Posted on Leave a comment

आम की फसल पर लगने वाले कीटों व रोगों की रोकथाम करें।

Mango Plant

फलों का राजा आम हमारे देश का सबसे महत्वपूर्ण फल है। आम की खेती उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उड़ीसा, महाराष्ट्र और गुजरात में व्यापक स्तर पर की जाती है। जनवरी महीने से आम के पेड़ों में बौर आना शुरू हो जाता है। इसलिए किसानों को अच्छा उत्पादन पाने के लिए अभी से इसकी देखभाल करनी होगी क्योंकि जरा सी चूक से रोग और कीट पूरी फसल को बर्बाद कर सकते हैं। “फसल के शुरू होने से पहले ही किसानों को बाग में सिंचाई कर देनी चाहिए, जिससे नमी बनी रहे। किसानों को इस समय पेड़ों पर कीटनाशकों का छिड़काव कर देना चाहिए। इसके बाद दूसरा छिड़काव जब फल चने के बराबर हो जाएँ तब करना चाहिए। जिस समय पेड़ों पर बौर लगा हो उस समय किसी भी कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका परागण हवा या मक्खियों द्वारा होता है। अगर कीटनाशक का छिड़काव कर दिया तो मक्खियाँ मर जाएँगी और बौर पर नमी होने के कारण परागण नहीं हो पायेगा, जिससे फल बहुत कम आ सकते है।”

आम की फसल में इस समय हॉपर कीट लगने का खतरा रहता है। यह कीट पत्तियों और बौर से रस चूसता रहता है, इसका असर अगर ज्यादा हो गया तो पेंड में फल नहीं आता है। इसलिए समय पर कीटनाशकों का प्रयोग करें।

आम पर लगने वाले कीट 

गुठली का घुन (स्टोन वीविल) :- यह कीट आम की गुठली में छेद करके घुस जाता है और उसके अंदर ही अपना भोजन बनाता रहता है। कुछ दिनों बाद यह गूदे में पहुँच जाता है और उसे हानि पहुँचाता है। इसकी वजह से कुछ देशों ने इस कीट से ग्रसित बागों से आम का आयात पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था। 

रोकथाम :- इस कीड़ें को नियंत्रित करना थोड़ा कठिन होता है इसलिए जिस भी पेंड से फल नीचे गिरे उस पेंड की सूखी पत्तियों और शाखाओं को नष्ट कर देना चाहिए। इससे कुछ हद तक कीड़े की रोकथाम हो जाती है। 

जाला कीट (टेन्ट केटरपिलर) :- प्रारंभिक अवस्था में यह कीट पत्तियों की ऊपरी सतह को तेजी से खाता है। उसके बाद पत्तियों को जाल या टेन्ट बनाकर उसके अन्दर छिप जाता है और पत्तियों को खाना जारी रखता है। 

रोकथाम :- पहला उपाय तो यह है कि एजाडिरेक्टिन 3000 पीपीएम ताकत का 2 मिली लीटर को पानी में घोलकर छिड़काव करें। दूसरा संभव उपाय यह है कि जुलाई के महीने में कुइनोलफास 0.05 % या मोनोक्रोटोफास 0.05 % का 2 – 3 बार छिड़काव करें। 

दीमक :- दीमक सफेद, चमकीले और मिट्टी के अंदर रहने वाले कीट हैं। यह जड़ को खाता है। उसके बाद सुरंग बनाकर ऊपर की ओर बढ़ता जाता है। यह तने के ऊपर कीचड़ का जमाव करके अपने आप को सुरक्षित करता है। 

रोकथाम :- तने के ऊपर से कीचड़ के जमाव को हटाना चाहिए। तने के ऊपर 1.5 % मेलाथियान का छिड़काव करें। दीमक से छुटकारा मिलने के बाद पेंड के तने को मोनोक्रोटोफास (1 मिली / लीटर ) से मिटटी पर छिड़काव करें। 

भुनगा कीट :- यह कीट आम की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाते हैं। इस कीट के लार्वा एवं वयस्क कीट कोमल पत्तियों और पुष्पक्रमों का रस चूसकर हानि पहुँचाते हैं। इसकी मादा 100 – 200 तक अंडे नयी पत्तियों एवं प्ररोह में देती हैं और उनका जीवनचक्र 12 – 22 दिनों में पूरा हो जाता है। इसका प्रकोप जनवरी – फरवरी से शुरू हो जाता है। 

