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अमरूद के फलों में कीड़े लगने से बचाने के उपाय

अमरूद (Amrood / Guava) के फलों में कीड़े लगना आम समस्या है, खासकर जब फल पकने लगते हैं। सबसे ज़्यादा नुकसान “फ्रूट फ्लाई” (fruit fly) और अन्य कीटों से होता है जो फल को अंदर से सड़ा देते हैं।

यहाँ कुछ असरदार और प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं जिससे आप अमरूद के फलों को कीड़ों से बचा सकते हैं:


🐛 अमरूद के फलों में कीड़े लगने से बचाने के उपाय

1. 🟢 फल को ढकना (Fruit Bagging)

  • फल जब छोटे हों तभी उन पर पेपर बैग, कपड़े की थैली, या नेट बैग चढ़ा दें।

  • यह फल मक्खी और अन्य कीटों को फल में अंडे देने से रोकता है।

  • यह तरीका जैविक खेती में सबसे प्रभावी माना जाता है।

2. 🟤 नीम का छिड़काव (Neem Spray)

  • नीम का तेल (Neem oil) 5 ml प्रति लीटर पानी में मिलाकर 7–10 दिन के अंतराल पर छिड़कें।

  • यह एक जैविक कीटनाशक है और फल खाने योग्य भी रहता है।

3. 🍌 कीट-आकर्षक ट्रैप लगाएँ (Fruit Fly Trap)

  • बाजार में उपलब्ध मिथाइल युगेनॉल (Methyl eugenol) ट्रैप या बॉटल ट्रैप का प्रयोग करें।

  • आप खुद भी बॉटल ट्रैप बना सकते हैं:

    • एक प्लास्टिक की बोतल में मीठा फल, गुड़ या चीनी का घोल डालें।

    • बोतल के ढक्कन में छोटा छेद करें। मक्खियाँ अंदर जाएँगी और फँस जाएँगी।

4. 🌿 फलों को समय पर तोड़ना (Timely Harvesting)

  • जब फल हल्का पीला होने लगे, तब तोड़ लें। ज़्यादा देर पेड़ पर लगे रहने से कीट जल्दी अटैक करते हैं।

5. 🧹 गिरा हुआ फल तुरंत हटाएँ

  • पेड़ के नीचे गिरे फलों को तुरंत उठाकर नष्ट करें, क्योंकि वे कीटों की शरणस्थली बनते हैं।

6. ⚪ बोर्डो मिक्स या फफूंदनाशी का छिड़काव

  • अगर फंगल संक्रमण के कारण कीड़े आ रहे हों तो “बोर्डो मिक्सचर” का हल्का छिड़काव करें।

7. 🧴 लहसुन + मिर्च + नीम स्प्रे (घरेलू जैविक नुस्खा)

  • 10-12 लहसुन की कलियाँ, 4-5 हरी मिर्च और मुट्ठी भर नीम की पत्तियाँ पीसकर 1 लीटर पानी में मिलाएँ।

  • इसे 24 घंटे रखें, छानें और छिड़काव करें। यह कीटों को भगाने में मदद करता है।


⚠️ ध्यान रखने योग्य बातें:

क्या करें क्यों करें
जैविक छिड़काव सुबह या शाम करें गर्मी में पौधे को नुकसान से बचाने के लिए
फल का निरीक्षण नियमित करें कीट लगने की शुरुआत तुरंत पकड़ी जा सके
समय पर प्रूनिंग करें पेड़ की वेंटिलेशन ठीक रहे

Thai dwarf Guava Plant for Home and Garden

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अम्रपाली आम बोनसाई (गमले में)

🌿 गमले में अम्रपाली आम उगाने की संपूर्ण गाइड

By: Bonsai Plants Nursery
WhatsApp: 8299790172
Website: www.bonsaiplantsnursery.com


🥭 अम्रपाली आम बोनसाई (गमले में)

पौधे का परिचय:

  • किस्म: अम्रपाली आम (ड्वार्फ वैरायटी)
  • ऊँचाई: गमले में 4-5 फीट तक नियंत्रित
  • फल: छोटे आकार के, गहरे लाल-पीले रंग के, बहुत मीठे और रसीले
  • विशेषता: गमले में भी हर साल फल देता है

📸 फोटो विवरण:

  • घना गोलाकार पौधा, चमकदार गहरी हरी पत्तियाँ
  • गमला: 24 से 30 इंच का प्लास्टिक या मिट्टी का गमला
  • फल: गुच्छों में लगते हैं, पत्तियों के नीचे लटकते हुए दिखते हैं

🪴 गमले का चयन:

  • साइज: कम से कम 24-30 इंच चौड़ा और गहरा
  • मटेरियल: प्लास्टिक, फाइबर, सीमेंट या मिट्टी
  • ड्रेनेज होल ज़रूरी

🌱 मिट्टी का सही मिश्रण:

  • 40% बागवानी मिट्टी (Garden Soil)
  • 30% गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट
  • 20% रेत (Sand) – जल निकासी के लिए
  • 10% बोन मील या नीम खली – पोषण के लिए

💧 पानी देने का तरीका:

  • गर्मियों में: रोज हल्का पानी
  • सर्दियों में: सप्ताह में 2-3 बार
  • ध्यान रखें: पानी रुकना नहीं चाहिए

☀️ धूप:

  • प्रतिदिन 6-8 घंटे सीधी धूप आवश्यक
  • ज्यादा धूप से पत्तियाँ घनी और स्वस्थ रहती हैं

🧴 खाद और पोषण:

  • हर 30-40 दिन में गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालें
  • फल आने के समय पोटाश आधारित खाद दें

✂️ Pruning (कटाई-छंटाई):

  • साल में 1-2 बार हल्की छंटाई करें
  • सूखी, मरी हुई या बाहर की ओर बढ़ रही शाखाओं को काटें
  • इससे पौधा घना और छोटा रहता है

🦠 बीमारियों से बचाव:

  • फफूंदी से बचाव के लिए नीम का तेल स्प्रे करें
  • दीमक या चींटियों से बचाव के लिए मिट्टी में नीम खली डालें

🥭 फल जल्दी लाने के उपाय:

  • सिर्फ ग्राफ्टेड (कलम वाले) पौधे ही लगाएँ
  • समय पर Pruning करें
  • पोटाश युक्त खाद का उपयोग करें
  • रोज सुबह हल्की सिंचाई करें

 


📞 संपर्क करें:

Bonsai Plants Nursery
🌐 www.bonsaiplantsnursery.com
📲 WhatsApp: 8299790172


ध्यान दें:

इस गाइड का कोई भी हिस्सा आपके व्यवसाय में उपयोग किया जा सकता है। पौधों की देखभाल करने से घर में हरियाली और सुख-शांति आती है।

🌿 धन्यवाद। 🙏

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मियाज़ाकी आम की देखरेख और खेती कैसे करें – जानिए Japanese Miyazaki Mango (जापानी मियाज़ाकी आम) की खेती कैसे करें (भारत में)?

