)

  • फल लगने पर उन्हें ग्रीन नेट, मच्छरदानी, या स्पेशल गार्डन नेट से ढक दें।

  • छत पर पूरे गमलों को नेट के केज/फ्रेम में बंद करना सबसे असरदार तरीका है।

🧠 बंदर जाल के नीचे से हाथ नहीं डाल सकते अगर वो अच्छी तरह बांधा गया हो।


✅ 2. रिफ्लेक्टिव टेप या CD का डर

  • पुराने CD, चमकीली चादरें (reflective tape) या एल्युमिनियम फॉयल को पौधों के पास लटकाएँ।

  • ये सूरज की रोशनी में चमकते हैं और हिलते हैं, जिससे बंदर डरते हैं।


✅ 3. कुत्ते की आवाज़ / खिलौने / नकली जानवर

  • प्लास्टिक का नकली साँप, बड़ी बिल्ली या उल्लू का खिलौना पेड़ या गमले के पास रखें।

  • या फिर अपने मोबाइल से कुत्ते की भौंकने की आवाज़ बंदर दिखने पर चलाएँ।

🔄 बंदर धीरे-धीरे इनसे आदत बना लेते हैं, इसलिए हफ्ते-दो हफ्ते में इनकी जगह बदलते रहें।


✅ 4. बंदर प्रतिरोधक स्प्रे (Natural Repellent Spray)

घर पर बना सकते हैं — बदबू से बंदर दूर भागते हैं।

🌶️ घरेलू स्प्रे नुस्खा:

सामग्री मात्रा
लाल मिर्च पाउडर 2 चम्मच
सिरका (white vinegar) 1 कप
पानी 1 लीटर
लहसुन का रस (optional) 1 चम्मच

विधि:

  • सबको मिलाकर 2–3 घंटे रखें और फिर स्प्रे बोतल में भरें।

  • पौधे की मिट्टी के पास, गमले के किनारे और आसपास की सतह पर छिड़कें।

⚠️ फल या पत्तियों पर सीधे न छिड़कें — केवल पास में उपयोग करें।


✅ 5. बंदर के आने का रास्ता बंद करें

  • अगर आप छत पर बागवानी कर रहे हैं:

    • लोहे की ग्रिल या नेट से जगह को घेर दें।

    • बंदर जिस दिशा से आते हैं, वहाँ झाड़ीदार पौधे या कांटेदार झाड़ लगाएँ।


✅ 6. सामूहिक उपाय अपनाएँ (Neighbours के साथ)

  • बंदर यदि झुंड में आ रहे हैं तो अकेले रोकना मुश्किल होगा।

  • आस-पड़ोस के लोगों के साथ मिलकर:

    • नेट लगाएँ

    • सामूहिक आवाज़ करें

    • कुछ दिनों तक “नज़र रखवाली” करें


❌ क्या न करें:

गलती क्यों न करें
पत्थर फेंकना या नुकसान पहुँचाना ये अवैध और अमानवीय है; बंदर और आक्रामक हो सकते हैं
ज़हर या केमिकल जानवरों, बच्चों और पक्षियों को नुकसान हो सकता है
बंदरों को खाना देना आदत पड़ जाती है और वे बार-बार लौटते हैं

🎯 सबसे असरदार उपाय संयोजन में अपनाएँ:

“नेट + स्प्रे + डराने वाले टूल” साथ में चलाएं।

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🌿 गमले की घास हटाने के असरदार तरीके

गमलों में पौधों के साथ जो घास (या जंगली पौधे) उग आते हैं, वे पौधे से पोषक तत्व, पानी और जगह छीन लेते हैं। अगर समय पर न हटाए जाएँ, तो वे पौधे की 成ृद्धि रोक सकते हैं और फंगल संक्रमण या कीट भी ला सकते हैं।

यहाँ दिए हैं कुछ साधारण और असरदार तरीके जिससे आप गमले की घास को हटा सकते हैं और भविष्य में उगने से रोक सकते हैं:


🌿 गमले की घास हटाने के असरदार तरीके

✅ 1. हाथ से उखाड़ें (Hand Weeding)

  • जब घास छोटी हो तब हाथ से उखाड़ना सबसे आसान और प्रभावी तरीका है।

  • ध्यान दें कि जड़ तक उखाड़ें, वरना फिर से उग आएगी।

💡 टिप: बारिश के बाद मिट्टी नरम होती है, तब उखाड़ना आसान रहता है।


✅ 2. ऊपरी परत की खुदाई (Top Layer Scraping)

  • 1–2 इंच मिट्टी की ऊपरी परत को हटाकर नई और साफ मिट्टी भरें।

  • घास के बीज भी ऊपर ही रहते हैं, इससे उनका अंकुरण रुकेगा।


✅ 3. मल्चिंग करें (Mulching)

  • गमले की मिट्टी पर सूखी पत्तियाँ, भूसे, कोकोपीट, या लकड़ी की छीलन की परत बिछाएँ।

  • इससे धूप नहीं पहुँचेगी और घास नहीं उगेगी।

✅ मल्चिंग से पानी की बचत भी होती है और पौधे की जड़ें ठंडी रहती हैं।


✅ 4. घरेलू जैविक स्प्रे से घास खत्म करें

🌱 घास हटाने वाला घरेलू स्प्रे नुस्खा:

सामग्री:

  • 1 कप सफेद सिरका (white vinegar)

  • 1 चम्मच नमक

  • 1 चम्मच डिश लिक्विड साबुन

  • 1 लीटर पानी

विधि:

  • इन सबको मिलाकर स्प्रे बोतल में भरें।

  • केवल घास पर स्प्रे करें (मुख्य पौधे पर न आए!)