रोकथाम :- इस कीट से बचने के लिए बिवेरिया बेसिआना फफूँद के 0.5% घोल का छिड़काव करें। नीम तेल 3000 पीपीएम प्रति 2 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर, घोल का छिड़काव करके भी निजात पाया जा सकता है। इसके आलावा कार्बोरील 0.2 % या कुइनोलफास 0.063 % का घोल बनाकर छिड़काव करने से भी राहत मिल जाएगी।

आम पर लगने वाले रोग व उनसे बचाव के उपाय 

सफेद चूर्णी रोग (पॉवडरी मिल्ड्यू) :- बौर आने की अवस्था में यदि मौसम बदली वाला हो या बरसात हो रही हो तो यह बीमारी लग जाती है। इस बीमारी के प्रभाव से रोगग्रस्त भाग सफेद दिखाई पड़ने लगता है। इसकी वजह से मंजरियां और फूल सूखकर गिर जाते हैं। इस रोग के लक्षण दिखाई देते ही आम के पेड़ों पर 5 % वाले गंधक के घोल का छिड़काव करें। इसके आलावा 500 लीटर पानी में 250 ग्राम कैराथेन घोलकर छिड़काव करने से भी बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। जिन क्षेत्रों में बौर आने के समय मौसम असामान्य रहा हो वहाँ हर हालत में सुरक्षात्मक उपाय के आधार पर 0.2 % वाले गंधक के घोल का छिड़काव करें एवं आवश्यकतानुसार दोहराएं। 

कालवूणा ( एन्थ्रेक्नोस ) :- यह बीमारी अधिक नमी वाले क्षेत्रों में अधिक पायी जाती है। इसका आक्रमण पौधों के पत्तों, शाखाओं और फूलों जैसे मुलायम भागों पर अधिक होता है। प्रभावित हिस्सों में गहरे भूरे रंग के धब्बे आ जाते हैं। 0.2 % जिनैब का छिड़काव करें। जिन क्षेत्रों में इस रोग की सम्भावना अधिक हो वहाँ सुरक्षा के तौर पर पहले ही घोल का छिड़काव करें। 

ब्लैक टिप ( कोएलिया रोग ) :- यह रोग ईंट के भट्टों के आसपास के क्षेत्रों में उससे निकलने वाली गैस सल्फर डाई ऑक्साइड के कारण होता है। इस बीमारी में सबसे पहले फल का आगे का भाग काला पड़ने लगता है इसके बाद ऊपरी हिस्सा पीला पड़ता है। इसके बाद गहरा भूरा और अंत में काला हो जाता है। यह रोग दशहरी किस्म में ज्यादा होता है। इस रोग से फसल बचाने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि ईंट के भट्टों की चिमनी आम के पूरे मौसम के दौरान लगभग 50 फुट ऊँची रखी जाएँ। इस रोग के लक्षण दिखाई देते ही बोरेक्स 10  ग्राम/लीटर पानी की दर से बने घोल का छिड़काव करें। फलों के बढ़वार की विभिन्न अवस्थाओं के दौरान आम के पेड़ों पर 0.6 % बोरेक्स के दो छिड़काव फूल आने से पहले और जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाएँ तो 15 दिन के अंतराल पर तीन छिड़काव करने चाहिए। 

गुच्छा रोग :- इस बीमारी का मुख्य लक्षण यह है कि इसमें पूरा बौर नपुंसक फलों का एक ठोस गुच्छा बन जाता है। बीमारी का नियंत्रण प्रभावित बौर और शाखाओं को तोड़कर किया जा सकता है। अक्टूबर माह में 200/10 लक्षांश वाले नेप्थलीन एसिटिक एसिड का छिड़काव करना और कलियाँ आने की अवस्था में जनवरी के महीने में पेंड बौर तोड़ देना भी लाभदायक रहता है क्योंकि इससे न केवल आम की उपज बढ़ जाती है बल्कि इस बीमारी के आगे फैलने की संभावना भी कम हो जाती है। 

