कनेर का पौधा अत्यन्त उपयोगी होता है। इसके द्वारा अनेक प्रकार के पयोगों को सम्पन्न किया जाता है।
कनेर के स्वरूप :
कनेर (सफेद कनेर ) का पौधा 5 फुट से लेकर 10 फुट तक ऊँचा होता है। इसके पत्ते -हरे रंग के, लम्बे और चिकने होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं।
कनेर के प्रकार :
कनेर अनेक प्रकार का होता है जैसे – सफेद कनेर (शवेत कनेर), लाल कनेर, गुलाबी कनेर, पीला कनेर, काला कनेर आदि। लेकिन सबसे ज्यादा सफेद कनेर ही देखने को मिलता है, अन्य प्रकार के कनेर आसानी से देखने को नहीं मिलते हैं। इसलिये आम बोल -चाल की भाषा में सफेद कनेर को ही कनेर कहकर पुकारा जाता है। कहने का मतलब यह है कि – अगर कहीं पर ‘कनेर’ शब्द का उल्लेख हो तो उसे ‘सफेद कनेर’ ही समझना चाहिये।
कनेर के गुण -धर्म :
इसका स्वाद कड़वा और विषैला होता है। इसका गुण -धर्म -गर्म और खुश्क होता है।
गणेश गई को प्रसन्न करने के लिये – ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री गणेश जी को लाल कनेर के फूल अत्यन्त प्रिय हैं। लाल कनेर को – रक्त कनेर, गणेश पर वह आदि नामों से भी पुकारते हैं। लाल कनेर का फूल न मिलने पर गुलाबी कनेर का प्रयोग करना चाहिये – इससे भी वही लाभ प्राप्त होता है।
कनेर का औषधीय प्रयोग :
कनेर का अनेक रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है जैसे – प्रमेह, कुष्ट रोग, फोड़ा, रक्त -विकार, बवासीर आदि। कनेर – घरों और बगीचों में सजावट के लिये लगाया जाता है।
कनेर अनेक प्रकार का होता है जैसे – सफेद कनेर (शवेत कनेर), लाल कनेर, गुलाबी कनेर, पीला कनेर, काला कनेर आदि। लेकिन सबसे ज्यादा सफेद कनेर ही देखने को मिलता है, अन्य प्रकार के कनेर आसानी से देखने को नहीं मिलते हैं। इसलिये आम बोल -चाल की भाषा में सफेद कनेर को ही कनेर कहकर पुकारा जाता है। कहने का मतलब यह है कि – अगर कहीं पर ‘कनेर’ शब्द का उल्लेख हो तो उसे ‘सफेद कनेर’ ही समझना चाहिये।
इसका स्वाद कड़वा और विषैला होता है। इसका गुण -धर्म -गर्म और खुश्क होता है।
गणेश गई को प्रसन्न करने के लिये – ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री गणेश जी को लाल कनेर के फूल अत्यन्त प्रिय हैं। लाल कनेर को – रक्त कनेर, गणेश पर वह आदि नामों से भी पुकारते हैं। लाल कनेर का फूल न मिलने पर गुलाबी कनेर का प्रयोग करना चाहिये – इससे भी वही लाभ प्राप्त होता है।
कनेर का अनेक रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है जैसे – प्रमेह, कुष्ट रोग, फोड़ा, रक्त -विकार, बवासीर आदि। कनेर – घरों और बगीचों में सजावट के लिये लगाया जाता है।
अशोक के पेड़ का सामान्य परिचय : अशोक का वृक्ष -हम हिन्दुओं में बहुत ही अधिक सम्मान प्राप्त है। प्रायः सभी शुभ अवसरों पर अशोक की पत्तियों को सुतली आदि की सहायता से गर के दरवाजों पर बाँधा जाता है – इस प्रकार से पत्तियों की तैयार लड़ियों को ‘बन्दनवार कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि -इनको बाँधने से घर में प्रवेश करने वाली वायु शुध्द हो जाती है और सभी प्रकार की बाधायें आदि बाहर ही रह जाती हैं -इससे शुभ कार्य बहुत अच्छी तरह से सम्पन्न होते हैं और उनमे किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं आती है।