  • 1-2 दिन में घास सूख जाएगी।

⚠️ सिरका पौधों को भी नुकसान पहुँचा सकता है, इसलिए सिर्फ घास पर ही छिड़काव करें।


✅ 5. घास-रोकने वाली मिट्टी तैयार करें

  • मिट्टी में नीम खली, ऐश (राख), या खट्टी खाद (acidic compost) मिलाएँ — इससे घास का उगना कम होता है।

  • गमले में घास बीज आने से बचें — आसपास की ज़मीन साफ रखें।


क्या न करें:

❌ गलती क्यों न करें
सिर्फ ऊपरी घास तोड़ना जड़ें बची रहेंगी तो फिर उगेंगी
केमिकल वीड किलर गमलों में इसका प्रयोग पौधे को भी मार सकता है
बार-बार गीला रखना नम मिट्टी में घास तेज़ी से उगती है
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अमरूद के छोटे फल टूटकर गिरने से बचाने के उपाय

अमरूद के छोटे फल अगर पेड़ से टूटकर गिर रहे हैं तो यह “फल झड़ना” (Fruit Drop) की समस्या है। यह काफी आम है, खासकर गर्मी, वर्षा या फूल-से-फल बनने की शुरुआती अवस्था में। इसका कारण पोषण की कमी, पानी की अनियमितता, रोग या कीट हमला भी हो सकता है।

नीचे दिए हैं अमरूद के छोटे फलों को गिरने से बचाने के असरदार उपाय:


🟢 अमरूद के छोटे फल टूटकर गिरने से बचाने के उपाय

✅ 1. पोषक तत्वों की कमी पूरी करें (Nutrient Deficiency)

  • बोरॉन की कमी से फल झड़ते हैं।
    👉 उपाय:

    • 5 ग्राम बोरेक्स (Borax) या बोरिक एसिड प्रति लीटर पानी में घोलकर 15-20 दिन में छिड़कें।

  • जिंक और कैल्शियम की कमी से भी फल गिर सकते हैं।
    👉 जिंक सल्फेट और कैल्शियम नाइट्रेट का भी छिड़काव करें।

✅ 2. पानी सही मात्रा में दें

  • ज़्यादा पानी और लंबे समय तक सूखा — दोनों कारणों से फल गिरते हैं।

  • 👉 पेड़ के पास मिट्टी नम रखें लेकिन पानी जमा न हो।

  • खासकर फल बनने के समय नियमित सिंचाई ज़रूरी है।

✅ 3. फूलों और फलों पर कीट/रोग नियंत्रण करें

  • फूलों पर थ्रिप्स, सफ़ेद मक्खी, या फंगस का हमला हो तो फल गिर सकते हैं।

  • 👉 नीम का तेल (Neem oil) या जैविक कीटनाशक का 7-10 दिन पर छिड़काव करें।

  • अगर फंगस है तो कार्बेन्डाजिम या कॉपपर ऑक्सीक्लोराइड जैसे हल्के फफूंदनाशक का छिड़काव करें।

✅ 4. फूल/फल बनने के समय पेड़ को न हिलाएँ

  • हवा, जानवर या इंसानी छेड़छाड़ से भी कोमल फल गिरते हैं।

  • 👉 पेड़ के आसपास सुरक्षा करें, विशेषकर तेज हवा से बचाएँ।

✅ 5. हर साल सही छंटाई (प्रूनिंग) करें

  • बहुत घना पेड़ हवा और धूप नहीं ले पाता, जिससे फूल व फल झड़ सकते हैं।

  • 👉 हर साल जुलाई-अगस्त में हल्की छंटाई करें ताकि नई टहनियाँ निकलें और फूल अच्छी संख्या में आएँ।

✅ 6. रोगमुक्त और स्वस्थ पौधा बनाए रखें

  • कमजोर पौधा फल नहीं सँभाल पाता।
    👉 वर्मी कंपोस्ट, गोबर की खाद और 1-2 बार DAP (फूल-फल की अवस्था में) डालें।


⚠️ ध्यान दें:

समस्या समाधान
फल बनने के बाद गिरते हैं बोरोन और जिंक का छिड़काव करें
बहुत सारे फूल लगते हैं पर फल नहीं टिकते कीट व फंगस नियंत्रण करें
तेज बारिश या हवा में गिरते हैं शेड/सहारा दें या फलों को ढकें
फूल झड़ने के बाद फल नहीं बनते परागण की कमी हो सकती है – मधुमक्खी आकर्षित करें (गुड़/शक्कर का स्प्रे)

यह रहा एक असरदार और पूरी तरह प्राकृतिक घरेलू स्प्रे नुस्खा, जो अमरूद के छोटे फलों को गिरने से बचाने और पौधे को मज़बूत बनाने में मदद करता है:

Thai dwarf guava plant online home delivery
Thai dwarf guava plant online home delivery

🧴 घरेलू स्प्रे नुस्खा — फल झड़ने से बचाने के लिए

📝 सामग्री:

सामग्री मात्रा
नीम की पत्तियाँ (या नीम तेल) 1 मुट्ठी (या 5 ml नीम तेल)
लहसुन की कलियाँ 10-12
हरी मिर्च 3-4
दही (खट्टा) 2 चम्मच
हल्दी पाउडर 1 चम्मच
पानी 1 लीटर

🧪 बनाने की विधि:

  1. नीम पत्तियाँ, लहसुन और हरी मिर्च को मिक्सी में पीस लें। (अगर नीम तेल है, तो बाद में मिलाएँ)

  2. इस पेस्ट को 1 लीटर पानी में मिलाएँ।

  3. इसमें हल्दी और दही डालें और अच्छे से घोल लें।

  4. घोल को 24 घंटे ढँककर छाया में रखें (फर्मेंटेशन से असर बढ़ेगा)।

  5. फिर छान लें और स्प्रे बोतल में भर लें।


🌿 स्प्रे कैसे करें:

  • छांव में या सुबह/शाम पत्तों और छोटे फलों पर हल्का छिड़काव करें।

  • हर 7–10 दिन में एक बार करें, खासकर जब फल छोटे हों या फूल झड़ने के बाद फल बनने लगें।


यह स्प्रे क्या-क्या करता है?