पत्तों का जलना :- उत्तर भारत में आम के कुछ बागों में पोटेशियम की कमी से एवं क्लोराइड की अधिकता से पत्तों के जलने की गंभीर समस्या पैदा हो जाती हैं। इस रोग से ग्रसित वृक्ष के पुराने पत्ते दूर से ही जले हुए जैसे दिखाई देते हैं। इस समस्या से फसल को बचाने हेतु पौधों पर 5% पोटेशियम सल्फेट के छिड़काव की सिफारिश की जाती है। यह छिड़काव उसी समय करें जब पौधों पर नयी पत्तियाँ आ रही हों। ऐसे बागों में पोटेशियम क्लोराइड उर्वरक प्रयोग ंन करने की सलाह भी दी जाती है। 0.1 % मेलाथिऑन का छिड़काव भी प्रभावी होता है। 

डाई बैक :- इस रोग में आम की टहनी ऊपर से नीचे की ओर सूखने लगती है और धीरे – धीरे पूरा पेंड सूख जाता है। यह फफूंद जनित रोग होता है, जिससे तने की जलवाहिनी में भूरापन आ जाता है और वाहिनी सूख जाती है और जल ऊपर नहीं चढ़ पाता है इसकी रोकथाम के लिए रोग ग्रसित टहनियों के सूखे भाग को 15 सेमी नीचे से काट कर जला दें। कटे स्थान पर बोर्डो पेस्ट लगाएं तथा अक्टूबर माह में कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का 0.3 % घोल का छिड़काव करें।   

Posted on Leave a comment

आप सर्दियों में अपने गार्डन में लगा सकते हैं ये 6 टेस्टी फल।

अगर आप सर्दियों में अपने घर में टेस्टी फल पाना चाहते हैं तो आज मैं आपको ऐसे फल के पौधों के बारे में बताऊँगा जिन्हें आप अपने घर के गार्डन में भी लगा सकते हैं और आप सर्दियों में भी फल पा सकते हैं। अब आप यह सोंच रहें होंगे कि घर में अगर जगह नहीं है तो यह कैसे होगा लेकिन अब इसकी चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि आप इन फल के पौधों को गमलों में भी लगा सकते हैं। बस समय पर इन्हे जरुरी खाद और पानी देते रहें। क्योंकि इन पौधों की ज्यादा देखभाल की जरुरत होती है। तो आईये जाने कुछ ऐसे ही फल जिन्हे आप अपने घर में लगा सकते हैं।

अंगूर ( Grapes Plant )

Buy Grapes Live Plant

अंगूर एक बहुत ही रसीला और खट्टा मीठा फल होता है। इसे आप सर्दियों में अपने घर में ऊगा सकते हैं क्योंकि यह बेल की तरह उगता है इसलिए इसे सहारे की जरुरत पड़ती है। 

नीम्बू ( Lemon Plant )

Buy lemon live plant

नीम्बू का पेंड लगाना बहुत कठिन काम है, क्योंकि इसके लिए आपको बहुत समय और जगह की जरुरत पड़ती है। इसलिए इसे लगाने से पहले इसकी पूरी जानकारी हासिल कर लें। 

पपीता ( Papaya Plant )

Buy papaya live plant

पपीता बहुत ही स्वास्थ्य वर्धक फल है, इसमें विटामिन A अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसे काफी ज्यादा पानी और सूरज की किरणों की जरुरत पड़ती है, इस पेंड को ज्यादा देखभाल की जरुरत नहीं होती है। 

संतरा ( Orange Plant )

Buy orange live plant

संतरा नारंगी रंग का फल होता है, इसे आप अपने घर में आसानी से लगा सकते हैं। बस समय – समय पर इसमें खाद और पानी डालते रहें। 

अनार ( Pomegrant Plant )

Buy Anar live plant

अनार काफी स्वास्थ्यवर्धक फल है, अगर आप के पास टाइम और संसाधन है तो ही इसे लगाये क्योंकि इस पेंड को देखभाल की जरुरत पड़ती है। 

स्ट्रॉबेरी ( Strawberry Plant )

Strawberry Plant Buy Strawberry Plant for best price at INR 55 / Piece(s) (  Approx )
Buy Strawberry live plant