अशोक के पेड़ का उत्पत्ति एवं प्राप्ति -स्थान : अशोक का वृक्ष प्रायः पूरे देश में पाया जाता है। वर्तमान समय में इसको -उद्यानों, मन्दिरों, विद्यालयों आदि में लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त, धनवान लोग ऐसे अपने घरों में भी लगाते हैं
अशोक के पेड़ के स्वरूप : यह एक सदाबहार वृक्ष होता है जो कि पूरे वर्षभर हरा -भरा बना रहता है। इसका तना एकदम सीधा होता है और पत्ते लम्बे व् नुकीले होते हैं वसन्त ऋतु में इस पर फूल आते हैं जो कि नारंगी -लाल रंग के और गुच्छेदार होते हैं।
अशोक के पेड़ के गुण -धर्म : यह कषाय, कटु, ग्राही है। यह बवासीर, दाह, अत्यधिक प्यास आदि रोगों को दूर करता है और त्वचा का रंग भी साफ करता है। यह स्त्रियों के विशेष रोगों जैसे – मासिक -धर्म से संबंधित विकार प्रदर, गर्भाशय की शिथिलता आदि को दूर करता है।
आशिक के पेड़ का औषधीय प्रयोग : स्त्री -रोगों के नाश के लिये -स्त्रियोंके प्रायः सभी विशिष्ट रोगों में अशोक बहुत ही लाभप्रद सिध्द होता है। अशोक के वृक्ष की छाल को उबालकर पीने से स्त्रियोंके रोग नष्ट होते हैं और उनका स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है।
गार्डनिंग करना एक शौक होता है और इसे सिर्फ शौकीन लोग ही करते हैं। भले ही उनके घर में जगह कम हो या ज्यादा, किसी न किसी तरह से घर में बगीचे के लिए जगह बना ही लेते है। उदाहरण के लिए – कुछ लोग छत पर गार्डनिंग शुरू कर देते हैं, कुछ लोग अपनी बालकनी में गार्डनिंग शुरू कर देते हैं, कुछ लोग हैंगिंग गार्डनिंग करते हैं और कुछ लोग अपने पसंदीदा पौधों को गमलों में लगाकर घर में रखते हैं। लेकिन ज्यादातर यह देखने को मिलता है कि अगर आप नए पौधों को लगाते हैं तो आपके काफी ज्यादा पैसे खर्च हो जाते हैं। जिस कारण से लोग ज्यादातर थोड़ी दूरी पर ही पौधे लगाना पसंद करते हैं। शायद आपके साथ भी ऐसा होता हो। अगर आप कम बजट में ही अपनी सुन्दर बगिया लगाना चाहते हैं तो आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है, क्योंकि आज आप कुछ ऐसे तरीकों के बारे में जानने वाले हैं, जिनका उपयोग करके आप जीरो बजट में ही गार्डनिंग शुरू कर सकते हैं।
बिना पैसों के बगीचे को सुन्दर कैसे बनायें।
हर कोई चाहता है कि उनका बगीचा हरा-भरा और खूबसूरत दिखे और हरा-भरा बगीचा मन को भी भाता है, लेकिन इसके लिए आपको बाजार से महंगे कंटेनर या प्लांटर लाने की जरुरत नहीं है। इसके लिए आप घर की पुरानी चीजों जैसे प्लास्टिक की बोतल, जूतों व टायर आदि को ही बतौर कंटेनर इस्तेमाल कर सकते हैं। इन चीजों को और खूबसूरत बनाने के लिए आप स्प्रे पेंटिंग कर सकते हैं और कई प्रकार के अलग – अलग तरीके के डिजाइन आदि बना सकते हैं ताकि आपका बगीचा पैसों के बिना भी खूबसूरत नजर आये।
मुफ्त में कैसे मिलेंगे पौधे