असर कारण
फल झड़ने से बचाव पौधे को पोषण और रोगप्रतिरोधक शक्ति देता है
फंगस और कीट नियंत्रण नीम, हल्दी और लहसुन में एंटीफंगल व एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं
पौधा मज़बूत बनता है दही और नीम से पत्तियाँ हरी व स्वस्थ होती हैं

📌 सुझाव:

  • अगर मच्छर, चींटियाँ या फल मक्खियाँ ज़्यादा हैं, तो पास में गुड़ वाला ट्रैप भी लगाएँ।

  • पहली बार छिड़काव करने से पहले पौधे के एक हिस्से पर टेस्ट करें।

Thai dwarf Guava Plant for Home and Garden

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अमरूद के फलों में कीड़े लगने से बचाने के उपाय

अमरूद (Amrood / Guava) के फलों में कीड़े लगना आम समस्या है, खासकर जब फल पकने लगते हैं। सबसे ज़्यादा नुकसान “फ्रूट फ्लाई” (fruit fly) और अन्य कीटों से होता है जो फल को अंदर से सड़ा देते हैं।

यहाँ कुछ असरदार और प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं जिससे आप अमरूद के फलों को कीड़ों से बचा सकते हैं:


🐛 अमरूद के फलों में कीड़े लगने से बचाने के उपाय

1. 🟢 फल को ढकना (Fruit Bagging)

  • फल जब छोटे हों तभी उन पर पेपर बैग, कपड़े की थैली, या नेट बैग चढ़ा दें।

  • यह फल मक्खी और अन्य कीटों को फल में अंडे देने से रोकता है।

  • यह तरीका जैविक खेती में सबसे प्रभावी माना जाता है।

2. 🟤 नीम का छिड़काव (Neem Spray)

  • नीम का तेल (Neem oil) 5 ml प्रति लीटर पानी में मिलाकर 7–10 दिन के अंतराल पर छिड़कें।

  • यह एक जैविक कीटनाशक है और फल खाने योग्य भी रहता है।

3. 🍌 कीट-आकर्षक ट्रैप लगाएँ (Fruit Fly Trap)

  • बाजार में उपलब्ध मिथाइल युगेनॉल (Methyl eugenol) ट्रैप या बॉटल ट्रैप का प्रयोग करें।

  • आप खुद भी बॉटल ट्रैप बना सकते हैं:

    • एक प्लास्टिक की बोतल में मीठा फल, गुड़ या चीनी का घोल डालें।

    • बोतल के ढक्कन में छोटा छेद करें। मक्खियाँ अंदर जाएँगी और फँस जाएँगी।

4. 🌿 फलों को समय पर तोड़ना (Timely Harvesting)

  • जब फल हल्का पीला होने लगे, तब तोड़ लें। ज़्यादा देर पेड़ पर लगे रहने से कीट जल्दी अटैक करते हैं।

5. 🧹 गिरा हुआ फल तुरंत हटाएँ

  • पेड़ के नीचे गिरे फलों को तुरंत उठाकर नष्ट करें, क्योंकि वे कीटों की शरणस्थली बनते हैं।

6. ⚪ बोर्डो मिक्स या फफूंदनाशी का छिड़काव

  • अगर फंगल संक्रमण के कारण कीड़े आ रहे हों तो “बोर्डो मिक्सचर” का हल्का छिड़काव करें।

7. 🧴 लहसुन + मिर्च + नीम स्प्रे (घरेलू जैविक नुस्खा)

  • 10-12 लहसुन की कलियाँ, 4-5 हरी मिर्च और मुट्ठी भर नीम की पत्तियाँ पीसकर 1 लीटर पानी में मिलाएँ।

  • इसे 24 घंटे रखें, छानें और छिड़काव करें। यह कीटों को भगाने में मदद करता है।


⚠️ ध्यान रखने योग्य बातें:

क्या करें क्यों करें
जैविक छिड़काव सुबह या शाम करें गर्मी में पौधे को नुकसान से बचाने के लिए
फल का निरीक्षण नियमित करें कीट लगने की शुरुआत तुरंत पकड़ी जा सके
समय पर प्रूनिंग करें पेड़ की वेंटिलेशन ठीक रहे

Thai dwarf Guava Plant for Home and Garden

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बारिश में गमले के पौधों की देखभाल कैसे करें

बारिश के मौसम में गमले में लगे पौधों की देखभाल थोड़ी खास तरीके से करनी पड़ती है क्योंकि अधिक नमी, फंगस और जलभराव जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। यहाँ कुछ उपयोगी टिप्स दिए गए हैं:


🌧️ बारिश में गमले के पौधों की देखभाल कैसे करें

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1. जल निकासी (Drainage) का ध्यान रखें

  • गमले के नीचे छेद होना जरूरी है ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके।

  • अगर छेद बंद हो गया है तो उसे खोलें या नया गमला लें।

  • नीचे छोटे पत्थर या टूटी ईंटें रखें ताकि मिट्टी गीली न रहे।

2. गमले को शेड या छत के नीचे रखें

  • पौधों को बहुत ज्यादा बारिश से बचाएं। ज़्यादा पानी उनकी जड़ों को सड़ा सकता है।

  • हल्की बारिश से पौधों को फायदा होता है, लेकिन लगातार बारिश से उन्हें ढककर रखें।

3. फंगस और कीड़ों से बचाव

  • नमी ज्यादा होने से फफूंदी और कीड़े लग सकते हैं।

  • नीम का तेल (Neem oil) छिड़कें या जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें।

  • पत्तों पर सफेद या काली फंगस दिखे तो साफ कपड़े से पोंछें।

4. सही मिट्टी का उपयोग

  • मिट्टी में रेत या कोकोपीट मिलाएँ ताकि यह अच्छी तरह से पानी सोख सके और ड्रेनेज बेहतर हो।

  • भारी मिट्टी (clay) न लें, क्योंकि उसमें पानी रुकता है।

5. धूप की व्यवस्था

  • बारिश में अक्सर धूप कम होती है, ऐसे में पौधों को कभी-कभी 1-2 घंटे के लिए बाहर निकालें जब धूप निकले।

  • यदि संभव हो तो उन्हें ऐसी जगह रखें जहाँ थोड़ा-थोड़ा सूरज आता रहे।

6. कटाई-छंटाई (Pruning) करें

  • सूखी या सड़ी हुई टहनियों और पत्तों को काट दें ताकि पौधे स्वस्थ रहें।

  • इससे नया विकास भी अच्छा होता है।

7. उर्वरक का प्रयोग कम करें

  • मानसून में पौधों की वृद्धि कम हो सकती है, ऐसे में बहुत ज्यादा खाद न डालें।

  • अगर जरूरत हो तो जैविक खाद (compost) का हल्का उपयोग करें।

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अम्रपाली आम बोनसाई (गमले में)

🌿 गमले में अम्रपाली आम उगाने की संपूर्ण गाइड

By: Bonsai Plants Nursery
WhatsApp: 8299790172
Website: www.bonsaiplantsnursery.com