 स्ट्रॉबेरी का नाम सुनते ही हम सबके मुँह में पानी आ जाता है, इसमें विटामिन – C काफी मात्रा में पाया जाता है। इसे आप अपने घर में लगा सकते हैं। बस एक बात का ध्यान रखें कि इसे सूरज की पर्याप्त रोशनी मिलती रहे। 

Posted on Leave a comment

क्या आप जानते हैं, बैडरूम में इन पाँच पौधों को लगाने से अच्छी नींद आती है।

आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी से तो सब वाकिफ हैं। किसी को टाइम नहीं है कि वो किसी से बात कर सके या थोड़ा सा आराम कर लें। थोड़ा सुस्ता लें। आज की भाग – दौड़ भरी जिंदगी में हम इतना तनाव ग्रस्त हो जाते हैं कि ठीक से सो भी नहीं पाते। नींद ना पूरी होने पर हम ठीक से काम भी नहीं कर पाते हैं। 

नींद एक ऐसी चीज है जो हमारी जिंदगी में बहुत महत्त्व रखती है या यूँ कहें की जिस प्रकार हमें खाने की जरुरत होती है ठीक उसी प्रकार हमें अच्छी नींद की जरुरत होती है। लेकिन आपको घबराने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे ही पौधों के बारे में बताएँगे। जिन्हें आप अपने बेडरूम में लगाने से अच्छी नींद आएगी। 

यहाँ तक की, हम जब प्रकृति के करीब होते हैं तो हमारा मन हमेशा अच्छा रहता है और तनाव भी नहीं रहता है। तो आईये जानते हैं उन पौधों को जिन्हें आप अपने बेडरूम में लगा सकते हैं। 

1. एलोवेरा (Aloe vera Plant)

Buy Aloe vera Plant

इस पौधे में कई सारे औषधीय गुण पाये जाते हैं जैसे यह आपकी त्वचा के लिए काफी लाभदायक है। शरीर के घाव को भी ठीक करता है। एलोवेरा को खाने से आपका शरीर भी डिटॉक्सफाइ हो जाता है। एलोवेरा का पौधा बैडरूम में लगाने से कमरे की हवा भी शुद्ध होती है। 

2. चमेली (Jessamine Plant)

Buy Chameli Plant

एक अध्ययन में यह पाया गया है कि चमेली के फूलों की महक से नींद अच्छी आती है। इसकी महक से व्यक्ति अच्छे से सो पाता है। साथ की घबराहट और मूड स्विंग को भी ठीक करता है।  

3. स्नेक प्लांट (Snake Plant)

Buy Snake live plant

यह नाइट्रोजन ऑक्साइड और प्रदूषित हवा को अपने अंदर खींच लेता है। इसलिए इसे आप अपने बेडरूम में लगा सकते हैं, जिससे आपको शुद्ध हवा मिले। इस पौधे की एक और खास बात यह है कि रात में जब सारे पौधे नाइट्रोजन छोड़ते हैं तो यह ऑक्सीजन देता है। 

4. गार्डेनिया प्लांट (Gardenia Plant)

One or Two Gardenia Crown Jewels
Buy gardenia live plant

यह एक तरह का विदेशी फूल है, आप इस फूल को देखने से पहले ही इसकी खुशबू को महसूस कर लेंगे। तेज सुगंधित खुसबू वाला यह सफेद रंग का फूल, दिमाग को शांत रखता है। क्योंकि इसकी महक काफी तेज होती है, तो इसे अपने बेडरूम में लगाने से आपका कमरा भी महकने लगेगा और आप आराम से सो पायेंगे। 

5. लैवेंडर प्लांट (Lavender Plant)

Lavender Live Plant

लैवेंडर का फूल काफी सारी चीजों में प्रयोग किया जाता है, इसकी महक साबुन, शैंपू और इत्र बनाने में इस्तेमाल की जाती है। इसकी खुसबू यहीं समाप्त नहीं होती है एरोमाथेरेपी में भी इसका प्रयोग होता है, क्योंकि यह दिमाग को सुकून पहुँचाता है और इसमें एंटीसेप्टिक व दर्द निवारक गुण होते हैं। लैवेंडर का तेल तंत्रिका थकावट और बेचैनी को दूर करने के लिए जाना जाता है। साथ ही यह मानसिक गतिविधि को बढ़ाता है और शांत भी रखता है। 