जापानी मियाज़ाकी आम एक दुर्लभ और महंगा आम की किस्म है, जिसे आमतौर पर “ताइयो नो तमागो” (Taiyo no Tamago) कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है “सूरज का अंडा”

Full Sun Exposure Miyazaki Mango Plant
Full Sun Exposure Miyazaki Mango Plant

यहाँ इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:


🌟 जापानी मियाज़ाकी आम की विशेषताएँ:

विशेषता विवरण
उत्पत्ति मियाज़ाकी प्रान्त, क्यूशू द्वीप, जापान
स्थानीय नाम タイヨウノタマゴ (Taiyo no Tamago)
प्रसिद्ध नाम मियाज़ाकी आम
स्वाद बहुत मीठा, रसीला, बिना रेशे के
रंग चमकदार गहरा लाल
वज़न हर आम का वजन लगभग 350 ग्राम या उससे अधिक
कीमत ₹15,000 से ₹2,50,000 प्रति जोड़ा आम (नीलामी में)
शुगर कंटेंट लगभग 15% से अधिक (बहुत मीठा)

🌱 कैसे उगाए जाते हैं?

  • इन्हें विशेष तकनीकों से उगाया जाता है जिसमें:

    • प्रत्येक फल को जाल में लटकाया जाता है ताकि वह अपने आप पेड़ से गिरे जब वह पूरी तरह पके।

    • हर फल को सूर्य की रोशनी बराबर मिले, इसके लिए घुमाया जाता है।

    • नियंत्रित वातावरण, नियमित निरीक्षण और उच्च देखभाल।


💎 इतना महंगा क्यों है?

  1. दुर्लभता: बहुत ही सीमित संख्या में उगते हैं।

  2. गुणवत्ता नियंत्रण: केवल सर्वोत्तम रंग, वजन और मिठास वाले आम ही “ताइयो नो तमागो” कहलाते हैं।

  3. उच्च देखरेख और समय: एक-एक फल पर महीनों ध्यान दिया जाता है।

  4. नीलामी संस्कृति: जापान में पहले आमों की नीलामी होती है जहाँ पहली बिक्री बेहद ऊँचे दाम पर होती है।


🇮🇳 भारत में क्या यह मिलता है?

  • हाँ, भारत में कुछ जगहों (जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र) में मियाज़ाकी आम की खेती शुरू हुई है।

  • लेकिन जापान जितनी गुणवत्ता और ब्रांड वैल्यू अभी नहीं है।

🚜 1. मियाज़ाकी आम की खेती कैसे करें (भारत में)?

✅ ज़रूरी बातें:

विषय विवरण
जलवायु गर्म और आर्द्र (humid) जलवायु, 30°C से 38°C तापमान
जगह 400 से 800 मीटर ऊँचाई वाले क्षेत्र बेहतर
मिट्टी अच्छी जल निकासी वाली, हल्की रेतीली-दोमट (pH 6.0-7.5)
पौधे की किस्म जापान से इम्पोर्टेड ग्राफ्टेड मियाज़ाकी पौधे
सिंचाई ड्रिप इरिगेशन प्रणाली सर्वोत्तम है
धूप का प्रबंधन हर फल को बराबर सूर्य प्रकाश देना होता है
सुरक्षा हर आम को जाल (mesh bags) में लटकाया जाता है

🧪 खर्च और समय:

  • 1 पौधा कीमत: ₹1,500 से ₹5,000

  • पहली फसल: 3-5 वर्षों में

  • औसत उत्पादन: 40-50 आम/पेड़ (पकने पर)

  • बिक्री मूल्य: ₹1,000 से ₹20,000+ प्रति आम (गुणवत्ता के अनुसार)


💼 2. मियाज़ाकी आम का बिज़नेस (खरीद-बेच या एक्सपोर्ट)

🌍 मांग कहाँ है?

  • भारत के हाई-एंड सुपरमार्केट (BigBasket, Nature’s Basket)

  • 5 स्टार होटल्स

  • विदेश (Japan, UAE, Singapore, UK)

📦 कैसे बेचें?

  • ऑनलाइन वेबसाइट, इंस्टाग्राम/Facebook मार्केटिंग

  • स्थानीय एग्रो मार्केट / लक्ज़री फलों की दुकान

  • Amazon/Flipkart/BigBasket जैसी साइट्स

📈 प्रॉफिट मार्जिन:

  • एक मियाज़ाकी आम ₹1,000–₹20,000 तक बिक सकता है

  • एक हेक्टेयर में 100–150 पेड़ लग सकते हैं

🌱 मियाज़ाकी आम की खेती कैसे करें (पूर्ण गाइड)


📍 1. जलवायु और स्थान

विषय जानकारी
तापमान 30°C से 38°C आदर्श है
नमी (Humidity) मध्यम से अधिक
धूप दिनभर सीधी धूप ज़रूरी है
स्थान मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल में अच्छे रिज़ल्ट

🧱 2. मिट्टी की तैयारी

विषय जानकारी
मिट्टी का प्रकार रेतीली-दोमट (Loamy), जल निकासी अच्छी होनी चाहिए
pH स्तर 6.0 से 7.5 के बीच
खाद/गोबर 10-15 किलो जैविक खाद प्रति गड्ढा

गड्ढा खुदाई:

  • 3×3 फीट का गड्ढा खोदें

  • 15 दिन धूप में खुला छोड़ें

  • फिर उसमें खाद, नीम खली, सड़ी हुई गोबर खाद भरें


🌱 3. पौधा लगाना

विषय जानकारी
प्रकार ग्राफ्टेड मियाज़ाकी आम पौधा (जापान मूल या भारतीय ग्राफ्टेड)
पौधा कीमत ₹1,000 से ₹5,000
वर्षा से बचाव रोपण जून–जुलाई या फरवरी–मार्च में करें
दूरी 12×12 फीट दूरी पर पौधे लगाएँ

💧 4. सिंचाई प्रणाली

प्रणाली विवरण
ड्रिप इरिगेशन सर्वोत्तम है – रोज़ 1-2 लीटर पानी
गर्मियों में सप्ताह में 2–3 बार
सर्दियों में सप्ताह में 1 बार

☀️ 5. धूप और देखभाल

  • हर आम को बराबर सूर्य की रोशनी मिले – इसके लिए शाखाओं को ट्रिम करें

  • पकते समय आम को जाल के थैलों (mesh bags) में लटकाया जाता है, ताकि यह गिर कर टूटे नहीं

  • फलों को बार-बार हाथ नहीं लगाना चाहिए


🦠 6. कीट और रोग नियंत्रण

रोग/कीट उपाय
पाउडरी मिल्ड्यू नीम का तेल या जैविक फफूंदनाशक
छाल कीड़े नीम-तेल स्प्रे
ज्यादा कीट होने पर जैविक दवाओं का छिड़काव (जैसे ट्राइकोडर्मा, बीटी बैसिलस)