🥭 अम्रपाली आम बोनसाई (गमले में)

पौधे का परिचय:

  • किस्म: अम्रपाली आम (ड्वार्फ वैरायटी)
  • ऊँचाई: गमले में 4-5 फीट तक नियंत्रित
  • फल: छोटे आकार के, गहरे लाल-पीले रंग के, बहुत मीठे और रसीले
  • विशेषता: गमले में भी हर साल फल देता है

📸 फोटो विवरण:

  • घना गोलाकार पौधा, चमकदार गहरी हरी पत्तियाँ
  • गमला: 24 से 30 इंच का प्लास्टिक या मिट्टी का गमला
  • फल: गुच्छों में लगते हैं, पत्तियों के नीचे लटकते हुए दिखते हैं

🪴 गमले का चयन:

  • साइज: कम से कम 24-30 इंच चौड़ा और गहरा
  • मटेरियल: प्लास्टिक, फाइबर, सीमेंट या मिट्टी
  • ड्रेनेज होल ज़रूरी

🌱 मिट्टी का सही मिश्रण:

  • 40% बागवानी मिट्टी (Garden Soil)
  • 30% गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट
  • 20% रेत (Sand) – जल निकासी के लिए
  • 10% बोन मील या नीम खली – पोषण के लिए

💧 पानी देने का तरीका:

  • गर्मियों में: रोज हल्का पानी
  • सर्दियों में: सप्ताह में 2-3 बार
  • ध्यान रखें: पानी रुकना नहीं चाहिए

☀️ धूप:

  • प्रतिदिन 6-8 घंटे सीधी धूप आवश्यक
  • ज्यादा धूप से पत्तियाँ घनी और स्वस्थ रहती हैं

🧴 खाद और पोषण:

  • हर 30-40 दिन में गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालें
  • फल आने के समय पोटाश आधारित खाद दें

✂️ Pruning (कटाई-छंटाई):

  • साल में 1-2 बार हल्की छंटाई करें
  • सूखी, मरी हुई या बाहर की ओर बढ़ रही शाखाओं को काटें
  • इससे पौधा घना और छोटा रहता है

🦠 बीमारियों से बचाव:

  • फफूंदी से बचाव के लिए नीम का तेल स्प्रे करें
  • दीमक या चींटियों से बचाव के लिए मिट्टी में नीम खली डालें

🥭 फल जल्दी लाने के उपाय:

  • सिर्फ ग्राफ्टेड (कलम वाले) पौधे ही लगाएँ
  • समय पर Pruning करें
  • पोटाश युक्त खाद का उपयोग करें
  • रोज सुबह हल्की सिंचाई करें

 


📞 संपर्क करें:

Bonsai Plants Nursery
🌐 www.bonsaiplantsnursery.com
📲 WhatsApp: 8299790172


ध्यान दें:

इस गाइड का कोई भी हिस्सा आपके व्यवसाय में उपयोग किया जा सकता है। पौधों की देखभाल करने से घर में हरियाली और सुख-शांति आती है।

🌿 धन्यवाद। 🙏

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मियाज़ाकी आम की देखरेख और खेती कैसे करें – जानिए Japanese Miyazaki Mango (जापानी मियाज़ाकी आम) की खेती कैसे करें (भारत में)?

जापानी मियाज़ाकी आम एक दुर्लभ और महंगा आम की किस्म है, जिसे आमतौर पर “ताइयो नो तमागो” (Taiyo no Tamago) कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है “सूरज का अंडा”

Full Sun Exposure Miyazaki Mango Plant
Full Sun Exposure Miyazaki Mango Plant

यहाँ इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:


🌟 जापानी मियाज़ाकी आम की विशेषताएँ:

विशेषता विवरण
उत्पत्ति मियाज़ाकी प्रान्त, क्यूशू द्वीप, जापान
स्थानीय नाम タイヨウノタマゴ (Taiyo no Tamago)
प्रसिद्ध नाम मियाज़ाकी आम
स्वाद बहुत मीठा, रसीला, बिना रेशे के
रंग चमकदार गहरा लाल
वज़न हर आम का वजन लगभग 350 ग्राम या उससे अधिक
कीमत ₹15,000 से ₹2,50,000 प्रति जोड़ा आम (नीलामी में)
शुगर कंटेंट लगभग 15% से अधिक (बहुत मीठा)

🌱 कैसे उगाए जाते हैं?

  • इन्हें विशेष तकनीकों से उगाया जाता है जिसमें:

    • प्रत्येक फल को जाल में लटकाया जाता है ताकि वह अपने आप पेड़ से गिरे जब वह पूरी तरह पके।

    • हर फल को सूर्य की रोशनी बराबर मिले, इसके लिए घुमाया जाता है।

    • नियंत्रित वातावरण, नियमित निरीक्षण और उच्च देखभाल।


💎 इतना महंगा क्यों है?

  1. दुर्लभता: बहुत ही सीमित संख्या में उगते हैं।

  2. गुणवत्ता नियंत्रण: केवल सर्वोत्तम रंग, वजन और मिठास वाले आम ही “ताइयो नो तमागो” कहलाते हैं।

  3. उच्च देखरेख और समय: एक-एक फल पर महीनों ध्यान दिया जाता है।

  4. नीलामी संस्कृति: जापान में पहले आमों की नीलामी होती है जहाँ पहली बिक्री बेहद ऊँचे दाम पर होती है।


🇮🇳 भारत में क्या यह मिलता है?

  • हाँ, भारत में कुछ जगहों (जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र) में मियाज़ाकी आम की खेती शुरू हुई है।

  • लेकिन जापान जितनी गुणवत्ता और ब्रांड वैल्यू अभी नहीं है।

🚜 1. मियाज़ाकी आम की खेती कैसे करें (भारत में)?