Posted on Leave a comment

घर में गुलाब का पौधा (Rose Plant) लगाने का सबसे सही तरीका।

गुलाब एक बहुत ही खूबसूरत, सुगंधित और आकर्षक फूल है। गुलाब को फूलों का राजा भी कहा जाता है। गुलाब का फूल भारत के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में उगाया जाता है। दूसरे फूलों की तुलना में गुलाब के फूल का व्यवसाय में सबसे अधिक महत्त्व है। गुलाब बहुवर्षीय पौधा है। गुलाब के पौधे को लगाते समय वातावरण ठंडा होना जरुरी है। सूर्य के प्रकाश का गुलाब के पौधों पर गहरा असर पड़ता है। इसे तेज धूप की जरुरत होती है, लेकिन ज्यादा प्रकाश की तीव्रता और कम तापमान में इसमें फूल नहीं आते। इसके आलावा भी गुलाब का पौधा लगाते वक्त कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। वो बातें निम्नवत हैं। 

How Do Your Roses Look? – BCLS Landscape Services
Buy Hybrid Rose Live Plant

1. सही मिट्टी का चयन जरुरी है। 

गुलाब को बलुई, दोमट मिट्टी, जिसमें कार्बनिक पदार्थ की मात्रा भरपूर हो, ऐसी मिटटी की जरुरत होती है। चिकनी मिट्टी में गुलाब फलता फूलता नहीं है। इसमें गोबर की खाद, फास्फोरस, पोटाश और दूसरे पोषक तत्व को मिलाकर मिट्टी तैयार करनी चाहिए। मिट्टी में गोबर की खाद और अन्य उर्वरक मिलाने के बाद भुर-भुरी होने पर क्यारी बनानी चाहिए और पौधे के लिए मिटटी को नम रखना चाहिए।

Planting bare root roses. | Rose Growing Tips
Buy Grafted Rose Live Plant

2. लगाने का सही तरीका 

वैसे तो गुलाब के फूलों को सुखाकर उनके बीज तैयार किये जाते हैं। लेकिन इसे गुलाब की कलम द्वारा भी लगाया जा सकता है। यह सबसे सरल और कम लागत वाली विधि है। इसके द्वारा पौधा लगाने वाले खुद पौधा बना सकते हैं और एक साल पुरानी गुलाब की कलमों का इस्तेमाल किया जाता है। कलम लगाने के बाद उनमें अच्छी तरह जड़ें और तना विकसित होने के बाद उन्हें दूसरे स्थान पर रोपित करना चाहिए। 

Buy Gardening Tools

3. सिंचाई और देखभाल 

पौधे रोपने के बाद गुलाब के पौधों को फुहार विधि से सींचना चाहिए। अगर पौधे गमले में लगाएं हैं तो उन पर ऊपर से पानी का छिड़काव करना चाहिए। इससे पौधों में शाखाएँ जल्दी फूटती हैं। पानी की मात्रा पौधों की वृद्धि और सूर्य की रोशनी की तीव्रता पर निर्भर करती है। गुलाब के पौधे में अधिक पानी की जरुरत होती है। गुलाब के पौधों में पानी सुबह 9 बजे तथा शाम को 3 बजे के आस पास दे देना चाहिए। गुलाब के पौधों की वृद्धि के लिए अन्य पौधों की भाँति नाइट्रोजन युक्त खाद देनी चाहिए। इसके अलावा खाद में नाइट्रेट, फास्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, सल्फर जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्त्व गुलाब के पौधों के लिए अति आवश्यक हैं। समय – समय पर इनमें आने वाले खर-पतवार निकाल देने चाहिए और मिटटी की निराई गुड़ाई करते रहना चाहिए। 

5 Tips for Pruning Roses Like a Pro | Gardener's Path
Buy Gardening Cutter For Plant

4. कीट – पतंगों से बचाव

गुलाब के पौधों पर एफिड की प्रजातियों का हमला होता है। हरे रंग वाला एफिड इसे नुकसान पहुँचा सकता है। इसके अलावा लाल मकड़ी, रेड स्केल, रोजवेफर जैसे कीट इनकी पत्तियों को नुकसान पहुँचाते हैं। इसके लिए इनमें कीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहिए।  