🧺 7. फलन और कटाई

विषय विवरण
पहली फसल 3 से 5 साल बाद आती है
एक पेड़ से 30 से 50 आम
हर आम का वजन 350 ग्राम या अधिक
शुगर लेवल 15% से अधिक (बहुत मीठा)
कटाई खुद गिरने पर या रसपूर्ण पकने पर हाथ से तोड़ा जाता है

💰 8. बिक्री और मुनाफा

विषय विवरण
बाजार मूल्य ₹1,000 से ₹2,00,000 प्रति आम (गुणवत्ता पर निर्भर)
एक एकड़ में 80–100 पेड़
मुनाफा लाखों में, लेकिन समय और ब्रांडिंग की ज़रूरत

 

 

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हरिमन 99′ (Hariman 99) समर ज़ोन एप्पल से फल कैसे प्राप्त करें

गमले में ‘हरिमन 99′ (Hariman 99) समर ज़ोन एप्पल से फल कैसे प्राप्त करें – हिंदी में मार्गदर्शन
(Hariman 99 एक गर्म जलवायु में उगने वाला विशेष सेब का किस्म है जिसे पॉट में भी उगाया जा सकता है।)

 

hariman_99_summer_zone_apple_plant
hariman_99_summer_zone_apple_plant

🌱 1. सही गमला चुनें:

  • 20 से 24 इंच गहरा और चौड़ा गमला लें।
  • गमले में अच्छा ड्रेनेज होना जरूरी है ताकि पानी जमा न हो।

🌿 2. मिट्टी का मिश्रण:

  • 40% बगीचे की मिट्टी + 30% गोबर की खाद/वर्मी कम्पोस्ट + 20% रेत + 10% नीम की खली या कोकोपीट मिलाएं।
  • pH 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए।

☀️ 3. धूप की व्यवस्था:

  • यह सेब गर्म क्षेत्र के लिए है, लेकिन फिर भी इसे कम से कम 6-8 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए।

💧 4. सिंचाई (पानी देना):

  • गर्मी में नियमित, लेकिन गीली मिट्टी से बचें।
  • मिट्टी सूखने पर ही पानी दें, अतिरिक्त नमी जड़ों को नुकसान पहुँचा सकती है

🌸 5. फूल और फल लगने के समय देखभाल:

  • पौधे की उम्र कम से कम 1.5-2 साल होनी चाहिए फल आने के लिए।
  • जब कलियाँ दिखने लगें, तो फॉस्फोरस और पोटाश युक्त खाद (जैसे हड्डी की खाद + MOP) दें।

🪴 6. खाद देने का समय:

मौसम खाद
वसंत (Feb-Mar) गोबर की खाद + नीम खली + DAP
गर्मी (Apr-Jun) जल-धारण शक्ति बढ़ाने वाली जैविक खाद (जैसे कोकोपीट) + पोटाश
बरसात (Jul-Sep) वर्मी कम्पोस्ट + ट्राइकोडर्मा (फफूंदनाशक)
सर्दी (Oct-Dec) हड्डी की खाद + राख + हल्की कटाई

✂️ 7. छंटाई (प्रूनिंग):

  • हर साल दिसंबर–जनवरी में सूखी और भीड़ वाली शाखाएं काटें
  • इससे वेंटिलेशन और सूरज की रोशनी ठीक से मिलेगी, फल अच्छा आएगा।

🐛 8. रोग व कीट नियंत्रण:

  • नीम तेल, लहसुन-हरी मिर्च स्प्रे का छिड़काव करें।
  • पत्तों पर सफेद धब्बे या कीट दिखें तो जैविक कीटनाशक तुरंत लगाएं।

9. फल आने का समय:

  • अच्छे रखरखाव में यह पौधा 2 से 3 साल में फल देना शुरू कर सकता है।
  • फल आमतौर पर जून से अगस्त के बीच तैयार होते हैं (गर्म जलवायु क्षेत्रों में)।

अतिरिक्त सुझाव:

  • फूलों की संख्या ज्यादा हो तो कुछ कलियों को हटा दें — इससे बाकी फल बड़े और मीठे बनेंगे।
  • गमले को हर 2 साल में दोबारा मिट्टी मिलाकर रीपॉट करें

यह रहा हरिमन 99 (Hariman 99 Summer Zone Apple) पौधे की महीना-दर-महीना देखभाल कैलेंडर (पॉट में) — हिंदी में:


🌿 हरिमन 99 सेब पौधा – गमले में देखभाल कैलेंडर

महीना कार्य (Care Tips)
जनवरी (Jan) – पौधे की हल्की छंटाई करें (Dead branches हटाएँ) – जैविक फफूंदनाशक (Trichoderma) डालें – गोबर की खाद डालें
फ़रवरी (Feb) – फूलों की कली बनने लगती है – DAP + हड्डी की खाद + राख (wood ash) डालें – नियमित रूप से पानी दें, धूप में रखें
मार्च (Mar) – फूल खिलते हैं – फूल गिरने से बचाने के लिए नीम तेल या जैविक स्प्रे करें – फल बनने लगे तो पोटाश दें (MOP)
अप्रैल (Apr) – छोटे फल दिखने लगेंगे – जैविक खाद + पोटाश + नीम खली दें – पत्तियों पर कीट दिखें तो नीम स्प्रे करें
मई (May) – फल बढ़ने की अवस्था – पौधे को 2 दिन में एक बार पानी दें – गमले को ज्यादा गर्म धूप से बचाएँ (छाया दें)
जून (Jun) – फल पकने लगते हैं – गिरे हुए पत्ते/फल हटाएँ – यदि जरूरत हो तो थोड़ा पोटाश दें
जुलाई (Jul) – फल कटाई के बाद पौधे को आराम दें – वर्मी कम्पोस्ट डालें – हल्की सिंचाई करें, जलभराव से बचें
अगस्त (Aug) – नई शाखाएं निकलेंगी – 1-2 बार जैविक फफूंदनाशक + नीम खली दें – गमले की मिट्टी हल्की खोदाई करें
सितंबर (Sep) – पोषक पूर्ति हेतु गोबर की खाद + राख दें – पत्तों पर रोग/कीट न हो, निरीक्षण करें
अक्टूबर (Oct) – ठंडी शुरू होने से पहले पौधे की कटाई-छंटाई करें – ट्रेंचिंग (हल्का गड्ढा बनाकर खाद देना) करें
नवंबर (Nov) – नया विकास रुकने लगता है – कोई भारी खाद न दें – सिर्फ पानी और जैविक स्प्रे जारी रखें
दिसंबर (Dec) – पौधे को आराम की अवस्था में रखें – छंटाई की योजना बनाएं – जैविक मल्च डालें (सूखी पत्तियाँ या घास)

अतिरिक्त सुझाव:

  • हर 6 महीने में गमले की ऊपरी 2-3 इंच मिट्टी बदलें
  • हर 2-3 साल में पौधे को नए बड़े गमले में ट्रांसप्लांट करें
  • यदि फूल बहुत अधिक हों तो थिनिंग (कुछ फूल हटाना) करें, इससे फल बड़े और स्वादिष्ट बनते हैं।