✅ ज़रूरी बातें:

विषय विवरण
जलवायु गर्म और आर्द्र (humid) जलवायु, 30°C से 38°C तापमान
जगह 400 से 800 मीटर ऊँचाई वाले क्षेत्र बेहतर
मिट्टी अच्छी जल निकासी वाली, हल्की रेतीली-दोमट (pH 6.0-7.5)
पौधे की किस्म जापान से इम्पोर्टेड ग्राफ्टेड मियाज़ाकी पौधे
सिंचाई ड्रिप इरिगेशन प्रणाली सर्वोत्तम है
धूप का प्रबंधन हर फल को बराबर सूर्य प्रकाश देना होता है
सुरक्षा हर आम को जाल (mesh bags) में लटकाया जाता है

🧪 खर्च और समय:

  • 1 पौधा कीमत: ₹1,500 से ₹5,000

  • पहली फसल: 3-5 वर्षों में

  • औसत उत्पादन: 40-50 आम/पेड़ (पकने पर)

  • बिक्री मूल्य: ₹1,000 से ₹20,000+ प्रति आम (गुणवत्ता के अनुसार)


💼 2. मियाज़ाकी आम का बिज़नेस (खरीद-बेच या एक्सपोर्ट)

🌍 मांग कहाँ है?

  • भारत के हाई-एंड सुपरमार्केट (BigBasket, Nature’s Basket)

  • 5 स्टार होटल्स

  • विदेश (Japan, UAE, Singapore, UK)

📦 कैसे बेचें?

  • ऑनलाइन वेबसाइट, इंस्टाग्राम/Facebook मार्केटिंग

  • स्थानीय एग्रो मार्केट / लक्ज़री फलों की दुकान

  • Amazon/Flipkart/BigBasket जैसी साइट्स

📈 प्रॉफिट मार्जिन:

  • एक मियाज़ाकी आम ₹1,000–₹20,000 तक बिक सकता है

  • एक हेक्टेयर में 100–150 पेड़ लग सकते हैं

🌱 मियाज़ाकी आम की खेती कैसे करें (पूर्ण गाइड)


📍 1. जलवायु और स्थान

विषय जानकारी
तापमान 30°C से 38°C आदर्श है
नमी (Humidity) मध्यम से अधिक
धूप दिनभर सीधी धूप ज़रूरी है
स्थान मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल में अच्छे रिज़ल्ट

🧱 2. मिट्टी की तैयारी

विषय जानकारी
मिट्टी का प्रकार रेतीली-दोमट (Loamy), जल निकासी अच्छी होनी चाहिए
pH स्तर 6.0 से 7.5 के बीच
खाद/गोबर 10-15 किलो जैविक खाद प्रति गड्ढा

गड्ढा खुदाई:

  • 3×3 फीट का गड्ढा खोदें

  • 15 दिन धूप में खुला छोड़ें

  • फिर उसमें खाद, नीम खली, सड़ी हुई गोबर खाद भरें


🌱 3. पौधा लगाना

विषय जानकारी
प्रकार ग्राफ्टेड मियाज़ाकी आम पौधा (जापान मूल या भारतीय ग्राफ्टेड)
पौधा कीमत ₹1,000 से ₹5,000
वर्षा से बचाव रोपण जून–जुलाई या फरवरी–मार्च में करें
दूरी 12×12 फीट दूरी पर पौधे लगाएँ

💧 4. सिंचाई प्रणाली

प्रणाली विवरण
ड्रिप इरिगेशन सर्वोत्तम है – रोज़ 1-2 लीटर पानी
गर्मियों में सप्ताह में 2–3 बार
सर्दियों में सप्ताह में 1 बार

☀️ 5. धूप और देखभाल

  • हर आम को बराबर सूर्य की रोशनी मिले – इसके लिए शाखाओं को ट्रिम करें

  • पकते समय आम को जाल के थैलों (mesh bags) में लटकाया जाता है, ताकि यह गिर कर टूटे नहीं

  • फलों को बार-बार हाथ नहीं लगाना चाहिए


🦠 6. कीट और रोग नियंत्रण

रोग/कीट उपाय
पाउडरी मिल्ड्यू नीम का तेल या जैविक फफूंदनाशक
छाल कीड़े नीम-तेल स्प्रे
ज्यादा कीट होने पर जैविक दवाओं का छिड़काव (जैसे ट्राइकोडर्मा, बीटी बैसिलस)

🧺 7. फलन और कटाई

विषय विवरण
पहली फसल 3 से 5 साल बाद आती है
एक पेड़ से 30 से 50 आम
हर आम का वजन 350 ग्राम या अधिक
शुगर लेवल 15% से अधिक (बहुत मीठा)
कटाई खुद गिरने पर या रसपूर्ण पकने पर हाथ से तोड़ा जाता है

💰 8. बिक्री और मुनाफा

विषय विवरण
बाजार मूल्य ₹1,000 से ₹2,00,000 प्रति आम (गुणवत्ता पर निर्भर)
एक एकड़ में 80–100 पेड़
मुनाफा लाखों में, लेकिन समय और ब्रांडिंग की ज़रूरत

 

 

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हरिमन 99′ (Hariman 99) समर ज़ोन एप्पल से फल कैसे प्राप्त करें

गमले में ‘हरिमन 99′ (Hariman 99) समर ज़ोन एप्पल से फल कैसे प्राप्त करें – हिंदी में मार्गदर्शन
(Hariman 99 एक गर्म जलवायु में उगने वाला विशेष सेब का किस्म है जिसे पॉट में भी उगाया जा सकता है।)

 

hariman_99_summer_zone_apple_plant
hariman_99_summer_zone_apple_plant

🌱 1. सही गमला चुनें:

  • 20 से 24 इंच गहरा और चौड़ा गमला लें।
  • गमले में अच्छा ड्रेनेज होना जरूरी है ताकि पानी जमा न हो।

🌿 2. मिट्टी का मिश्रण:

  • 40% बगीचे की मिट्टी + 30% गोबर की खाद/वर्मी कम्पोस्ट + 20% रेत + 10% नीम की खली या कोकोपीट मिलाएं।
  • pH 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए।

☀️ 3. धूप की व्यवस्था:

  • यह सेब गर्म क्षेत्र के लिए है, लेकिन फिर भी इसे कम से कम 6-8 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए।

💧 4. सिंचाई (पानी देना):

  • गर्मी में नियमित, लेकिन गीली मिट्टी से बचें।
  • मिट्टी सूखने पर ही पानी दें, अतिरिक्त नमी जड़ों को नुकसान पहुँचा सकती है

🌸 5. फूल और फल लगने के समय देखभाल:

  • पौधे की उम्र कम से कम 1.5-2 साल होनी चाहिए फल आने के लिए।
  • जब कलियाँ दिखने लगें, तो फॉस्फोरस और पोटाश युक्त खाद (जैसे हड्डी की खाद + MOP) दें।

🪴 6. खाद देने का समय:

मौसम खाद
वसंत (Feb-Mar) गोबर की खाद + नीम खली + DAP
गर्मी (Apr-Jun) जल-धारण शक्ति बढ़ाने वाली जैविक खाद (जैसे कोकोपीट) + पोटाश
बरसात (Jul-Sep) वर्मी कम्पोस्ट + ट्राइकोडर्मा (फफूंदनाशक)
सर्दी (Oct-Dec) हड्डी की खाद + राख + हल्की कटाई

✂️ 7. छंटाई (प्रूनिंग):

  • हर साल दिसंबर–जनवरी में सूखी और भीड़ वाली शाखाएं काटें
  • इससे वेंटिलेशन और सूरज की रोशनी ठीक से मिलेगी, फल अच्छा आएगा।

🐛 8. रोग व कीट नियंत्रण:

  • नीम तेल, लहसुन-हरी मिर्च स्प्रे का छिड़काव करें।
  • पत्तों पर सफेद धब्बे या कीट दिखें तो जैविक कीटनाशक तुरंत लगाएं।

9. फल आने का समय:

  • अच्छे रखरखाव में यह पौधा 2 से 3 साल में फल देना शुरू कर सकता है।
  • फल आमतौर पर जून से अगस्त के बीच तैयार होते हैं (गर्म जलवायु क्षेत्रों में)।

अतिरिक्त सुझाव:

  • फूलों की संख्या ज्यादा हो तो कुछ कलियों को हटा दें — इससे बाकी फल बड़े और मीठे बनेंगे।
  • गमले को हर 2 साल में दोबारा मिट्टी मिलाकर रीपॉट करें

यह रहा हरिमन 99 (Hariman 99 Summer Zone Apple) पौधे की महीना-दर-महीना देखभाल कैलेंडर (पॉट में) — हिंदी में:


🌿 हरिमन 99 सेब पौधा – गमले में देखभाल कैलेंडर

महीना कार्य (Care Tips)
जनवरी (Jan) – पौधे की हल्की छंटाई करें (Dead branches हटाएँ) – जैविक फफूंदनाशक (Trichoderma) डालें – गोबर की खाद डालें
फ़रवरी (Feb) – फूलों की कली बनने लगती है – DAP + हड्डी की खाद + राख (wood ash) डालें – नियमित रूप से पानी दें, धूप में रखें
मार्च (Mar) – फूल खिलते हैं – फूल गिरने से बचाने के लिए नीम तेल या जैविक स्प्रे करें – फल बनने लगे तो पोटाश दें (MOP)
अप्रैल (Apr) – छोटे फल दिखने लगेंगे – जैविक खाद + पोटाश + नीम खली दें – पत्तियों पर कीट दिखें तो नीम स्प्रे करें
मई (May) – फल बढ़ने की अवस्था – पौधे को 2 दिन में एक बार पानी दें – गमले को ज्यादा गर्म धूप से बचाएँ (छाया दें)
जून (Jun) – फल पकने लगते हैं – गिरे हुए पत्ते/फल हटाएँ – यदि जरूरत हो तो थोड़ा पोटाश दें
जुलाई (Jul) – फल कटाई के बाद पौधे को आराम दें – वर्मी कम्पोस्ट डालें – हल्की सिंचाई करें, जलभराव से बचें
अगस्त (Aug) – नई शाखाएं निकलेंगी – 1-2 बार जैविक फफूंदनाशक + नीम खली दें – गमले की मिट्टी हल्की खोदाई करें
सितंबर (Sep) – पोषक पूर्ति हेतु गोबर की खाद + राख दें – पत्तों पर रोग/कीट न हो, निरीक्षण करें
अक्टूबर (Oct) – ठंडी शुरू होने से पहले पौधे की कटाई-छंटाई करें – ट्रेंचिंग (हल्का गड्ढा बनाकर खाद देना) करें
नवंबर (Nov) – नया विकास रुकने लगता है – कोई भारी खाद न दें – सिर्फ पानी और जैविक स्प्रे जारी रखें
दिसंबर (Dec) – पौधे को आराम की अवस्था में रखें – छंटाई की योजना बनाएं – जैविक मल्च डालें (सूखी पत्तियाँ या घास)

अतिरिक्त सुझाव:

  • हर 6 महीने में गमले की ऊपरी 2-3 इंच मिट्टी बदलें
  • हर 2-3 साल में पौधे को नए बड़े गमले में ट्रांसप्लांट करें
  • यदि फूल बहुत अधिक हों तो थिनिंग (कुछ फूल हटाना) करें, इससे फल बड़े और स्वादिष्ट बनते हैं।

Order Hariman 99 Summer Zone Apple Plant

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गमले में उगाए गए ताइवानी पिंक अमरूद (Taiwan Pink Guava) से बेहतरीन फल प्राप्त करने के उपाय

गमले में उगाए गए ताइवानी पिंक अमरूद (Taiwan Pink Guava) से बेहतरीन फल प्राप्त करने के उपाय (हिंदी में):

Taiwan pink guava live plant
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गमले में ताइवानी पिंक अमरूद का पौधा अच्छी तरह फल दे सकता है, अगर आप सही देखभाल करें। नीचे कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:


🌱 1. उपयुक्त गमला चुनें:

  • कम से कम 18-24 इंच गहरा और चौड़ा गमला इस्तेमाल करें।
  • मिट्टी से पानी अच्छे से निकल जाए, इसके लिए ड्रेनेज होल्स ज़रूर होने चाहिए।

🌿 2. मिट्टी का चयन:

  • दलदली मिट्टी नहीं होनी चाहिए।
  • अच्छे परिणाम के लिए 60% बगीचे की मिट्टी + 20% गोबर की खाद + 20% रेत या पर्लाइट मिलाएं।

☀️ 3. धूप की व्यवस्था:

  • पौधे को कम से कम 6-8 घंटे की सीधी धूप जरूर मिलनी चाहिए।

💧 4. सिंचाई (पानी देना):

  • गर्मियों में नियमित रूप से पानी दें, लेकिन पानी जमा न होने दें
  • सर्दियों में कम पानी दें – मिट्टी सूखने पर ही पानी दें।