How to Grow Rose Plant | Growing Cultivation in India
Buy Fertilizer
Posted on Leave a comment

गार्डनिंग में कैसे करें केले के छिलकों का इस्तेमाल और जानें इसके फायदे।

Banana Peel Uses: 9 Ways Banana Peels Benefit Your Health | LittleThings.com

अगर आप केले के छिलकों को यूँ ही बर्बाद कर देते हैं या फेंक देते हैं तो रूक जाईये। अगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं तो केले के छिलके आपके गार्डन के लिए बहुत उपयोगी हैं। सभी के घर में केले खाये जाते हैं और खाने के बाद उन केले के छिलकों को आप डस्टबिन में फेंक देते हैं। ऐसा न करें, केले के छिलकों में भी काफी पोषक तत्व होते हैं और ये अच्छे उर्वरक होते हैं। जो गार्डन के पौधों को काफी पोषण प्रदान करते हैं। 

तो अब आप जानेंगे की केले के छिलकों को फ़र्टिलाइज़र के रूप में निम्न प्रकार से इस्तेमाल किया जा सकता है। 

1. छिलकों को काट लें और इसे खाद में मिला दें। कुछ दिनों बाद इसे पौधों में डालें, जिससे आपके पौधों को पोषण मिलेगा और आपके पौधे भी काफी अच्छे हो जायेंगे। 

2. केले के छिलकों को गर्म पानी में उबालकर रखा रहने दें। दो सप्ताह बाद इस पानी को पौधों में डाल दें, तब तक यह छिलके गल जायेंगे। 

3. केले के छिलकों को मिक्सी में पीस लें और इसे गर्म पानी में मिलाकर रख दें। जब यह ठंडा हो जाये तो पेंड और पौधों में डाल दें। 

अब जाने केले छिलकों के अद्भुद लाभ।

आपको सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन वास्तव में केले के छिलके कमाल के लाभकारी उपयोग वाले होते हैं। केला, भारत में मिलने वाला आम फल है। जो हर जगह, हर प्रान्त में मिलता है। लेकिन अब से इसके छिलके फेंकने से पहले आप सोचेंगे कि इन्हें फेंका जाये या नहीं। 

केले के छिलके में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व और कार्बोहाइड्रेड होते हैं। इसमें विटामिन B – 6, B – 12, मैग्नीशियम और कार्बोहाइड्रेड होता है। इसमें शुगर की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है। तो जानिए केले के छिलकों के अनोखे लाभ। 

1. चमकीले दांत पाएं :- केले के छिलके को हर दिन दांत में रगड़ने से उनमें चमक आ जाती है। 

2. मस्सा हटाएं :- इसे आप पैरों या हाथों में निकले वार्ट्स पर लगा सकते हैं। आपको केवल केले के छिलके को उस जगह पर रगड़ना होगा और रातभर ऐसे ही छोड़ देना होगा। इससे दुबारा उस जगह पर वार्ट्स नहीं निकलेंगे। 

3. खायें :- केले के छिलकों को खाया भी जा सकता है। भारतीय व्यंजनों में इन्हें पकाने की कई विधियाँ लिखी हुई हैं। टेंडर चिकेन बनाने में भी इनका उपयोग होता है। 

4. मुहांसे :- केले के छिलके को चेहरे और बॉडी में हर दिन 5 मिनट लगाने से मुंहासे दूर हो जाते हैं। 

5. रिंकल :- केले के छिकले स्कीन को हायड्रेट करते हैं। अंडे की जर्दी में केले के छिलके को मिलाकर चेहरे पर लगाएं, इससे झुर्रियां भाग जाएँगी। इस पेस्ट को चेहरे पर 5 मिनट के लिए लगाना होता है। 5 मिनट बाद धो लें। 

6. दर्द से राहत मिलती है :- जिस जगह पर भी बॉडी में दर्द होता हों, वहाँ केले के छिलके लगाने से आराम मिलती है। इसे लगातार 30 मिनट तक छोड़ दें, इससे भयंकर दर्द में भी राहत मिलती है। सब्जी आयल में इसे घिसकर लगाने में भी आराम मिलता है।  