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गमले में उगाए गए ताइवानी पिंक अमरूद (Taiwan Pink Guava) से बेहतरीन फल प्राप्त करने के उपाय

गमले में उगाए गए ताइवानी पिंक अमरूद (Taiwan Pink Guava) से बेहतरीन फल प्राप्त करने के उपाय (हिंदी में):

Taiwan pink guava live plant
Taiwan pink guava live plant

गमले में ताइवानी पिंक अमरूद का पौधा अच्छी तरह फल दे सकता है, अगर आप सही देखभाल करें। नीचे कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:


🌱 1. उपयुक्त गमला चुनें:

  • कम से कम 18-24 इंच गहरा और चौड़ा गमला इस्तेमाल करें।
  • मिट्टी से पानी अच्छे से निकल जाए, इसके लिए ड्रेनेज होल्स ज़रूर होने चाहिए।

🌿 2. मिट्टी का चयन:

  • दलदली मिट्टी नहीं होनी चाहिए।
  • अच्छे परिणाम के लिए 60% बगीचे की मिट्टी + 20% गोबर की खाद + 20% रेत या पर्लाइट मिलाएं।

☀️ 3. धूप की व्यवस्था:

  • पौधे को कम से कम 6-8 घंटे की सीधी धूप जरूर मिलनी चाहिए।

💧 4. सिंचाई (पानी देना):

  • गर्मियों में नियमित रूप से पानी दें, लेकिन पानी जमा न होने दें
  • सर्दियों में कम पानी दें – मिट्टी सूखने पर ही पानी दें।

🌸 5. फूल और फल के समय की देखभाल:

  • फूल आने पर पोटाश और फॉस्फोरस युक्त खाद (जैसे DAP या हड्डी की खाद) दें।
  • फूल झड़ने से रोकने के लिए जैविक फफूंदनाशक (जैसे नीम का तेल) का छिड़काव करें।

🪴 6. खाद देना:

  • हर 30-45 दिन में एक बार:
    • गोबर की खाद/वर्मीकम्पोस्ट
    • नीम की खली
    • हड्डी की खाद
  • फ्रूटिंग के समय पोटाश (MOP) और सिवेज स्लज/फूलों की खाद दें।

✂️ 7. छंटाई (प्रूनिंग):

  • हर साल सर्दियों में पुराने और सूखे टहनियों की छंटाई करें।
  • इससे नए और स्वस्थ टहनियाँ उगेंगी और ज्यादा फल आएंगे।

🐛 8. कीट नियंत्रण:

  • नीम तेल या साबुन पानी का स्प्रे हर 15 दिन में करें।
  • फल मक्खी, एफिड या स्केल इंसेक्ट से बचाने के लिए जैविक उपाय अपनाएं।

 

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Tips for Boosting fruiting in a potted

Boosting fruiting in a potted lemon plant requires a combination of proper care, the right nutrients, and optimal environmental conditions. Here’s a practical guide:

All season lemon plant for pot
All season lemon plant for pot

✅ 1. Choose the Right Pot and Soil

  • Pot size: At least 18–24 inches in diameter and with drainage holes.

  • Soil: Well-draining, slightly acidic soil (pH 5.5–6.5). A mix of potting soil, compost, and sand/perlite works well.


✅ 2. Sunlight

  • Lemon plants need 6–8 hours of direct sunlight daily.

  • If indoors, place near a south-facing window or use grow lights.


✅ 3. Watering

  • Keep soil consistently moist, but not soggy.

  • Water when the top inch of soil feels dry.

  • Avoid letting the pot sit in water.


✅ 4. Fertilizing (Key for Fruiting!)

Use a citrus-specific fertilizer high in phosphorus and potassium:

  • NPK ratio around 5-10-10 or 6-3-6.

  • Fertilize every 4–6 weeks during growing season (spring–summer).

  • Supplement with micronutrients like magnesium (Epsom salt), zinc, and iron if leaves yellow.

Homemade boost: Mix 1 tablespoon of Epsom salt in 1 gallon of water once a month.


✅ 5. Pruning and Pollination

  • Prune lightly to shape the plant and remove dead branches.

  • Promote airflow and sunlight penetration.

  • Hand pollinate flowers indoors using a small brush or cotton swab.


✅ 6. Stress the Plant Slightly

  • After flowering begins, slightly reduce water for a short time. Mild stress can encourage fruiting.


✅ 7. Pest and Disease Management

  • Watch for aphids, spider mites, and scale.

  • Use neem oil or insecticidal soap if needed.


✅ 8. Repot Every 2–3 Years

  • Refreshes soil and prevents root binding, which can affect fruit production.

Order Lemon Plant

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जानिए Japanese Miyazaki Mango (जापानी मियाज़ाकी आम) दुनिया के सबसे महंगे और अनोखे आमों के बारे में|

Japanese Miyazaki Mango (जापानी मियाज़ाकी आम) दुनिया के सबसे महंगे और अनोखे आमों में से एक है। इसे “Egg of the Sun” (सूरज का अंडा – Taiyo no Tamago) भी कहा जाता है।
यहाँ इस आम के बारे में कुछ खास बातें हैं:
🥭 Miyazaki Mango की खासियत:
उत्पत्ति: जापान के Miyazaki Prefecture में उगाया जाता है।
कीमत: एक जोड़ी आम की कीमत ₹2 लाख से ₹2.5 लाख तक हो सकती है!
रंग: गहरे लाल से बैंगनी रंग का होता है।
स्वाद: बेहद मीठा, जूसदार और रसीला। इसकी मिठास लगभग 15% Brix level (चीनी की मात्रा) तक हो सकती है।
वजन: एक आम का वजन लगभग 350-500 ग्राम या उससे ज्यादा होता है।
उगाने की प्रक्रिया: इसे नेट में लटकाकर उगाया जाता है ताकि धूप सभी तरफ से बराबर पड़े और फल परफेक्ट आकार में पके।
🌱 भारत में Miyazaki Mango:
भारत में कुछ किसानों ने इसकी खेती शुरू की है, खासकर मध्य प्रदेश (Jabalpur), उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में।
इसकी खेती में उच्च देखभाल, सुरक्षा, और मौसम की विशेष परिस्थितियों की जरूरत होती है।
शुरुआत में यह आम सिर्फ शोकेस और गिफ्टिंग के लिए उगाया गया था, लेकिन अब इसका व्यवसायिक उत्पादन बढ़ रहा है।
💰 क्यों इतना महंगा?
यह आम बहुत ही सीमित मात्रा में उगाया जाता है।
इसकी पैकिंग, ग्रेडिंग और प्रस्तुति लक्ज़री फ्रूट की तरह होती है।
जापान में ये आम अमीरों के तोहफे के रूप में इस्तेमाल होता है।
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गमले में लगे लाल अमरुद के पौधे की देखभाल करने के 10 बेहतरीन तरीके।