🌸 5. फूल और फल के समय की देखभाल:

  • फूल आने पर पोटाश और फॉस्फोरस युक्त खाद (जैसे DAP या हड्डी की खाद) दें।
  • फूल झड़ने से रोकने के लिए जैविक फफूंदनाशक (जैसे नीम का तेल) का छिड़काव करें।

🪴 6. खाद देना:

  • हर 30-45 दिन में एक बार:
    • गोबर की खाद/वर्मीकम्पोस्ट
    • नीम की खली
    • हड्डी की खाद
  • फ्रूटिंग के समय पोटाश (MOP) और सिवेज स्लज/फूलों की खाद दें।

✂️ 7. छंटाई (प्रूनिंग):

  • हर साल सर्दियों में पुराने और सूखे टहनियों की छंटाई करें।
  • इससे नए और स्वस्थ टहनियाँ उगेंगी और ज्यादा फल आएंगे।

🐛 8. कीट नियंत्रण:

  • नीम तेल या साबुन पानी का स्प्रे हर 15 दिन में करें।
  • फल मक्खी, एफिड या स्केल इंसेक्ट से बचाने के लिए जैविक उपाय अपनाएं।

 

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Tips for Boosting fruiting in a potted

Boosting fruiting in a potted lemon plant requires a combination of proper care, the right nutrients, and optimal environmental conditions. Here’s a practical guide:

All season lemon plant for pot
All season lemon plant for pot

✅ 1. Choose the Right Pot and Soil

  • Pot size: At least 18–24 inches in diameter and with drainage holes.

  • Soil: Well-draining, slightly acidic soil (pH 5.5–6.5). A mix of potting soil, compost, and sand/perlite works well.


✅ 2. Sunlight

  • Lemon plants need 6–8 hours of direct sunlight daily.

  • If indoors, place near a south-facing window or use grow lights.


✅ 3. Watering

  • Keep soil consistently moist, but not soggy.

  • Water when the top inch of soil feels dry.

  • Avoid letting the pot sit in water.


✅ 4. Fertilizing (Key for Fruiting!)

Use a citrus-specific fertilizer high in phosphorus and potassium:

  • NPK ratio around 5-10-10 or 6-3-6.

  • Fertilize every 4–6 weeks during growing season (spring–summer).

  • Supplement with micronutrients like magnesium (Epsom salt), zinc, and iron if leaves yellow.

Homemade boost: Mix 1 tablespoon of Epsom salt in 1 gallon of water once a month.


✅ 5. Pruning and Pollination

  • Prune lightly to shape the plant and remove dead branches.

  • Promote airflow and sunlight penetration.

  • Hand pollinate flowers indoors using a small brush or cotton swab.


✅ 6. Stress the Plant Slightly

  • After flowering begins, slightly reduce water for a short time. Mild stress can encourage fruiting.


✅ 7. Pest and Disease Management

  • Watch for aphids, spider mites, and scale.

  • Use neem oil or insecticidal soap if needed.


✅ 8. Repot Every 2–3 Years

  • Refreshes soil and prevents root binding, which can affect fruit production.

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जानिए Japanese Miyazaki Mango (जापानी मियाज़ाकी आम) दुनिया के सबसे महंगे और अनोखे आमों के बारे में|

Japanese Miyazaki Mango (जापानी मियाज़ाकी आम) दुनिया के सबसे महंगे और अनोखे आमों में से एक है। इसे “Egg of the Sun” (सूरज का अंडा – Taiyo no Tamago) भी कहा जाता है।
यहाँ इस आम के बारे में कुछ खास बातें हैं:
🥭 Miyazaki Mango की खासियत:
उत्पत्ति: जापान के Miyazaki Prefecture में उगाया जाता है।
कीमत: एक जोड़ी आम की कीमत ₹2 लाख से ₹2.5 लाख तक हो सकती है!
रंग: गहरे लाल से बैंगनी रंग का होता है।
स्वाद: बेहद मीठा, जूसदार और रसीला। इसकी मिठास लगभग 15% Brix level (चीनी की मात्रा) तक हो सकती है।
वजन: एक आम का वजन लगभग 350-500 ग्राम या उससे ज्यादा होता है।
उगाने की प्रक्रिया: इसे नेट में लटकाकर उगाया जाता है ताकि धूप सभी तरफ से बराबर पड़े और फल परफेक्ट आकार में पके।
🌱 भारत में Miyazaki Mango:
भारत में कुछ किसानों ने इसकी खेती शुरू की है, खासकर मध्य प्रदेश (Jabalpur), उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में।
इसकी खेती में उच्च देखभाल, सुरक्षा, और मौसम की विशेष परिस्थितियों की जरूरत होती है।
शुरुआत में यह आम सिर्फ शोकेस और गिफ्टिंग के लिए उगाया गया था, लेकिन अब इसका व्यवसायिक उत्पादन बढ़ रहा है।
💰 क्यों इतना महंगा?
यह आम बहुत ही सीमित मात्रा में उगाया जाता है।
इसकी पैकिंग, ग्रेडिंग और प्रस्तुति लक्ज़री फ्रूट की तरह होती है।
जापान में ये आम अमीरों के तोहफे के रूप में इस्तेमाल होता है।
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अपराजिता के पौधे में ज्यादा फूल लाने का सरल तरीका

अगर आपके अपराजिता के पौधे में फूल नहीं आ रहे हैं या केवल या इक्का दुक्का फूल आ रहे हैं तो आप कुछ नुस्खों को अपना कर अपने अपराजिता को फूलों से भर सकते हैं।
आप अपने पौधे ने आधा चम्मच epsom salt को आधा लीटर पानी मे घोलकर छिडक़ाब कर सकते हैं, साथ ही शेष पानी को जड़ में डाल सकते हैं।
अथवा आप फिटकरी का एक टुकड़ा लीजिए इसे दो घंटे तक 1 लीटर पानी मे डाल कर रखिये फिर इस पानी को अपने अपराजिता के पौधे में डालिये।
पानी में  10 ग्राम

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मिलाकर डालने से सभी तरह के पौधों में  फल और फूल ज्यादा संख्या में और बड़े साइज़ के आते है।