7. सोराईसिस :- सोराईसिस होने पर केले के छिलकों को पीसकर लगाएं, इससे दाग भी चले जायेंगे और आराम मिलेगा। 

8. कीड़े के काटने पर :- अगर किसी कीड़े ने काट लिया हो, तो उस स्थान पर केले के छिलके को पीसकर लगा लें, इससे आराम मिलता है। 

9. शू, लेदर, सिल्वर पर पॉलिश का काम करता है :- केले के छिलके को शू , लेदर और सिल्वर पर लगाने से उसमें चमक आ जाती है। 

10. अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से बचाव :- केले का छिलका आँखों की युवी किरणों से रक्षा करता है। आँखों पर केले के छिलके को थोड़ी देर के लिए रख लें। इससे राहत मिलेगी। 

Buy Dwarf Banana Live Plant

Posted on Leave a comment

क्या आप भी टमाटर के शौकीन हैं, तो जान लीजिये रसीले टमाटर उगाने के बेहतर तरीकों को।

Buy now Tomato live plant

अगर आप भी टमाटर के शौकीन हैं तो आपको यह जरूर जान लेना चाहिए कि टमाटर की लगभग 100 से ज्यादा किस्में मौजूद हैं जिनका अपना अलग-अलग स्वाद होता है। टमाटर के शौकीन लोगों को लगता है कि घर पर ही सबसे बेहतरीन टमाटर उगायें जा सकते हैं। लेकिन ये सच नहीं है। टमाटर का स्वाद उनके उगाने की स्थितियों पर निर्भर करता है। कई किसान कमर्शियल क़्वालिटी को ध्यान में रखते हुए ऐसे टमाटर की नस्ल को चुनते हैं जिनका छिलका थोड़ा सख्त हो और जिन्हें आसानी से शिपिंग कर सकें और दिखने में रंग गहरा लाल हो। इन सारी चीजों का ध्यान रखने के बाद ही इनके फ्लेवर पर ध्यान दिया जाता है। 

वहीं दूसरी ओर घर पर टमाटर इसीलिए उगाये जाते हैं ताकि खाने में बेहतरीन स्वाद मिल सके। अगर आप भी घर पर स्वाद में बेहतरीन टमाटर की खेती करना चाहते हैं तो आपको ये जरूर मालूम होना चाहिए कि आपको किस तरह का टमाटर चाहिए। पड़ोसी के किचन गार्डन, फार्म मार्किट और यहाँ तक कि सुपरमार्केट में मिलने वाले टमाटरों के स्वाद में बहुत फर्क होता है। आपको जो भी टमाटर पसंद है उसकी वैरायटी का पता लगाएं। सिर्फ देखकर ही नहीं बल्कि स्वाद से पहचानें। 

इसके आलावा अगर आपको टमाटर से जुड़ी ज्यादा जानकारी चाहिए तो इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं। आमतौर पर बीज सबसे ज्यादा जरुरी होते हैं क्योंकि इनपर ही टमाटर की क़्वालिटी और किस्म निर्भर करती है। नॉन – हायब्रिड टमाटरों का स्वाद सबसे अच्छा होता है लेकिन हायब्रिड भी आप सामान्य यूज़ कर सकते हैं। 

ऐसे उगाएं घर पर रसीले टमाटर 

टमाटर को आधा बीच में से काट लें। एक गिलास में टमाटर को निचोड़ें और फिर चम्मच की मदद से सारे बीज निकाल लें। बीज के आसपास के जैली की तरह दिखने वाले फ्लूइड में अंकुरण को रोकने वाले इन्हिबिटर्स होते हैं। इन इन्हिबिटर्स को हटाने के लिए इनमें पानी मिलाएँ। दो से तीन दिन बाद एक पतली छलनी में बीजों को डालकर पानी निकाल लें। अब आप देखें कि इन्हिबिटर्स बीजों से अलग हो चुके होंगे। बीजों को सुखाने के लिए एक कागज पर रख दें। कागज को रोशनी व हवादार जगह पर रख दें। इनके सूखने के बाद बीजों को डिब्बे में स्टोर करके रख दें। ठंडी और सूखी जगह पर टमाटर के बीजों को चार साल तक ठीक रखा जा सकता है। 