Red Guava Plant For Pot

  1. आप अगर Plants lover हैं, तो आप को हमेशा कलमी ( ग्राफ्टेड ) पौधा ही लगाना चाहिए क्योंकि कलमी पौधे के अलग ही फायदे होते हैं। अतः आप जब भी लाल अमरुद का पौधा लगायें तो कलमी पौधा ही लगायें। 
  2. अगर आपके लाल अमरुद के फलों में फल बेधक कीट लग जाये तो प्रभावित फलों को एकत्र कर नष्ट करें। प्रकोप से बचने के लिए कार्बोरील (0.2 % ) या इथोफेनप्रोक्स ( 0.05 % ) का फल बनने की प्रारंभिक अवस्था में छिड़काव करें। छिड़काव के 15 दिन तक फल न तोड़ें। 
  3. लाल अमरुद में रस चूषक व पत्ती खाने वाले कीट लग जाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए डाइमिथोएट 2 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 
  4. पट्टी खाने वाली लट का प्रकोप होने पर क्यूनालफॉस 2 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। 
  5. अगर आपके लाल अमरुद पर लगे फल सड़ जाते हैं या रुई के समान फफूँदी की वृद्धि दिखाई देती है तो इसके लिए 2 ग्राम मेंकोजेब 1 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। 
  6. अगर आपके गमले में लगे लाल अमरुद के पौधे पर फल – फूल नहीं आ रहे हैं, तो आप उसकी किसी दूसरे बड़े गमले में रिपोटिंग कर सकते हैं। 
  7. लाल अमरुद के पौधे को पानी की अधिक आवश्यकता होती है, अतः उसे गर्मियों में सुबह – शाम दोनों समय पानी देना चाहिए। 
  8. समय – समय पर गमले की मिटटी की गुड़ाई करते रहे, खर – पतवार को निकालकर फेंकते रहें और जो टहनियाँ सूख जाएँ उन्हें काटकर फेंक दें। 
  9. लाल अमरुद के पौधे को धूप की अधिक आवश्यकता होती है, अतः उसे ऐसी जगह पर रखें जहाँ पर्याप्त मात्रा में धूप आती हो। 
  10.  आपको पौधे के ऊपर कभी भी रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वही एक तरफ तो पौधे को लाभ पहुंचाते हैं तो दूसरी तरफ इसके बहुत सारे बुरे प्रभाव भी होते हैं। आपको जैविक खाद का ही प्रयोग करना चाहिए। 

नोट :- अगर आप पेंड – पौधे लगाने के शौकीन हैं लेकिन आप अपने पौधों को चाहते हुए भी समय न दे पा रहें हैं या किसी भी कारण वश आप इन उपायों को नहीं कर पा रहे हैं। आप चाहते हैं कि मेरे पौधे कम देखभाल में ही अच्छे परिणाम दें तो इसका भी उपाय है। जी हाँ आपने बिल्कुल सही समझा। 

ऊपर दिए गए चित्र में आप 12 पाउच को देख सकते हैं जो की 12 महीनों के लिए हैं। हर महीने में एक पाउच का इस्तेमाल करना है। इस आर्गेनिक फ़र्टिलाइज़र का नाम है। 

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गमले में लगे कटहल के पौधे की देखभाल करने के 10 आसान तरीके।

Grafted Jackfruit Plant

Know what Vastu Shashtra has to says about House gardening - Plant & Our  Culture - NurseryLive Wikipedia
  1. अगर आप के घर के गमले में लगे कटहल के पौधे से अधिक फल पाना चाहते हैं तो आप उसकी प्रूनिंग कर सकते हैं। 
  2. आप जब भी कटहल का पौधा लगाये तो हमेशा ग्राफ्टेड पौधा ही लगाएं क्योंकि ग्राफ्टेड पौधा बहुत ही कम समय और देखभाल में फल देना प्रारंभ कर देता हैं। 
  3. अक्सर कटहल के तने व पत्तियों पर सफेद रंग के कीट लग जाते हैं तो आप उन पर नीम के पानी का छिड़काव कर सकते हैं। 
  4. कटहल के पेंड में तना छेदक नामक एक कीट लग जाता है जो तने के जीवित भाग को खाकर पूरी खोखला बना देती है। इसकी रोकथाम के लिए रुई या सूती कपडे को डीजल या केरोसीन में डुबोकर पेंड के तने में लगा दें और साथ ही चिकनी मिटटी भी लगा देनी चाहिए। 
  5. राइजोपस आर्टकारपाई नामक कवक जो की कटहल के फलों को सड़ा देता है। इसका प्रकोप छोटे फलों में ज्यादा होता है जो की सड़ कर गिरने लगते हैं। इसके रोकथाम के लिए एक लीटर पानी में 2 ग्राम कॉपर अक्सीक्लोराइड मिलाकर 12 से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करते रहें। 
  6. मिली बिग नामक कीट जो कटहल के फल व फूलों से रस चूसते हैं जिनकी वजह से फल व फूल गिर जाते हैं। अतः इसके रोकथाम के लिए 3 मिली इंडोसल्फान प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। 
  7. कटहल के पौधे को धूप की आवश्यकता होती है अतः उसे ऐसी जगह लगाएं जहाँ पर्याप्त मात्रा में धूप मिलती रहे। 
  8. गमले में लगे कटहल के पौधे को गर्मियों में सुबह – शाम दोनों समय पानी देना चाहिए। सर्दियों के दिनों में एक बार पानी देना चाहिए। जब कटहल में फूल आ रहें हो तो 2 – 3 दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए। 
  9. अधिक दिनों से लगे गमले में कटहल का पौधा अगर मुरझाया – मुरझाया लगने लगे, फल देना बंद कर दे या उसकी जड़ें गमले में बहुत अधिक फैल गयी हों तो आपको उसकी किसी बड़े गमले में रिपोटिंग कर देनी चाहिए। 
  10. आपको समय – समय पर कटहल के पौधे की काट – छाँट करते रहना चाहिए। हर 15 दिन के अंतराल पर मिटटी की हल्की गुड़ाई करते रहें। 

नोट :- अगर आप पेंड – पौधे लगाने के शौकीन हैं लेकिन आप अपने पौधों को चाहते हुए भी समय न दे पा रहें हैं या किसी भी कारण वश आप इन उपायों को नहीं कर पा रहे हैं। आप चाहते हैं कि मेरे पौधे कम देखभाल में ही अच्छे परिणाम दें तो इसका भी उपाय है। जी हाँ आपने बिल्कुल सही समझा। 