जब आप बगीचा लगवाते हैं तो आपको गमलों के साथ – साथ पौधों की भी जरुरत पड़ती है और मार्केट में एक सामान्य-सा पौधा 80 – 100 रुपये से कम में नहीं मिलता। ऐसे में अगर आप सात – आठ पौधे लगवाते हैं तो आपको अच्छे खासे पैसे खर्च करने पड़ जाते हैं। लेकिन वास्तव में आपको ऐसा करने की जरुरत नहीं है। अगर आप चाहें तो आपको मुफ्त में ही पौधे मिल जायेंगे। अगर आपके गार्डन एरिया में पहले से ही पौधे हैं तो ऐसे में आप उसे दो – तीन पौधे आसानी से बना सकते हैं। इसके लिए आपको पौधे को गमले से सावधानी पूर्वक निकलना होगा। अब आप खुर्ची की मदद से प्लांट को 2 – 3 हिस्सों में काट लें। हालाँकि, ध्यान रखें कि आप उसकी जड़ों को डिस्टर्ब न करें। इस तरह आप एक पौधे से दो – तीन पौधे तैयार कर सकते हैं। अब इन्हे अलग – अलग गमलों में मिटटी और कम्पोस्ट के मिश्रण में लगाएं।
पौधे की कटिंग कैसे करें।
मुफ्त में प्लांट्स तैयार करने का एक आसान तरीका यह भी है कि आप प्लांट से कटिंग तैयार करें और फिर उसे एक गमले में लगाएं। पौधों की कटिंग करना काफी आसान है। इसके लिए आप पहले पौधे का एक स्टेम कटर की मदद से काट लें। इस बात का ध्यान रखें कि आप कटिंग में मौजूद पत्तियों को हाथों से खींचकर ना तोड़ें, बल्कि कटर की मदद से ही काटें ताकि उसके साइड् में जो नई पत्तियां आएं, उन्हें नुकसान ना पहुँचे। अब आप कटिंग के एक सिरे पर रूट्स हार्मोन पाउडर को लगाकर उसे एक नए गमले में लगाएं। बस एक से डेढ़ महीने में आपका पौधा बढ़ना शुरू हो जायेगा।
आजकल लोगों को होम गार्डनिंग काफी पसंद आ रही है, कम स्पेस में ही कई तरह की सब्जियाँ, फल और फूल को आप अपने घर में ऊगा सकते हैं, जिसे किचेन गार्डन भी कहते हैं। सीधी बात कही जाये तो किचेन गार्डनिंग से आप स्वास्थ्य भी रहेंगे और पैसों की भी बचत होगी। मतलब घर में उगाई गयी सब्जियों को घर के किचेन में ही इस्तेमाल कर लीजिये। लेकिन कभी – कभी आपके गार्डन एरिया में कुछ ऐसे मेहमान आ जाते हैं, जो आपको बिल्कुल भी पसंद नहीं होते हैं, क्योंकि यह आपके पुरे पौधों को खराब कर देते हैं। अगर आप समय रहते इनका इलाज नहीं करेंगे तो यह आपके पूरे बगीचे को बर्बाद कर देंगे। आप कुछ नेचुरल चीजों की मदद से ही इन कीटों से छुटकारा पा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इनके बारे में।
मित्र कीटों से करें दोस्ती
जहाँ कुछ कीट आपके पौधों को नुकसान पहुँचाते हैं, वहीँ ऐसे कई कीट भी होते हैं, जो इन नुकसान पहुँचाने वाले कीटों को खा जाते हैं और आपके पौधों का ख्याल रखने में मदद करते हैं। आप कोशिश करें कि आप अपने गार्डन एरिया की व्यवस्था कुछ इस तरह करें, जिसकी मदद से मित्र कीट आपके गार्डन एरिया में आएं और आपके पौधों को स्वस्थ रखने में मदद करेंगे। एफिड, रेड माइट और कैटरपिलर आपके पौधों को नुकसान पहुँचाते हैं और इनसे बचाव के लिए आप लेडीबग बीटल व ड्रैगन फ्लाई को अपने गार्डन में आकर्षित करें। आमतौर पर, पौधे पर किसी तरह के केमिकल का छिड़काव करने से यह लेडीबग बीटल व ड्रैगन फ्लाई नहीं आते हैं और आपके पौधों को भी नुकसान पहुँचता है।
पौधों को सही तरह से पानी दें