6 सप्ताह का लगता है वक्त 

टमाटर उन सब्जियों में से एक है जिनकी खेती सबसे आसान होती है। वसंत शुरू होने के लगभग 6 सप्ताह पहले की तारीख को अपने कैलेंडर में नोट कर लें। इसी दिन आपको टमाटर के बीज बोने हैं। 6 सप्ताह के बाद आप देखेंगे कि बीजों ने अपना काम कर दिया। टमाटर की हर किस्म उगने में अलग – अलग समय लगता है। 

Buy Tomato Seeds
Posted on Leave a comment

क्या आपके घर में एक छोटा-सा किचन गार्डन होना चाहिए और क्यों, जानें इसके फायदे।

कई ऐसे लोग हैं जिनको गार्डेनिंग का बहुत शौक होता है। क्या आपको पता है, बागवानी का शौक रखने वाले लोग बहुत खुशनुमा होते हैं। घरों में छोटी-छोटी सब्जियों की बागवानी का शौक रखना चाहिए, इसके कई लाभ हैं। अगर आपके घर में सामने थोड़ी सी जमीन है तो उसे यूँ ही खाली न जानें दें और उसका उपयोग करें। आज इस आर्टिकल में हम आपको किचन गार्डन के लाभ बताएँगे। 

1. ताजी हर्ब मिलना 

तुलसी के पत्ते हों या मीठे नीम की पत्तियाँ, घर में किचन गार्डन होने पर आपको ये आसानी से मिल जाते हैं। आपको इन छोटी – छोटी हर्ब के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता है। 

Buy Elaichi live plant

2. पेस्टीसाइड रहित सब्जी या साग

किचन गार्डन होने पर आपको मालूम रहता है कि आप क्या खा रहे हैं। आजकल बाजार में पेस्टीसाइड पड़ी हुई सब्जियाँ व साग मिलता है, लेकिन घर पर उगी हुई सब्जी, सही होती है। 

Buy Brinjal Plant

3. सस्ता और अच्छा 

किचेन गार्डन में उगी सब्जियों को बनाने से आपका बजट मेंटेन रहता है। ये सब्जियाँ अच्छी और सस्ती होते हैं। आप मन मुताबिक समय पर उन्हें तोड़कर बना सकते हैं। 

Gifting - Fruit Basket : kibsons.com
Buy Fruit Plants

4. स्वास्थ्यवर्धक होना

घर पर तुलसी, धनिया और पुदीना जैसी चीजें उगाएं। इन्हे खाये, जिससे आपको कई रोगों में आराम मिलेगा। बुखार, अस्थमा, फेफड़ों के रोग आदि में ये फायदा करती हैं। ये सब आपको हेल्दी बनाती हैं। 

Premium Photo | Women eating vegetable while holding green apple with fruits,  vegetables, water, dumbbell and tape measure on white table. selection of  healthy food. clean eating and exercise concept.
Buy Healthy Plants

5. तनाव से मुक्ति 

बागवानी करने से तनाव कम होता है। आपका दिमाग उसी में लगा रहता है। जिससे आप इधर – उधर की बातें सोच नहीं पाते हैं।

Top 20 Ways to Reduce Your Daily Stress

6. कीड़े-मकोड़े कम होना 

घर में किचेन गार्डन होने से कीट आदि कम पैदा होते हैं क्योंकि खाली जगह का सदुपयोग हो जाता है। साथ ही कुछ विशेष प्रकार के पौधे, कीटों को भगाने में सक्षम होते हैं, जैसे – गेंदे के पौधे को हर 3 हर्ब के बाद लगाने से हर्ब हर्ब अच्छी बानी रहती हैं। 

Buy Fertilizer for plants

7. सकारात्मक परिवर्तन

बागवानी करने से आप में सकारात्मक परिवर्तन आ जाता है। आप खुद की केयर करना  शुरू कर देते हैं। पौधों की देखभाल करने में आपको संतुष्टि मिलती है। जिससे आपका स्वास्थ्य अच्छा हो जाता है। 

Planting Tips for New Gardeners | Better Homes & Gardens
Buy Gardening Tools