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गमले में लगे हुए संतरे के पौधे की देखभाल करने के 10 आसान तरीके और पायें ढेर सारे संतरे के फल।

advancedestore Live Dwarf Orange Plant Tangerine (Santra) origin  Darjeeling: Amazon.in: Garden & Outdoors
  1. संतरे के पौधे को धूप की ज्यादा जरुरत होती है। अतः आप संतरे के पौधे को ऐसी जगह रखें जहाँ उसे 6 से 8 घंटे की पर्याप्त धूप मिल सके। 
  2. आप अपने संतरे के पौधे की प्रूनिंग कर सकते हैं और पहले की अपेक्षा अधिक मात्रा में संतरे भी आने लगेंगे।
  3. अगर आपको लगता है कि आपका संतरा का पौधा मुरझाया – मुरझाया रहता है या उसकी जड़ें गमले में बहुत अधिक फैल गयी हैं तो आप उसकी रिपोटिंग कर सकते हैं। 
  4. संतरे के पौधे को पानी की आवश्यकता होती है, अतः इसे सुबह – शाम दोनों समय पर्याप्त मात्रा में पानी देना चाहिए। 
  5. जब संतरे पर फूल आ रहे हों तो संतरे को अधिक पानी नहीं देना चाहिए। इतना पानी दें की उसकी मिटटी नम हो जाये बस। अगर फ्लॉवरिंग के समय ज्यादा पानी दिया गया तो सारे फूल झड़ जायेंगे। 
  6. संतरे के पौधे की समय – समय पर काट – झाँट करते रहें। 
  7. संतरे के पौधे पर रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करना चाहिए। 
  8. संतरे के पौधे को महीने में दो बार हल्की गुड़ाई करके वर्मी कम्पोस्ट या गोबर की खाद देते रहे। 
  9. आप जब भी संतरे का पौधा लगाएं तो ग्राफ्टेड संतरे का ही पौधा लगाएं। ग्राफ्टेड पौधे कम समय में ही फल देना प्रारंभ कर देते हैं। 
  10. अगर संतरे के पौधे पर कीट लग जाये तो उस पर नीम के पानी का छिड़काव करना चाहिए। 

नोट :- अगर आप पेंड – पौधे लगाने के शौकीन हैं लेकिन आप अपने पौधों को चाहते हुए भी समय न दे पा रहें हैं या किसी भी कारण वश आप इन उपायों को नहीं कर पा रहे हैं। आप चाहते हैं कि मेरे पौधे कम देखभाल में ही अच्छे परिणाम दें तो इसका भी उपाय है। जी हाँ आपने बिल्कुल सही समझा। 

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How to do a Banana Commercial Farming

How to do a Banana Commercial Farming

Importance of Banana in India:
Banana is one of the major and economically important fruit crops of India. Banana occupies 20% of the area among the total area under crop in India. Most of Banana is grown by planting suckers. The technology development in agriculture is very fast, it results in developing a Tissue Culture Technique. Banana is the oldest and common fruit known to the mankind. It is one of the important fruits, and constitutes second largest fruit industry in India.

Agro-Climatic Conditions for Banana Plantation:
Banana, basically a tropical crop, grows well in a temperature range of 15°C – 35°C with a relative humidity of 75-85%. It prefers tropical humid lowlands and is grown from the sea level to an elevation of 2000m above msl. In India, this crop is being cultivated in climate ranging from humid tropical to dry mild subtropics through a selection of appropriate varieties. Chilling injury occurs at a temperature below 12°C. The high velocity of wind which exceeds 80 km /hr damages the crop. Four months of monsoon with an average 650-750 mm rainfall is most important for vigorous vegetative growth of banana. At higher altitudes, banana cultivation is restricted to a few varieties like ‘hill banana”.

Deep, rich loamy soil with a pH between 6.5 – 7.5 is most preferred for banana farming. Soil for banana should have good drainage, adequate fertility, and moisture. Saline solid, calcareous soils are not suitable for banana cultivation. A soil which is neither too acidic nor too alkaline, rich in organic material with high nitrogen content, adequate phosphorus level and plenty of potash is good for a banana.

Suitable Soil Type for Banana Plantation:
In Banana Farming, Soil for banana should have good drainage, adequate fertility, and moisture. Deep, rich loamy soil with pH between 6-7.5 are most preferred for banana cultivation. Ill drained, poorly aerated and nutritionally deficient soils are not suitable for the banana. Saline solid, calcareous soil is not suitable for Banana cultivation. Avoided soil of low lying areas, very sandy and heavy black cotton with ill drainage. A soil that is not too acidic and not too alkaline, rich in organic material with high nitrogen content, adequate phosphorus level and plenty of potash are good for the banana.

Banana Varieties:
In India, banana is grown under diverse conditions and production systems. In your banana farming, selection of varieties, therefore, is based on a large number of varieties catering to various kinds of needs and situations. However, around 20 cultivars namely, Dwarf Cavendish, Robusta, Monthan, Poovan, Nendran, Red banana, Nyali, Safed Velchi, Basarai, Ardhapuri, Rasthali, Karpurvalli, Karthali, and Grandnaine etc.

Grandnaine is gaining popularity and may soon be the most preferred variety due to its tolerance to biotic stresses and good quality bunches. Bunches have well-spaced hands with a straight orientation of figures, bigger in size. Fruit develops attractive uniform yellow color with better shelf life and quality than other cultivars.

Land Preparation for Banana Planting:
Prior to planting banana, grow the green manuring crop like daincha, cowpea, etc. and bury it in the soil. The land can be plowed 2-4 times and leveled. Use rotavator or harrow to break the clod and bring the soil to a fine tilth. During soil preparation, a basal dose of farmyard manure is added and thoroughly mixed into the soil.

A pit size of 45cm x 45cm x 45cm is normally required. The pits are to be refilled with topsoil mixed with 10 kg of farmyard manure, 250 gm of neem cake and 20 gm of conbofuron. Prepared pits are left to solar radiation helps in killing the harmful insects, is effective against soil-borne diseases and aids aeration. In saline-alkali soil where pH is above 8 Pit mixture is to be modified to incorporate organic matter.

Addition of organic matter helps in reducing salinity while the addition of purlite improves, porosity and aeration. An alternative to planting in pits is planting in furrows. Depending on soil strata one can choose an appropriate method as well as spacing and depth at which plant is required to be planted.

Planting Material of Banana Crop:
About 70% of the farmers are using suckers as planting material while the rest 30% of the farmers are using tissue culture seedlings. Sword suckers with well-developed rhizome, conical or spherical in shape having actively growing conical bud and weighing approximately 450-700 gm are commonly used as propagating material.

In Banana Farming, suckers generally may be infected with some pathogens and nematodes. Similarly, due to the variation in age and size of the sucker, the crop is not uniform, harvesting is prolonged and management becomes difficult. Therefore, in-vitro clonal propagation, Tissue culture plants are recommended for planting. They are healthy, disease free, uniform in growth and early yielding.

The Best Planting Season of Banana:
Planting of tissue culture Banana can be done throughout the year except when the temperature is too low or too high. The facility of a drip irrigation system is important. There are two important seasons in Maharashtra, India;
Mrig Baug (Kharif) Month of planting June – July. Kande Baug (Rabi) Month of planting October – November.