अगर आप अपने पौधों में पानी देने का तरीका बदलते हैं तो आप आपने पौधों को कई प्रकार के कीटों से बचा सकते हैं। इसके लिए, आप अपने पौधे पर हाँथ फिरायें और नीचे से पानी का स्प्रे करें। ऐसा करने से ही अधिकांश कीट आपके पौधे से हट जायेंगे। इसके आलावा टूथब्रश और हेयरब्रश की मदद से भी आप अपने पौधों को कीट मुक्त रख सकते हैं।
कबूतर और गिलहरी से पायें छुटकारा
अगर आप किचेन गार्डनिंग करते हैं तो कबूतर और गिलहरी की समस्या होना आम बात है। इनसे छुटकारा पाना काफी मुश्किल होता है, हालाँकि आप नेचुरल तरीके को अपनाकर इससे भी निजात पा सकते हैं। अगर आप कबूतरों को गार्डन एरिया से दूर रखने के लिए आप झांड़ू की कुछ सीख लेकर उसे गमले के किनारे रोप दें। इसके आलावा, आप अपने किचन गार्डन को गिलहरी से बचाने के लिए गौमूत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप 10 – 20 ml गौमूत्र को एक लीटर पानी में डालकर मिक्स करें और उसे एक स्प्रे बोतल में भर दें। आप इस पानी से पौधे को अच्छी तरह स्प्रे करें। ऐसा करने से गिलहरी आपके पौधों के पास नहीं आएगी। हालाँकि इस बात का ध्यान रखें कि अगर गौमूत्र अधिक हो जाता है तो इससे पौधों के पत्ते जलने की संभावना रहती है।
नीम के पानी का प्रयोग
यह भी एक नेचुरल तरीका है अपने पौधों को कीटों से बचाने का। बस आपको इतना करना है कि आप रात में कुछ नीम की पत्तियाँ भिगों दें और अगली सुबह, आप उस पानी का छिड़काव अपने पौधों पर करें।
हींग का भी करें इस्तेमाल
हींग की महक कीटों को पौधों से दूर रखती है। इसका इस्तेमाल करना बेहद ही आसान है। बस आपको इतना करना है कि आप एक चुटकी हींग को एक गिलास पानी में डालें और उसे तीन – चार घंटो के लिए ऐसे ही रख दें। अब आप इस पानी को कपडे की मदद से छान लें और इसे भी एक स्प्रे बोतल में डालकर पौधों पर इसका छिड़काव करें।
गूलर के पेड़ का सामान्य परिचय : गूलर एक सर्वसुलभ वृक्ष है, जो कहीं भी देख जा सकता है।सामान्य जनता इसे बहुत ही साधारण और अनुपयोगी समझती है लेकिन सच्चाई तो यह है कि -यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी वृक्ष है।
गूलर के पेड़ के स्वरूप : यह भारी भरकम होता है। गूलर में झरबेरी के बराबर फल लगते हैं जो क्रमश : बढ़ते हुये नीबू के बराबर तक हो जाते हैं। ये फल कच्ची अवस्था में हरे और पकने पर लाल हो जाते हैं। पके फल -मीठे, पौष्टिक,ठण्डे और पाचक होते हैं लेकिन यहाँ पर सावधानी रखने की बात यह है कि -प्रायः छोटे -छोटे उड़ने वाले पतंगा (भुनगे )-गूलर के फलों में छेद करके अन्दर तक घुस जाते हैं और उसका रस चूसा करते हैं। अतः गूलर खाने वाले को यह सावधानी बरतनी पड़ती है कि वे छेददार फल न ले। कोई भी फल कहने के पहिले उसे तोड़कर भीतर भली -भाँति देख लें कि कहीं उसके अन्दर कोई पतंगा तो नहीं बैठा है। यदि पतंगा बैठा हुआ है तो उसे निकलकर फेंक दें और तब ही उस फल को खायें। कच्चे गूलर में पतिंगे नहीं होते हैं। बहुत से लोग कच्चे गूलर की पकौड़ी बनवाकर बड़े चाव से कहते हैं। गूलर के पेड़ के गुण- धर्म :