याद रहे ये  कार्य आपको तभी करने हैं, जब आपके अपराजिता की मिट्टी एकदम सूखी हुई हो।
अपराजिता
अपराजिता
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हरसिंगर या पारिजात के पौधे को कटिंग से लगाने का सबसे सरल तरीका

पारिजात के पौधे को हरसिंगार भी कहा जाता है और यह बेहद पवित्र पौधा माना जाता है। नारंगी डंडी और खूबसूरत सफेद फूल को आपने कई जगहों पर देखा होगा, इसी फूल को हरसिंगार कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जिस घर में हरसिंगार का पौधा होता है, उस घर में माता लक्ष्मी का वास होता है।हरसिंगर या पारिजात के पौधे को कटिंग से आसानी से लगाया जा सकता है।

harsingar-parijaat plant home delivery
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हरसिंगार या पारिजात के पौधे की कटिंग लगाने का सही समय अक्टूबर का महीना होता है। पारिजात के पौधे की एक अच्छी 5-6 इंच लंबी शाखा लीजिए और इसके निचले छोर को 45° के कोण से काट लीजिये। नीचे से आधी दूरी तक के सारे पत्ते हटा दीजिये। यदि रूटिंग हार्मोन उपलब्ध है तो प्रयोग कीजिये अन्यथा प्याज का अर्क या एलोवेरा का जेल निचले तिरछे कटे हुए हिस्से पर लगा लीजिए, हैं तो वह कटिंग पर लगा सकते हैं, मिट्टी तैयार करने के लिए 40% मिट्टी, 30% वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद और 15% रेत और 15% कोको पीट या धान की भूसी को अच्छे से मिलाकर गमले में भरिए और कटिंग के लगभग आधे भाग को मिट्टी में दबकर और पानी डालकर गमले को ऐसे जगह पर रखिये जहां सुबह की हल्की धूप कुछ देर के लिए मिल सके तेज धूप से कटिंग को बचाकर रखिये। मिट्टी में लगातार नमी बनाये रखें, ज्यादा पानी देने से बचें। जड़ें निकलने में कम से कम 4 से 6 हफ्तों का समय लग सकता हैं, जब कटिंग में नई-नई पत्तियाँ निकलने लगें तो समझ जाये कि कटिंग लग गई हैं।

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कपूर के पौधे के वास्तु एवं ज्योतिषीय लाभ….

हम सभी अपने घर की पूजा में कपूर जलाते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि कपूर कहां से आता है? कैसा होता है इसका पौधा? क्या इस पौधे को घर में लगा सकते हैं, लगा लिया तो क्या फायदे होंगे?*
आजकल जो प्रचलित कपूर हम लाते हैं वह केमिकल्स के बने होते हैं। कपूर एक विशालकाय पेड़ से प्राप्त होते हैं जिनका चिकित्सकीय लाभ कमाल का होता है। केमिकल्स वाले कपूर में मेडिसिनल वैल्यू बहुत कम होती है। कपूर का पेड़ लंबे समय तक चलने वाला सदाबहार वृक्ष है।
इसका वृक्ष भारत, श्रीलंका, चीन, जापान, मलेशिया, कोरिया, ताइवान, इन्डोनेशिया आदि देशों में पाया जाता है। कपूर के पेड़ की लम्बाई 50 से 100 फीट तक होती है। इसके फूल, फल तथा पत्तियां सभी आकर्षक होते हैं। इसे सजावटी पेड़ के रुप में भी लोग अपनाते हैं। इसकी पत्तियां बड़ी, सुन्दर और लालिमा व हरापन लिए होती हैं। वसन्त ऋतु में इसमें छोटे-छोटे खुशबूदार फूल लगते हैं। इसके फल भी बड़े मोहक होते हैं।
कपूर के पेड़ की लकड़ियां फर्नीचर के काम में भी लाई जाती हैं। यह काफी मजबूत और टिकाऊ होती है। इसके पेड़ से प्राप्त लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर, तेज आंच पर उबाला जाता है फिर भाप और शीतलीकरण विधि से कपूर का निर्माण होता है। इससे अर्क और तेल भी बनाया जाता है, जिसका प्रयोग प्रसाधन एवं औषधि कार्यों में होता है।
आयुर्वेद, एलोपैथी और होमियोपैथी दवाइयों में भी कपूर का प्रयोग होता है। इसकी तासीर ठंडी है। कपूर और गाय के घी से काजल भी बनाया जाता है। यह आंखों के लिए बड़ा गुणकारी होता है।
कपूर के पौधे को हम अपने घर, बाहर, बगिया, गमले आदि कहीं भी किसी भी जगह पर लगा सकते हैं। कपूर का पौधा अच्छी सेहत का भंडार और वरदान है।
कपूर के पौधे के संपर्क में जो रहता है तो वह हमेशा स्वस्थ रहता है।
कपूर का पौधा पर्यावरण को शुद्ध करने में बहुत बड़ी मदद करता है।
कपूर का पौधा हमें प्राण वायु प्रदान करता है।
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कपूर का पौधा लगाने से घर से बीमारियां दूर हो जाती हैं।
कपूर का पौधा घर में लगाने से आसपास की सभी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती हैं।
कपूर का पौधा अपनी सुगंध से चारों ओर के वातावरण को खुशबूदार बना देता है।
कपूर का पौधा धन की आवक को आकर्षित करता है।
कपूर का पौधा रिश्तों में मिठास लाता है।
कपूर का पौधा घर में रखने से खुशियों का आगमन होता है।
कपूर का पौधा घर और घर के सदस्यों को नजर से बचाता है।
कपूर का पौधा घर में रखने से बुरी आत्माएं घर से दूर रहती हैं।
कपूर का पौधा घर के किसी भी कोने में रख सकते हैं यह पूरे घर के वास्तु दोष को हर लेता है।
घर के बाहर रख रहे हैं तो इसे प्रवेश की तरफ से द्वार के दाएं तरफ रखें।
कपूर का पौधा घर के मंदिर के आसपास भी रख सकते हैं। इससे पूजा का फल दो गुना हो जाता है।
कपूर का पौधा तरक्की लाता है सदस्यों के बीच की तकरार को खत्म करता है।
कपूर का पौधा सेहत के लिए तो अत्यंत फायदेमंद है ही मन और आध्यात्मिक शांति के लिए भी आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी है।