Banana Planting Methods:
Pit planting is commonly followed in the garden system of cultivation. A pit size of 0.5 x 0.5 x 0.5m is normally required. Small pits are dug in case of ridges and furrows. The pits are to be refilled with topsoil mixed with 10 kg of FYM (well decomposed), 250 gm of neem cake and 20 gm of carbofuran. Prepared pits are left open for 15-20 days for solar radiation to kill all the insects, soil-borne diseases and for aeration before refilling. In saline-alkali soil where the pH is above 8, pit mixture is to be modified incorporating organic matter and gypsum.

The suckers are planted in the center of the pit and soil around is compacted. Plants are planted in the pits keeping pseudostem 2cm below the ground level. The soil around the plant is gently pressed. Deep planting should be avoided. The field is irrigated immediately after planting.

Irrigation Management of Banana Orchard:
Banana, a water-loving plant, requires a large quantity of water for maximum productivity. But Banana roots are the poor withdrawal of water. Therefore under Indian condition banana production should be supported by an efficient irrigation system like drip irrigation. Water requirement of banana has been worked out to be 2000mm per Annum. Application of drip irrigation and mulching technology has reported improved water use efficiency. There is saving of 56% of water and increasing yield by 23-32% under the drip.

Irrigate the plants immediately after planting. Apply sufficient water and maintain field capacity. Excess irrigation will lead to root zone congestion due to the removal of air from soil pores, thereby affecting plant establishment and growth. And hence drip method is a must for proper water management in Banana.

Application of Manure and Fertilizers for Banana Plants:
Banana requires a high amount of nutrients, which are often supplied only in part by the soil. The nutrient requirement has been worked out on all India basis is to be 20 kg FYM, 200gm N; 60-70gm P; 300gm K/plant. Banana requires heavy nutrition. The banana crop requires 7-8 Kg N, 0.7- 1.5 Kg P and 17-20 Kg K per metric tonne yield. Banana responds well to the application of nutrients. Traditionally farmers use more of urea and less of phosphorous and potash.

In order to avoid loss of nutrients from conventional fertilizers, loss of N through leaching, volatilization, evaporation, and loss of P and K by fixation in the soil, application of water-soluble or liquid fertilizers through drip irrigation is encouraged. A 25-30% increase in yield is observed using fertigation. Moreover, it saves labor and time and the distribution of nutrients is uniform.

Intercultural operations in Banana Crop:
The Root system of banana is superficial and easily damaged by cultivation, use of intercrop which is not desirable. However short durational crops like mung, cowpea, dhaincha are to be considered as green manuring crops. Crops from the cucurbitaceous family should be avoided as these carry viruses.

Weeding of Banana Plants:
Spraying of Glyphosate before planting at the rate of 2 lit/ha is carried out to keep the plantation weed free. One or two manual weedings are necessary.

Banana Harvesting Procedure:
Banana should be harvested at the physiological maturity stage for better postharvest quality. The fruit is climacteric and can reach the consumption stage after ripening operation.

  • Maturity indices: These are established on the basis of fruit shape, angularity, grade or diameter of the median figure of the second hand, starch content and number of days that have elapsed after flowering. Market preferences can also affect the decision for harvesting a slight or fully mature fruit.
  • Removal of the bunch: The bunch should be harvested when figures of second hand from the top are 3/4 rounded with the help of sharp sickle 30cm above the first hand. Harvest may be delayed up to 100-110 days after the opening of the first hand. The harvested bunch should generally be collected in a well-padded tray or basket and brought to the collection site. Bunches should be kept out of light after harvest since this hastens to ripen and soften. For local consumption, hands are often left on stalks and sold to retailers. For export, hands are cut into units of 4-16 fingers, graded for both length and girth, and carefully placed in poly-lined boxes to hold different weight depending on export requirements.

Post-harvest management of Banana farming:
At the collection site injured and over-mature fruits are discarded and for a local market, bunches should be delivered through lorries or wagons. However, for more sophisticated and export market where the quality is predominant, bunches should be dehanded, fruits are cleared in running water or dilute sodium hypochlorite solution to remove the latex and treated with thiabendazole; air dried and graded on the basis of size of fingers as already stated, packed in ventilated CFB boxes of 14.5 kg capacity or as per requirement with polythene lining and pre-cooled at 13-15°C temperature and at 80-90% RH.
Such material should then be sent under cool chain at 13°C for marketing

The yield of Banana:
The planted crop gets ready for harvest within 11-12 months of planting. First ratoon crop would be ready by 8-10 month from the harvesting of the main crop and second ratoon by 8-9 months after the second crop.

Thus over a period to 28-30 months, it is possible to harvest three crops i.e. one main crop and two ratoon crops. Under drip irrigation combined with Fertigation yield of Banana as high as 100 T/ha can be obtained with the help of tissue culture technique, even similar yield in the ratoon crops can be achieved if the crop is managed well.

Bottom Line:
Banana Farming is Fun and Profitable provided if climatic conditions support.

Article Source:
https://www.agrifarming.in/banana-farming

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आइये जाने सर्दियों के मौसम में कैसे करें पौधों की रक्षा

आप सभी जानते होंगे की सर्दियों के मौसम में सभी पौधे मर जाते हैं आइये जाने ये क्यों होता हैं। और इसको कैसे रोका जाये :-

  • सबसे पहले इन पौधों में जो नयी कलियाँ या नये पत्ते आये तो इस सर्दियों के मौसम में इनको अच्छी तरीके से काट लेंगे। 
  • अगर आपके पौधों में बहुत ज्यादा पत्ते है तो उनको हल्का – हल्का काट लेंगे। और अगर कम है तो उसको छोड़ देंगे। 
  • इन पौधों पर 15 से 20 दिन पर नीम ऑइल ( नीम का तेल )का छिड़काव करते रहेंगे जिससे इन पर किट ( कीड़े ) न लग सकें। 
  • इन पौधों के गमले में जो घास उग जाते हैं उनको समय – समय पर साफ करते रहें। 
  • आप इन पौधों को सर्दि के मौसम में 3 से 4 दिन में एक बार ही पानी डालें क्योंकि सर्दियों के मौसम में पानी जल्दी सूख नहीं पाता जिससे पौधे सड़ जाते हैं। 
  • आप पौधों में पानी तभी डालें जब उस पौधे की मिट्टी में नमी हो अथवा उस पौधे की मिट्टी जब सूख जाये। 
  • सर्दियों के मौसम में कोशिश करें की पौधों को धूप वाली जगह पर रखें ताकि पौधों को धूप मिल सके। 
  • अगर आपकी तरफ ज्यादा सर्दी होती है तो आप पौधों के गमलों में नारियल का छिल्का या पत्थर के छोटे आकर के टुकड़े भी डाल सकते हैं। जिससे उनको गर्मी मिलती रहें। 
  • सर्दियों के मौसम में आप पौधों  में खाद न डालें। आपको अगर डालना है तो आप इसमें लिक्विड  फटिलाइजर ( काम मात्रा में )डाल सकते हैं। 
  • आपको इस बात का भी ध्यान रखना है की जो ओश होती है वो इन पौधों पर डायरेक्ट न पड़े। 