इसकी लकड़ी जल में सड़ती नहीं है, अतः कुँआ बावने वाले लोग ईंटों की दीवार खड़ी करने के पूर्व आधार रूप में नींव के स्थान पर गूलर की लकड़ी का एक गोल पहिया जैसा बिठा देते हैं -उसी के ऊपर ईंटें जमाकर गोलाकार दीवार खड़ी की जाती है। इस प्रकार नींव में गूलर की वह लकड़ी बहुत -बहुत लम्बे समय तक पानी में पड़ी रहने पर भी सड़ती नहीं है।
कनेर (सफेद कनेर ) का पौधा 5 फुट से लेकर 10 फुट तक ऊँचा होता है। इसके पत्ते -हरे रंग के, लम्बे और चिकने होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं।
कनेर के पौधे के प्रकार :
कनेर अनेक प्रकार का होता है जैसे – सफेद कनेर (शवेत कनेर), लाल कनेर, गुलाबी कनेर, पीला कनेर, काला कनेर आदि। लेकिन सबसे ज्यादा सफेद कनेर ही देखने को मिलता है, अन्य प्रकार के कनेर आसानी से देखने को नहीं मिलते हैं। इसलिये आम बोल -चाल की भाषा में सफेद कनेर को ही कनेर कहकर पुकारा जाता है। कहने का मतलब यह है कि – अगर कहीं पर ‘कनेर’ शब्द का उल्लेख हो तो उसे ‘सफेद कनेर’ ही समझना चाहिये।
कनेर के पौधे के गुण -धर्म :
इसका स्वाद कड़वा और विषैला होता है। इसका गुण -धर्म -गर्म और खुश्क होता है।
गणेश गई को प्रसन्न करने के लिये – ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री गणेश जी को लाल कनेर के फूल अत्यन्त प्रिय हैं। लाल कनेर को – रक्त कनेर, गणेश पर वह आदि नामों से भी पुकारते हैं। लाल कनेर का फूल न मिलने पर गुलाबी कनेर का प्रयोग करना चाहिये – इससे भी वही लाभ प्राप्त होता है।
j
कनेर के पौधे का औषधीय प्रयोग :
कनेर का अनेक रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है जैसे – प्रमेह, कुष्ट रोग, फोड़ा, रक्त -विकार, बवासीर आदि। कनेर – घरों और बगीचों में सजावट के लिये लगाया जाता है।
You can buy gift plants from our site Bonsaiplantsnursery.com. We Provide best quality plants through airplane shipping all over India. When you gift a plant to someone, you increase the number of plants in this world and the plant you will gift, when their eyes fall on that plant, you will be remembered and the most benefit from gifting plants is the environment. which will be beneficial for all. You indirectly help everyone by gifting a plant.
अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल पौधे का चयन करें।
आप सभी बोन्साई पेड़ों को एक जैसा बिल्कुल नहीं पाएंगे। हर प्रजाति के पौधों को बोन्साई नहीं बनाया जा सकता। बारामासी और यहाँ तक की उष्ण कटिबंधीय पौधों को बोन्साई पेड़ों में बनाया जा सकता है। किसी भी पौधे की प्रजाति का चयन करते समय यह जानना महत्वपूर्ण है कि वह पौधा उस स्थान की जलवायु के अनुकूल है। उदाहरण के लिए, कुछ पेंड ठंड के मौसम में मर जाते हैं क्योंकि वे पौधे अपने तापमान को बाहरी तापमान से नीचे नहीं गिरा पाते। जिस कारण से वे सूख जाते हैं। बोन्साई वृक्ष शुरू करने से पहले, सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा चुनी गयी प्रजाति आपके क्षेत्र में रह सकती है। अगर आपको इस बारे में जानकारी नहीं है तो आप अपने स्थानीय उद्यान आपूर्ति स्टोर के कर्मचारी आपकी सहायता कर सकेंगे।
बोन्साई पेंड की शुरुआत जुनिपर किस्म के पौधे पर करना अनुकूल रहता है। ये सदाबहार कठोर होते हैं। जुनिपर के पौधे पूरे उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध के अधिक समशीतोष्ण क्षेत्रों में भी जीवित रहते हैं। इसके अलावा, जुनिपर के पेड़ों को उठाना आसान होता है। उनकी कटाई – छंटाई भी आसान होती है। ये पौधे अपनी पत्तियाँ कभी नहीं खोते क्योंकि ये सदाबहार होते हैं और धीमी गति से बढ़ते हैं।
इनडोर या आउटडोर तय करना जरुरी।
इनडोर और आउटडोर बोन्साई पेड़ों की जरूरतें काफी भिन्न हो सकती हैं। आमतौर पर, इनडोर वातावरण शुष्क होते हैं और बाहरी वातावरण की तुलना में कम रोशनी भी प्राप्त करते हैं। इसीलिए आपको कम रोशनी और नमी की आवश्यकता वाले पेंड चुनने चाहिए। नीचे बोन्साई पेंड की कुछ आम किस्मों को सूचीबद्ध किया गया है, जिन्हे इंडोर या बाहरी वातावरण के लिए उपयुक्त माना गया है।
नोट : समशीतोष्ण प्रजातियों को शीतकालीन निष्क्रियता की आवश्यकता होती है या पेड़ अंततः मर जाएगा। इन्हें लंबे समय तक घर के अंदर नहीं उगाया जा सकता है।
अपने बोन्साई वृक्ष का आकार चुनना
बोन्साई के पेड़ों का आकार कई प्रकार का होता है। पूर्ण विकसित पेंड 6 इंच से लेकर 3 फीट तक लम्बे हो सकते हैं। यदि आप अपने बोन्साई पेंड को एक अंकुर या दूसरे पेंड से काटकर उगाना चाह रहे हैं तो ये और भी छोटे से शुरू कर सकते हैं। बड़े पौधों को अधिक पानी, मिटटी और धूप की आवश्यकता होती है।
अपने बोन्साई पेंड के आकार का निर्णय लेते समय बस कुछ बातों का ध्यान देना चाहिए :
आप जिस कंटेनर का उपयोग कर रहे हैं उसका आकार
आपके घर या ऑफिस में जो जगह उपलब्ध है
आपके घर या कार्यालय में सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता
आप अपने पेड़ की कितनी देखभाल कर पाएंगे (बड़े पेड़ों को छँटाई में अधिक समय लगता है)
एक बार जब आपने तय कर लिया कि आप किस प्रकार का और किस आकार का बोनसाई चाहते हैं, तो आप नर्सरी या बोन्साई की दुकान पर जा सकते हैं और उस पौधे का चयन कर सकते हैं जो आपका बोन्साई वृक्ष बनेगा। एक पौधा चुनते समय यह सुनिश्चित कर लें कि पौधे की पत्तियाँ हरी हो हालांकि पतझड़ के मौसम में अलग -अलग रंग के पत्ते हो सकते हैं। अंत में जब एक स्वास्थ्य और सुन्दर पौधे का चयन हो जाये तो कल्पना करें की यह पौधा काटने के बाद कैसा दिखेगा। एक बोन्साई पेंड को उगाने का मजा उसे धीरे – धीरे काटने और उसे आकार देने में आता है। इस काम में आपको सालों भी लग सकते हैं। एक ऐसे पेंड का चयन करें जिसका आकार आपके मन के अनुकूल हो।
ध्यान दें कि यदि आप अपने बोन्साई पेंड को बीज से उगाना चाहते हैं, तो आपको अपने पेंड की बहुत अधिक देखभाल करनी होगी। हालाँकि, एक बोन्साई पेंड को एक बीज से एक पूर्ण पेंड में विकसित होने में लगभग 5 साल तक का समय लग सकता है। यदि आप अपने पेंड को तुरंत काटने और आकार देने में रूचि रखते हैं तो आपके लिए एक बड़ा पौधा खरीदना बेहतर होगा।