इन सब बातों को ध्यान में रखने से आपके पौधे सर्दियों में भी हरे – भरे रहेंगे और सर्दियों के बाद गर्मी के मौसम में आपको अच्छे फल – फूल देंगे। 

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फल के पौधों में ढेर सारे फल पाने के 5 अचूक उपाय

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अगर आपने भी अपने घर में फल के पौधे लगाए हैं और उसमे फल नहीं आ रहे हैं तो आज हम आपको 5 ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिसे आजमाकर आप भी अपने पौधों से ढेर सारे फल पा सकते हैं। 

  1. आपको हमेशा ग्राफ्टेड (कलमी ) पौधा ही अपने गमलों में लगाना चाहिए। जो की बहुत ही कम समय में अच्छे फल देने लगते हैं। 
  2. पौधों की समय- समय पर एयरलेयरिंग करते रहना चाहिए। इसे गुट्टी विधि के नाम से भी जाना जाता है। 
  3. आप जब भी पौधा लगाए तो उसकी मिटटी में गोबर की खाद (जो अच्छे से डिकम्पोस होनी चाहिए और  लगभग 2 साल पुरानी होनी चाहिए  ) को अच्छे से मिला के पौधा लगाना चाहिए। 
  4. आप अपने पौधे को ऐसी जगह लगाए जहां धूप पर्याप्त मात्रा में आती हो। 
  5. आपको पौधा लगा देने के बाद हर 15 दिन बाद अपने पौधे में गोबर की खाद डालते रहना चाहिए।
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गमले में आम उगाने के लिए जरूरी टिप्स

अगर आपको घर पर आम खाने के लिए लगाने है तो आप कभी भी गुठली से आम न लगाए क्योकि गुठली वाले आम कम से कम 10 से 12 साल बाद ही आम देते है। आप हमेशा ग्राफ्टेड आम ही लगाए जिससे आप उम्मीद कर सकते है कि यह हमें 4 से 5 साल में फल देने लगेगा।

पौधा लगाते समय ये बातें जरूर ध्यान में रखें :-

  • ग्राफ्टेड आम के पौधे की कलम मोटी टहनी से जुड़ी हो। क्योकि पतली टहनी हवा अथवा अन्य कारणों से जल्दी टूट भी जाती हैं। 
  • ग्राफ्टेड आम के पौधे में आप हमेशा छोटी वैरायटी ( आम्रपाली, नीलम, मलिका )ही लें। क्योंकि ये 10 से 12 फ़िट तक ही जाते हैं। तो इनको आप आसानी से गमले आदि में लगा सकते है। 
  • आप ग्राफ्टेड आम के पौधे में ज्यादा खाद न डालें। क्योंकि ज्यादा खाद के कारण पौधे को पोषण नहीं मिलता जिससे वह मर जाते हैं।
  • आप पौधे को आराम से पॉलीबैग से निकालें। क्योंकि पॉलीबैग से पौधा निकलते समय पौधे की जड़े टूट जाती है। जिससे उसके मरने की उम्मीद बढ़ जाती है। 
  • आप एक जूट  की नेट का छोटा टुकड़ा लें और इसको जड़ों के चारो तरफ लपेट दें और जूट  के टुकड़े के साथ ही इसको गमले में लगा दें। कुछ समय बाद यह जूट  मिट्टी में गल जायेगा। 
  • आप इन पौधो को ज्यादा बड़े गमले में न लगाए क्योंकि छोटे गमले में इसको काम जगह के कारण ये बोंसाई पौधे की तरह कम आकर का हो जाता हैं। 
  • आम के पौधे में आने वाले पहले फलों को तोड़ दे क्योंकि ये एक बार फल देने के बाद दूसरी बार फल देने में कठिनाइया होने लगती है। 
  • ग्राफ्टेड पौधे के बौर में यदि कोई फल य फूल लगा है हो उसको साफ कैंची से काट लें।
  • एक फल इस पौधे पर लगा छोड़ दे जिससे आपको पता चल सके की आपके पौधे के फल हैल्थी है या कमज़ोर। मतलब आपका पौधा फलो की अच्छे से ग्रोथ कर सकता है या नहीं। 
  • आपने जो एक आम पौधे पर छोड़ा था आप उसको 20 से 25 दिन बाद उसको भी काट कर पौधे से अलग कर दे। 
  • आपने जो एक फल पौधे पर छोड़ा था उसके आकर के अनुसार आप पौधे की कवालिटी का अनुमान लगा सकते हैं। 

इन सब बातों को अपनाने से आपको जल्द ही घर में लगे आम खाने को मिलेंगे।

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घर पर बनाये ऐसी खाद की पौधे करे फल और फूलों की बरसात

अगर आपने कोई फल या  फूल का पौधा लगाया है और उसमें फल और फूल नहीं निकल रहे हैं,या बहुत कम  फल और फूल निकलते है तो निराश होने की जरूरत नहीं है। आज हम आपको घर पर सरल विधि से बनने वाली ऐसी खाद के बारे में बताएँगे जिससे आपके पौधे में फलों और फूलों की बरसात हो जायगी। यह खाद आप घर पर बहुत आसानी से बिना ज्यादा पैसा खर्च किये बना सकते है।  इसके लिए  आप 2  से 3 फीट का गमला लें। 2 इंच मोटी मिट्टी की परत बिछा के उस में अपने घर का कूड़ा (जैसे :- सब्जियों और फलों के छिलके ) और  4 चम्मच दही डालके अच्छी तरह थोड़े पानी के साथ मिला दें। दही डालने से खाद का निर्माण जल्दी होता है। अगर आप चाहते हैं खाद में पोटेशियम और नाइट्रोजन की मात्रा सही हो तो उस में नीम्बू और केले के छिलके डाल के टाट की बोरी से ढक दें।कुछ दिनों बाद जब खाद सड़ कर तैयार हो जाये तो इसे अपने पौधों में डाल दें।  एक ही महीने में फलों और फूलों की बरसात देखकर आप हैरान हो जायेंगे। 

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पांच सरल तरीके जिनसे निम्बू के पौधे से होगी फलों की बरसात

  1. समय – समय पर पौधे की छटाई करते रहे और यह सुनिश्चित करें कि पौधे पर कोई सूखी टहनी या डाली नहीं लगी रहें।
  2. पौधे में ज्यादा पानी नहीं डालें। ज्यादा पानी डालने से निम्बू के पौधे में ज्यादा और अच्छे फल नहीं मिलेंगे। 
  3. ज्यादा मात्रा में फल पाने के लिए पौधे में वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करें। 
  4. ज्यादा मात्रा में फल पाने के लिए पौधे में सरसों की खली थोड़ी मात्रा में डालें। 
  5. चीटियों और अन्य कीटों से बचाने के लिए आधा लीटर पानी में 1 चम्मच शहद अच्छी तरह मिलाकर पौधे पर इसका छिरकाव करें।