आपके पास एक और विकल्प है कि आप अपने बोन्साई पेंड को काटकर उगाएं। किसी पौधे को बोन्साई में बदलने का यह उत्तम तरीका है।
सही गमले का चयन करें।
बोन्साई के पेड़ों की विशेषता यह है कि उन्हें ऐसे गमले में लगाया जाये जिसमें उनके विकास की गति धीमी हो सके। बोन्साई के पेड़ों को ऐसे गमलों में उगाना चाहिए जिनका गोलार्ध बड़ा हो और गहराई कम हो। गमले का आकार आपके पौधे के आकार पर निर्भर करेगा। यह सुनिश्चित कर लें कि उस पौधे की जड़ें उस गमले में सुरक्षित पूरी तरह मिटटी से ढक जाये। जब आप अपने पेड़ों को पानी देते हैं तो उनकी जड़ें मिटटी से पानी को अवशोषित करती हैं। गमले में मिटटी इतनी मात्रा में तो होनी चाहिए की वह पौधे के लिए नमी बरकरार रख सके। जड़ को सड़ने से रोकने के लिए आप गमले की तली में छोटे – छोटे छेद कर सकते हैं। जो पानी का संतुलन बनाये रखेंगे।
आपका गमला इतना बड़ा होना चाहिए की आपके पेंड को सहारा दे सके। अत्यधिक बड़े बर्तन आपके पेंड को स्वयं बौना बना देते हैं। जो एक पौधे को विचित्र या बेमेल रूप दे सकते हैं।
कुछ लोग अपने बोन्साई पेंड को सादे, व्यावहारिक कंटेनरों में उगाना पसंद करते हैं, फिर जब वे बड़े हो जाते हैं तो उन्हें सुन्दर कंटेनरों में स्थानांतरित कर देते हैं। यह एक बहुत ही उपयोगी प्रक्रिया है। यदि बोन्साई पेंड की आपकी प्रजाति नाजुक है तो इसे आप तब तक किसी दूसरे गमले में स्थानांतरित नहीं कर सकते जबतक कि आपका पेंड स्वास्थ्य, सुन्दर और मजबूत न हो जाये।
गमले में बोन्साई पेंड तैयार करना।
How to prepare bonsai live plant
पौधा तैयार करें
यदि आपने जल्दी ही आपके नजदीकी नर्सरी से या ऑनलाइन नर्सरी से बोन्साई का पेंड खरीदा है और वह किसी ऐसे प्लास्टिक कंटेनर में आया है जो आपको शायद पसंद नहीं है या फिर आप उसे किसी दूसरे सुन्दर गमले में करना चाहते हैं। या फिर आप अपना खुद का बोन्साई पेंड ऊगा रहे हैं और अंत में इसे सही गमले में रखना चाहते हैं, तो आपको इसे ट्रांसप्लांट करने से पहले तैयार करना होगा। सबसे पहले यह सुनिश्चित करें की आपका पेंड आपकी इच्छानुसार कटा है या नहीं। जब आप अपने पौधे को किसी पॉट में लगा देते हैं तो उसके बाद आप अपने पेंड को मजबूत तार के माध्यम से उसकी शाखाओं को बांध कर या मोड़ कर मनचाहे आकार में ढाल सकते हैं।
जान लें कि मौसमी जीवन चक्र वाले पेंड ( उदहारण के लिए कई पर्णपाती पेंड ) वसंत ऋतु में सबसे अच्छे तरीके से प्रत्यारोपित किए जाते हैं। वसंत ऋतू में कई पौधे बढ़ते तापमान के कारण वृद्धि की स्थिति में प्रवेश कर जाते हैं। लेकिन जब इनकी शाखाओं और जड़ों की छंटाई की जाती है तो इनकी वृद्धि संतुलन में आ जाती है।
जब आप पुनः रिपोटिंग करने की सोंच रहें हो तो पौधे में पानी डालने की मात्रा को कम कर दे। गीली मिटटी के मुकाबले सूखी मिटटी में काम करना आसान होता है।
पौधे को निकालें और जड़ों को साफ करें।
सबसे पहले आपको सावधानी पूर्वक गमले से पौधे को निकालना है ध्यान रहे जड़ें टूटनी नहीं चाहिए खासकर मुख्य जड़। आप पोटिंग टूल का उपयोग करके पौधे को आसानी से गमले से बहुत आसानी से बाहर निकल आएगा। पौधे को बोन्साई पॉट में डालने से पहले उसकी अधिकांश जड़ों को काट दें। जड़ों को स्पष्ट रूप से देखने के लिए, उन पर चिपकी गंदगी को साफ करना आवश्यक है। पौधे की जड़ों को साफ करने के लिए रुट रेक, चॉपस्टिक, चिमटी और इसी तरह के उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं।
जड़ों को पूरी तरह से साफ नहीं करना है – बस इतना साफ करें कि आप देख सकें कि आप उन्हें काटते समय क्या कर रहे हैं।
जड़ों को सही प्रकार से छाँटे :- अगर आपने अपने बोन्साई के पेड़ों की जड़ों को नियंत्रित नहीं किया तो आपको कुछ ही समय बाद उनको किसी दूसरे बड़े गमले में स्थानांतरित करना पड़ सकता है। अपने बोन्साई के पेंड की जड़ों को नियंत्रित करने के लिए उन्हें काट लें। जो पतली जड़ें मिटटी की सतह पर अपना जाल बना कर मिटटी में अपनी जकड़ बनाती हैं उन्हें छोड़कर, किसी भी बड़ी, मोटी जड़ को और ऊपर की ओर जानें वाली जड़ों को काट लें। जड़ें पानी को अपनी युक्तियों से अवशोषित करती हैं, इसीलिए एक छोटे कंटेनर में, कई पतली जड़ वाली किस्में आमतौर पर एक बड़े, गहरे गमले में अच्छे से ग्रोथ करता है।
गमले को तैयार करें :- पौधे को गमले में रखने से पहले, देख लें की उसकी तली साफ है या नहीं और गमले में मिटटी पौधे की ऊँचाई के हिसाब से होनी चाहिए। खाली गमले की तली में कंकड़ीली मिटटी की एक पतली परत बिछा दें। ऐसी मिटटी या माध्यम का उपयोग करें जिसमें पानी का बहाव अच्छा हो, बगीचे की मिटटी पानी को अधिक समय तक रोकती है जोकि जड़ों को सड़ा सकता है। गमले के ऊपरी भाग में 1 – 2 इंच की खाली जगह रखनी चाहिए। जिससे पौधे की जड़ों को ढका जा सके।
यदि आपका पेड़ आपके नए बर्तन में सीधा नहीं रह रहा है, तो बर्तन के नीचे से जल निकासी छेद के माध्यम से बर्तन के नीचे से एक भारी गेज तार चलाएं। पौधे को जगह पर रखने के लिए जड़ प्रणाली के चारों ओर तार बांधें।
आप मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बर्तन के जल निकासी छेद पर जाल स्क्रीन स्थापित करना चाह सकते हैं, जो तब होता है जब पानी जल निकासी छेद के माध्यम से मिट्टी को बर्तन से बाहर निकालता है।
अपने बोन्साई पौधे की देखभाल करें
आपका नया पेंड अभी तक एक बहुत दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरा है। अपने पेंड को दोबारा लगाने के बाद 2 – 3 सप्ताह के लिए इसे छायादार जगह पर ही रखें। पौधे को पानी दें लेकिन उर्वरक का उपयोग न करें, जब तक कि जड़ें खुद को स्थापित न कर लें। पुनः पोटिंग के बाद आप अपने पेंड को घर में रहने के अनुकूल बनायें और समय के साथ बढ़ने दें।
जब आपका बोन्साई पेंड स्थापित हो जाये तो आप उसके गमले में अन्य छोटे – छोटे पौधे लगा सकते हैं। यदि उन पौधों को सुव्यवस्थित ढंग से लगाया जाये तो उनको एक झाँकी के रूप में तैयार किया जा सकता है। उन पौधों का चयन करें जो आपके बोन्साई पौधे के समान क्षेत्र के मूल निवासी हो। ताकि एक पानी और हल्का आहार गमले में सभी पौधों को समान रूप से अच्छी तरह से सहारा दे सके।